Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَرَدَدْنَاهُ: हमने उसे (मूसा को) लौटा दिया।
- تَقَرَّ عَيْنُهَا: उसकी आँखें ठंडी हों (अर्थात् उसे सुकून और खुशी मिले)।
- وَلَا تَحْزَنَ: और वह गमगीन न हो।
- وَعْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वादा।
- لَا يَعْلَمُونَ: वे नहीं जानते।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की माँ के साथ अपनी असीम कृपा और रहमत का ज़िक्र किया है। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) को दरिया से निकालकर फ़िरऔन के महल में पहुँचाया गया, तो अल्लाह ने उनकी माँ के दिल में उसी का दूध पीने की लालसा पैदा कर दी, और उसी के माध्यम से उसे वापस उसकी माँ की गोद में पहुँचा दिया। यह अल्लाह का वादा था जो उसने पहले अपनी वही (प्रेरणा) में उसकी माँ से किया था कि "हम उसे तुम्हारे पास वापस लाएँगे और उसे पैग़म्बर बनाएँगे।"
अल्लाह ने उसे उसकी माँ की ओर लौटा दिया ताकि:
- उसकी आँखें ठंडी हों — यानी वह अपने बच्चे को देखकर खुश हो और उसका दिल सुकून पाए।
- वह गमगीन न हो — क्योंकि बच्चे से बिछड़ने का ग़म माँ के लिए बहुत बड़ा सदमा था।
- वह जान ले कि अल्लाह का वादा सच्चा है — अल्लाह ने जो वादा किया था कि वह बच्चे को वापस करेगा, वह पूरा हुआ। यह उसके लिए ईमान और यक़ीन की मज़बूती का सबब बना।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता, लेकिन अधिकतर लोग (मुशरिकीन और काफ़िर) इस हक़ीक़त को नहीं जानते। वे अल्लाह की क़ुदरत और उसके वादों पर यक़ीन नहीं करते, इसलिए वे इस सच्चाई से महरूम रहते हैं।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हालात बिल्कुल विपरीत दिखें, जब कोई उम्मीद न हो, तब भी अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उनके दिलों को सुकून देता है। मूसा की माँ ने अल्लाह पर भरोसा किया और अल्लाह ने उसे वह सब कुछ दिया जो वह चाहती थी। आज भी अगर हम अल्लाह पर पूरा भरोसा करें, उसके वादों पर यक़ीन रखें, तो अल्लाह हमारी मुश्किलों को आसान करेगा और हमें ऐसी जगह से रिज़्क़ और मदद देगा जहाँ से हमें उम्मीद भी न हो। यही ईमान की ताक़त है — कि अल्लाह का वादा सच्चा है, चाहे हालात कैसे भी हों। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह पर भरोसा करें, उसकी रहमत से निराश न हों, और उसके वादों पर पूरा यक़ीन रखें। यही सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता है।
📜 आयत 11-15 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 13
सूरा अल-क़सस आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ (इस तरकीब से) हमने मूसा को उसकी माँ तक…सूरा आयत 13/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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