अल-क़सस · 22/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلْقَاءَ مَدْيَنَ قَالَ عَسَىٰ رَبِّي أَن يَهْدِيَنِي سَوَاءَ السَّبِيلِ ۝٢٢
Wa lammaa tawajjaha tilqaaa`a Madyana qaala `asaa Rabbeee ai yahdiyanee Sawaaa`as Sabeel
📖 हिंदी अर्थ
और जब मदियन की तरफ रुख़ किया (और रास्ता मालूम न था) तो आप ही आप बोले मुझे उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे सीधे रास्ता दिखा दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَجَّهَ: रुख किया, चल पड़ा
  • تِلْقَاءَ: की ओर, की तरफ
  • مَدْيَنَ: मदयन (शुऐब अलैहिस्सलाम का शहर)
  • عَسَى: आशा है, उम्मीद है
  • يَهْدِيَنِي: मुझे मार्गदर्शन करे
  • سَوَاءَ السَّبِيلِ: सीधा और सही रास्ता

तफसीर:

जब मूसा अलैहिस्सलाम फ़िरऔन के इलाके से निकलकर मदयन की तरफ रुख करके चले, तो वे एक अनजान रास्ते पर थे। उन्हें मदयन का रास्ता नहीं मालूम था, और वे अकेले थे, बिना किसी साथी के, बिना किसी मार्गदर्शक के। उस वक्त उन्होंने अपने रब से गुहार लगाई और कहा: "उम्मीद है मेरा रब मुझे सीधा और सही रास्ता दिखाएगा।"

यह दुआ मूसा अलैहिस्सलाम की तौहीद और अल्लाह पर भरोसे की गवाही है। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं रास्ता खोज लूँगा, बल्कि उन्होंने अल्लाह की तरफ रुजू किया और उसी से हिदायत माँगी। यह एक मोमिन की पहचान है कि वह हर मुश्किल में अल्लाह को याद करता है और उसी से मदद माँगता है।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है। जब इंसान किसी काम में पड़ता है और रास्ता नहीं सूझता, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह से दुआ करे और उसी से हिदायत माँगे। अल्लाह उसे ज़रूर रास्ता दिखाता है, जैसे उसने मूसा अलैहिस्सलाम को रास्ता दिखाया और उन्हें मदयन पहुँचाया, जहाँ उन्हें राहत और आराम मिला।

यह दुआ हमें सिखाती है कि हर मुश्किल में अल्लाह की तरफ रुजू करें, क्योंकि अल्लाह ही है जो रास्ते दिखाता है, दिलों को सुकून देता है और मुश्किलों से निकालता है। जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बनाता है।



📜 आयत 20-24 — अल-क़सस

20وَجَاءَ رَجُلٌ مِّنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ يَسْعَىٰ قَالَ يَا مُوسَىٰ إِنَّ الْمَلَأَ يَأْتَمِرُونَ بِكَ لِيَقْتُلُوكَ فَاخْرُجْ إِنِّي لَكَ مِنَ النَّاصِحِينَ
और एक शख्स शहर के उस किनारे से डराता हुआ आया और (मूसा से) कहने लगा मूसा (तुम ये यक़ीन जानो कि शहर के) बड़े बड़े आदमी तुम्हारे आदमी तुम्हारे बारे में मशवरा कर रहे हैं कि तुमको कत्ल कर डालें तो तुम (शहर से) निकल भागो
21فَخَرَجَ مِنْهَا خَائِفًا يَتَرَقَّبُ ۖ قَالَ رَبِّ نَجِّنِي مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
मै तुमसे ख़ैरख्वाहाना (भलाइ के लिए) कहता हूँ ग़रज़ मूसा वहाँ से उम्मीद व बीम की हालत में निकल खडे हुए और (बारगाहे ख़ुदा में) अर्ज़ की परवरदिगार मुझे ज़ालिम लोगों (के हाथ) से नजात दे
22وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلْقَاءَ مَدْيَنَ قَالَ عَسَىٰ رَبِّي أَن يَهْدِيَنِي سَوَاءَ السَّبِيلِ
और जब मदियन की तरफ रुख़ किया (और रास्ता मालूम न था) तो आप ही आप बोले मुझे उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे सीधे रास्ता दिखा दे
23وَلَمَّا وَرَدَ مَاءَ مَدْيَنَ وَجَدَ عَلَيْهِ أُمَّةً مِّنَ النَّاسِ يَسْقُونَ وَوَجَدَ مِن دُونِهِمُ امْرَأَتَيْنِ تَذُودَانِ ۖ قَالَ مَا خَطْبُكُمَا ۖ قَالَتَا لَا نَسْقِي حَتَّىٰ يُصْدِرَ الرِّعَاءُ ۖ وَأَبُونَا شَيْخٌ كَبِيرٌ
और (आठ दिन फाक़ा करते चले) जब शहर मदियन के कुओं पर (जो शहर के बाहर था) पहुँचें तो कुओं पर लोगों की भीड़ देखी कि वह (अपने जानवरों को) पानी पिला रहे हैं और उन सबके पीछे दो औरतो (हज़रत शुएब की बेटियों) को देखा कि वह (अपनी बकरियों को) रोके खड़ी है मूसा ने पूछा कि तुम्हारा क्या मतलब है वह बोली जब तक सब चरवाहे (अपने जानवरों को) ख़ूब छक के पानी पिला कर फिर न जाएँ हम नहीं पिला सकते और हमारे वालिद बहुत बूढे हैं
24فَسَقَىٰ لَهُمَا ثُمَّ تَوَلَّىٰ إِلَى الظِّلِّ فَقَالَ رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
तब मूसा ने उन की (बकरियों) के लिए (पानी खीच कर) पिला दिया फिर वहाँ से हट कर छांव में जा बैठे तो (चूँकि बहुत भूक थी) अर्ज क़ी परवरदिगार (उस वक्त) ज़ो नेअमत तू मेरे पास भेज दे मै उसका सख्त हाजत मन्द हूँ
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अनुवाद — अल-क़सस 22

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Tuesday, August 18, 2026

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