अल-क़सस · 75/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَنَزَعْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا فَقُلْنَا هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ فَعَلِمُوا أَنَّ الْحَقَّ لِلَّهِ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ ۝٧٥
Wa naza`naa min kulli ummatin shaheedan faqulnaa haatoo burhaanakum fa`alimooo annal haqqa lillaahi wa dalla `anhum maa kaanoo yaftaroon
📖 हिंदी अर्थ
और हम हर एक उम्मत से एक गवाह (पैग़म्बर) निकाले (सामने बुलाएँगे) फिर (उस दिन मुशरेकीन से) कहेंगे कि अपनी (बराअत की) दलील पेश करो तब उन्हें मालूम हो जाएगा कि हक़ ख़ुदा ही की तरफ़ है और जो इफ़तेरा परवाज़ियाँ ये लोग किया करते थे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَنَزَعْنَا: हमने निकाला / प्रस्तुत किया
  • شَهِيدًا: गवाह (यहाँ अर्थ है नबी)
  • هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ: अपना प्रमाण लाओ
  • وَضَلَّ عَنْهُم: उनसे खो गया / गायब हो गया
  • يَفْتَرُونَ: वे झूठ घड़ते थे (झूठे दावे करते थे)

विस्तृत तफसीर:

उस महान दिन (क़ियामत) का दृश्य अत्यंत भयावह और न्यायपूर्ण होगा, जब अल्लाह तआला हर उम्मत से उसका नबी गवाह बनाकर पेश करेगा। हर नबी अपनी उम्मत के सामने खड़ा होकर गवाही देगा कि उसने उन्हें सत्य का संदेश पहुँचाया था, और उन्होंने उसे झुठलाया और अल्लाह के साथ शिर्क किया। यह गवाही उनके खिलाफ़ होगी, उनके पक्ष में नहीं।

इसके बाद अल्लाह तआला उन मुन्किरों से कहेगा: "अपना प्रमाण लाओ, अपनी दलीलें पेश करो, जो सबूत तुम्हारे पास थे उन्हें दिखाओ, जिनके आधार पर तुमने अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराया और उसके दीन को झुठलाया।" लेकिन उस दिन उनके पास कोई प्रमाण नहीं होगा, कोई दलील नहीं होगी, कोई बहाना नहीं चलेगा। उनकी सारी हुज्जतें काट दी जाएँगी, और वे पूरी तरह निरुत्तर हो जाएँगे।

उसी क्षण उन्हें पूर्ण विश्वास हो जाएगा कि सत्य केवल अल्लाह का है, सच्चाई, सत्ता और प्रभुत्व में कोई उसका साझी नहीं है। वे जान लेंगे कि जो झूठे देवता, जो मूर्तियाँ, जो झूठे दावे और जो बातें वे दुनिया में घड़ते थे और अल्लाह पर थोपते थे, वे सब उनसे गायब हो जाएँगे। उनके वे सारे सहारे, जिन पर उन्हें भरोसा था, उस दिन उनसे बिछड़ जाएँगे और वे उनके किसी काम न आएँगे। यहाँ तक कि वे स्वयं उनसे बचने की कोशिश करेंगे, जैसा कि क़ुरआन ने बताया कि मूर्तियाँ उनसे बराअत (बेज़ारी) जताएँगी।

यह दृश्य हमें सिखाता है कि सत्य केवल अल्लाह का है, और उसकी इबादत ही सच्चा रास्ता है। दुनिया में जो भी झूठे सहारे और झूठे देवता हैं, वे सब बेकार हैं। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में यह मौका दिया है कि हम उसकी इबादत करें, उसके रास्ते पर चलें, और उसके नबियों की बात मानें, ताकि उस दिन हम शर्मिंदा न हों और हमारे पास कोई प्रमाण हो। याद रखिए, जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह को पहचान लेता है और उसकी इबादत करता है, उसके लिए उस दिन खुशखबरी है, और जो उससे मुँह मोड़ता है, उसके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई को अपनाना चाहिए और झूठे दावों से बचना चाहिए। अल्लाह तआला हर चीज़ को जानता है, और उसका न्याय पूर्ण है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को शिर्क से पाक रखें और केवल अल्लाह की इबादत करें, क्योंकि वही सच्चा मालिक है, और उसके सिवा जो कुछ भी है, वह मिथ्या है।

🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — अल-क़सस

73وَمِن رَّحْمَتِهِ جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और उसने अपनी मेहरबानी से तुम्हारे वास्ते रात और दिन को बनाया ताकि तुम रात में आराम करो और दिन में उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
74وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَائِيَ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन वह उन्हें पुकार कर पूछेगा जिनको तुम लोग मेरा शरीक ख्याल करते थे वह (आज) कहाँ हैं
75وَنَزَعْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا فَقُلْنَا هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ فَعَلِمُوا أَنَّ الْحَقَّ لِلَّهِ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और हम हर एक उम्मत से एक गवाह (पैग़म्बर) निकाले (सामने बुलाएँगे) फिर (उस दिन मुशरेकीन से) कहेंगे कि अपनी (बराअत की) दलील पेश करो तब उन्हें मालूम हो जाएगा कि हक़ ख़ुदा ही की तरफ़ है और जो इफ़तेरा परवाज़ियाँ ये लोग किया करते थे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगी
76۞ إِنَّ قَارُونَ كَانَ مِن قَوْمِ مُوسَىٰ فَبَغَىٰ عَلَيْهِمْ ۖ وَآتَيْنَاهُ مِنَ الْكُنُوزِ مَا إِنَّ مَفَاتِحَهُ لَتَنُوءُ بِالْعُصْبَةِ أُولِي الْقُوَّةِ إِذْ قَالَ لَهُ قَوْمُهُ لَا تَفْرَحْ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْفَرِحِينَ
(नाशुक्री का एक क़िस्सा सुनो) मूसा की क़ौम से एक शख्स कारुन (नामी) था तो उसने उन पर सरकशी शुरु की और हमने उसको इस क़दर ख़ज़ाने अता किए थे कि उनकी कुन्जियाँ एक सकतदार जमाअत (की जामअत) को उठाना दूभर हो जाता था जब (एक बार) उसकी क़ौम ने उससे कहा कि (अपनी दौलत पर) इतरा मत क्योंकि ख़ुदा इतराने वालों को दोस्त नहीं रखता
77وَابْتَغِ فِيمَا آتَاكَ اللَّهُ الدَّارَ الْآخِرَةَ ۖ وَلَا تَنسَ نَصِيبَكَ مِنَ الدُّنْيَا ۖ وَأَحْسِن كَمَا أَحْسَنَ اللَّهُ إِلَيْكَ ۖ وَلَا تَبْغِ الْفَسَادَ فِي الْأَرْضِ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُفْسِدِينَ
और जो कुछ ख़ुदा ने तूझे दे रखा है उसमें आख़िरत के घर की भी जुस्तजू कर और दुनिया से जिस क़दर तेरा हिस्सा है मत भूल जा और जिस तरह ख़ुदा ने तेरे साथ एहसान किया है तू भी औरों के साथ एहसान कर और रुए ज़मीन में फसाद का ख्वाहा न हो-इसमें शक नहीं कि ख़ुदा फ़साद करने वालों को दोस्त नहीं रखता
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
75आयत

अनुवाद — अल-क़सस 75

सूरा अल-क़सस आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम हर एक उम्मत से एक गवाह (पैग़म्बर) निकाले…

सूरा आयत 75/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए