अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अशुद्दहु (أَشُدَّهُ): पूर्ण शक्ति और शारीरिक परिपक्वता की अवस्था, जो आमतौर पर तीस वर्ष की आयु के आसपास होती है।
- इस्तवा (اسْتَوَىٰ): शक्ति का पूर्ण रूप से संतुलित और स्थिर हो जाना, यानी चालीस वर्ष की आयु तक पहुँचना।
- हुक्म (حُكْمًا): समझ, बुद्धि, और सही निर्णय लेने की क्षमता; इसे हिक्मत और फ़िक़्ह (धार्मिक समझ) भी कहा जाता है।
- इल्म (عِلْمًا): ज्ञान, विशेष रूप से धार्मिक और व्यावहारिक ज्ञान जो जीवन के सही मार्ग दिखाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी पूर्ण युवावस्था और शारीरिक परिपक्वता को पहुँचे, और उनकी शक्ति संतुलित हो गई — यानी वे तीस से चालीस वर्ष की आयु के बीच पहुँचे, जो नबुव्वत (पैग़म्बरी) का समय होता है — तो अल्लाह तआला ने उन्हें हुक्म (हिक्मत और गहरी समझ) और इल्म (धार्मिक और व्यावहारिक ज्ञान) प्रदान किया। यह ज्ञान और समझ उन्हें नबुव्वत से पहले ही दी गई थी, ताकि वे सत्य को समझ सकें, असत्य का खंडन कर सकें, और लोगों को सही रास्ते की ओर बुला सकें। इससे पहले कि वे पैग़म्बर बनते, वे सच बोलते थे, बुराई का विरोध करते थे, और अपनी क़ौम के बीच एक नेक और समझदार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे।
यह अल्लाह का नियम और सुन्नत (रीति) है कि वह अपने नेक और मुहसिन (भलाई करने वाले) बंदों को उनके अच्छे कर्मों और ईमानदारी का बदला देता है। जिस प्रकार अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उनकी नेकी और ईमानदारी के कारण हिक्मत और इल्म से नवाज़ा, उसी प्रकार वह हर उस व्यक्ति को, जो अपने कर्मों को शुद्ध करता है, अपने रब की इबादत में सच्चा होता है, और लोगों के साथ भलाई करता है, उसे भी विशेष ज्ञान, समझ और सफलता प्रदान करता है। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने नेक बंदों को दुनिया में भी सम्मान देता है और आख़िरत में भी उनके लिए बड़ा इनाम तैयार करता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता केवल शारीरिक शक्ति या सांसारिक साधनों में नहीं है, बल्कि असली कामयाबी अल्लाह की ओर से मिलने वाली हिक्मत और इल्म में है। जो व्यक्ति अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालता है, वही सच्चा मुहसिन है, और अल्लाह ऐसे लोगों को कभी निराश नहीं करता। यह आयत हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में नेकी, ईमानदारी और अच्छे आचरण को अपनाएँ, क्योंकि अल्लाह की मदद और रहमत उन्हीं के साथ होती है जो भलाई करते हैं और अपने रब की ओर झुकते हैं।
📜 आयत 12-16 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 14
सूरा अल-क़सस आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब मूसा अपनी जवानी को पहुँचे और (हाथ पाँव…सूरा आयत 14/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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