अल-क़सस · 13/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
فَرَدَدْنَاهُ إِلَىٰ أُمِّهِ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ أَنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝١٣
Faradadnaahu ilaa ummihee kai taqarra `ainuhaa wa laa tahzana wa lita`lama anna wa`dal laahi haqqunw wa laakinna aksarahum laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ (इस तरकीब से) हमने मूसा को उसकी माँ तक फिर पहुँचा दिया ताकि उसकी ऑंख ठन्डी हो जाए और रंज न करे और ताकि समझ ले ख़ुदा का वायदा बिल्कुल ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرَدَدْنَاهُ: हमने उसे (मूसा को) लौटा दिया।
  • تَقَرَّ عَيْنُهَا: उसकी आँखें ठंडी हों (अर्थात् उसे सुकून और खुशी मिले)।
  • وَلَا تَحْزَنَ: और वह गमगीन न हो।
  • وَعْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वादा।
  • لَا يَعْلَمُونَ: वे नहीं जानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की माँ के साथ अपनी असीम कृपा और रहमत का ज़िक्र किया है। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) को दरिया से निकालकर फ़िरऔन के महल में पहुँचाया गया, तो अल्लाह ने उनकी माँ के दिल में उसी का दूध पीने की लालसा पैदा कर दी, और उसी के माध्यम से उसे वापस उसकी माँ की गोद में पहुँचा दिया। यह अल्लाह का वादा था जो उसने पहले अपनी वही (प्रेरणा) में उसकी माँ से किया था कि "हम उसे तुम्हारे पास वापस लाएँगे और उसे पैग़म्बर बनाएँगे।"

अल्लाह ने उसे उसकी माँ की ओर लौटा दिया ताकि:

  1. उसकी आँखें ठंडी हों — यानी वह अपने बच्चे को देखकर खुश हो और उसका दिल सुकून पाए।
  2. वह गमगीन न हो — क्योंकि बच्चे से बिछड़ने का ग़म माँ के लिए बहुत बड़ा सदमा था।
  3. वह जान ले कि अल्लाह का वादा सच्चा है — अल्लाह ने जो वादा किया था कि वह बच्चे को वापस करेगा, वह पूरा हुआ। यह उसके लिए ईमान और यक़ीन की मज़बूती का सबब बना।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता, लेकिन अधिकतर लोग (मुशरिकीन और काफ़िर) इस हक़ीक़त को नहीं जानते। वे अल्लाह की क़ुदरत और उसके वादों पर यक़ीन नहीं करते, इसलिए वे इस सच्चाई से महरूम रहते हैं।

दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हालात बिल्कुल विपरीत दिखें, जब कोई उम्मीद न हो, तब भी अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उनके दिलों को सुकून देता है। मूसा की माँ ने अल्लाह पर भरोसा किया और अल्लाह ने उसे वह सब कुछ दिया जो वह चाहती थी। आज भी अगर हम अल्लाह पर पूरा भरोसा करें, उसके वादों पर यक़ीन रखें, तो अल्लाह हमारी मुश्किलों को आसान करेगा और हमें ऐसी जगह से रिज़्क़ और मदद देगा जहाँ से हमें उम्मीद भी न हो। यही ईमान की ताक़त है — कि अल्लाह का वादा सच्चा है, चाहे हालात कैसे भी हों। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह पर भरोसा करें, उसकी रहमत से निराश न हों, और उसके वादों पर पूरा यक़ीन रखें। यही सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 11-15 — अल-क़सस

11وَقَالَتْ لِأُخْتِهِ قُصِّيهِ ۖ فَبَصُرَتْ بِهِ عَن جُنُبٍ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और मूसा की माँ ने (दरिया में डालते वक्त) उनकी बहन (कुलसूम) से कहा कि तुम इसके पीछे पीछे (अलग) चली जाओ तो वह मूसा को दूर से देखती रही और उन लोगो को उसकी ख़बर भी न हुई
12۞ وَحَرَّمْنَا عَلَيْهِ الْمَرَاضِعَ مِن قَبْلُ فَقَالَتْ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ أَهْلِ بَيْتٍ يَكْفُلُونَهُ لَكُمْ وَهُمْ لَهُ نَاصِحُونَ
और हमने मूसा पर पहले ही से और दाईयों (के दूध) को हराम कर दिया था (कि किसी की छाती से मुँह न लगाया) तब मूसा की बहन बोली भला मै तुम्हें एक घराने का पता बताऊ कि वह तुम्हारी ख़ातिर इस बच्चे की परवरिश कर देंगे और वह यक़ीनन इसके खैरख्वाह होगे
13فَرَدَدْنَاهُ إِلَىٰ أُمِّهِ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ أَنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
ग़रज़ (इस तरकीब से) हमने मूसा को उसकी माँ तक फिर पहुँचा दिया ताकि उसकी ऑंख ठन्डी हो जाए और रंज न करे और ताकि समझ ले ख़ुदा का वायदा बिल्कुल ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
14وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُ وَاسْتَوَىٰ آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
और जब मूसा अपनी जवानी को पहुँचे और (हाथ पाँव निकाल के) दुरुस्त हो गए तो हमने उनको हिकमत और इल्म अता किया और नेकी करने वालों को हम यूँ जज़ाए खैर देते हैं
15وَدَخَلَ الْمَدِينَةَ عَلَىٰ حِينِ غَفْلَةٍ مِّنْ أَهْلِهَا فَوَجَدَ فِيهَا رَجُلَيْنِ يَقْتَتِلَانِ هَٰذَا مِن شِيعَتِهِ وَهَٰذَا مِنْ عَدُوِّهِ ۖ فَاسْتَغَاثَهُ الَّذِي مِن شِيعَتِهِ عَلَى الَّذِي مِنْ عَدُوِّهِ فَوَكَزَهُ مُوسَىٰ فَقَضَىٰ عَلَيْهِ ۖ قَالَ هَٰذَا مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ ۖ إِنَّهُ عَدُوٌّ مُّضِلٌّ مُّبِينٌ
और एक दिन इत्तिफाक़न मूसा शहर में ऐसे वक्त अाए कि वहाँ के लोग (नींद की) ग़फलत में पडे हुए थे तो देखा कि वहाँ दो आदमी आपस में लड़े मरते हैं ये (एक) तो उनकी क़ौम (बनी इसराइल) में का है और वह (दूसरा) उनके दुश्मन की क़ौम (क़िब्ती) का है तो जो शख्स उनकी क़ौम का था उसने उस शख्स से जो उनके दुश्मनों में था (ग़लबा हासिल करने के लिए) मूसा से मदद माँगी ये सुनते ही मूसा ने उसे एक घूसा मारा था कि उसका काम तमाम हो गया फिर (ख्याल करके) कहने लगे ये शैतान का काम था इसमें शक नहीं कि वह दुश्मन और खुल्लम खुल्ला गुमराह करने वाला है
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अनुवाद — अल-क़सस 13

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Tuesday, August 18, 2026

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