अन-नमल · 82/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
۞ وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ ۝٨٢
Wa izaa waqa`al qawhu `alaihim akhrajnaa lahum daabbatam minal ardi tukal limuhum annan naasa kaanoo bi aayaatinaa laa yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • "وَقَعَ الْقَوْلُ": अर्थात अज़ाब (यातना) का वचन पूरा होना और उसका लागू होना।
  • "دَابَّةً": चलने-फिरने वाला प्राणी, यहाँ आख़िरी ज़माने में निकलने वाली एक विशेष चीज़ (दाब्बा) मुराद है।
  • "تُكَلِّمُهُمْ": उनसे बात करेगी, उन्हें सम्बोधित करेगी।
  • "لَا يُوقِنُونَ": यक़ीन नहीं करते थे, पूर्ण विश्वास नहीं रखते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला का फ़ैसला और अज़ाब का वचन उन लोगों पर साबित हो जाएगा—जो अपनी सरकशी, नाफ़रमानी और हद से गुज़रने की वजह से अल्लाह की रहमत से महरूम हो चुके होंगे और ज़मीन पर सिर्फ़ बदतरीन लोग बच जाएँगे—तो उस वक़्त अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत से ज़मीन से एक दाब्बा (चलने-फिरने वाला प्राणी) निकालेगा। यह क़यामत की बड़ी निशानियों में से एक है, जो आख़िरी ज़माने में ज़ाहिर होगी। यह दाब्बा लोगों से बात करेगी और उन्हें साफ़ अल्फ़ाज़ में बताएगी कि लोग अल्लाह की आयतों (क़ुरआन और मुहम्मद ﷺ की रिसालत) पर यक़ीन नहीं करते थे और उन्हें झुठलाते थे। यह उन लोगों के लिए एक निशानी होगी कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है, और जो लोग पहले शक और इनकार में पड़े थे, वे अपनी ग़लती को महसूस करेंगे, मगर उस वक़्त ईमान लाना किसी काम नहीं आएगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की निशानियाँ और उसके फ़ैसले हक़ हैं और ज़रूर पूरे होंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम आज ही अपने ईमान को मज़बूत करें, अल्लाह की आयतों पर पूरा यक़ीन रखें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्म के मुताबिक़ ढालें। क़यामत की निशानियों पर ईमान लाना हमारे ईमान का हिस्सा है, और यह हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की कामयाबी की तरफ़ राह दिखाता है। अल्लाह तआला ने हमें क़ुरआन और रसूल ﷺ के ज़रिए हिदायत दी है, तो हमें उस पर अमल करके अपनी किस्मत को रौशन करना चाहिए, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिन पर अज़ाब का वचन साबित हो जाए।



📜 आयत 80-84 — सूरा अन-नमल

80إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो
81وَمَا أَنتَ بِهَادِي الْعُمْيِ عَن ضَلَالَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और न तुम अंधें को उनकी गुमराही से राह पर ला सकते हो तुम तो बस उन्हीं लोगों को (अपनी बात) सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं
82۞ وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे
83وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوْجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِآيَاتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
84حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — अन-नमल 82

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Thursday, October 1, 2026

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