Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَنَزَعْنَا: हमने निकाला / प्रस्तुत किया
- شَهِيدًا: गवाह (यहाँ अर्थ है नबी)
- هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ: अपना प्रमाण लाओ
- وَضَلَّ عَنْهُم: उनसे खो गया / गायब हो गया
- يَفْتَرُونَ: वे झूठ घड़ते थे (झूठे दावे करते थे)
विस्तृत तफसीर:
उस महान दिन (क़ियामत) का दृश्य अत्यंत भयावह और न्यायपूर्ण होगा, जब अल्लाह तआला हर उम्मत से उसका नबी गवाह बनाकर पेश करेगा। हर नबी अपनी उम्मत के सामने खड़ा होकर गवाही देगा कि उसने उन्हें सत्य का संदेश पहुँचाया था, और उन्होंने उसे झुठलाया और अल्लाह के साथ शिर्क किया। यह गवाही उनके खिलाफ़ होगी, उनके पक्ष में नहीं।
इसके बाद अल्लाह तआला उन मुन्किरों से कहेगा: "अपना प्रमाण लाओ, अपनी दलीलें पेश करो, जो सबूत तुम्हारे पास थे उन्हें दिखाओ, जिनके आधार पर तुमने अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराया और उसके दीन को झुठलाया।" लेकिन उस दिन उनके पास कोई प्रमाण नहीं होगा, कोई दलील नहीं होगी, कोई बहाना नहीं चलेगा। उनकी सारी हुज्जतें काट दी जाएँगी, और वे पूरी तरह निरुत्तर हो जाएँगे।
उसी क्षण उन्हें पूर्ण विश्वास हो जाएगा कि सत्य केवल अल्लाह का है, सच्चाई, सत्ता और प्रभुत्व में कोई उसका साझी नहीं है। वे जान लेंगे कि जो झूठे देवता, जो मूर्तियाँ, जो झूठे दावे और जो बातें वे दुनिया में घड़ते थे और अल्लाह पर थोपते थे, वे सब उनसे गायब हो जाएँगे। उनके वे सारे सहारे, जिन पर उन्हें भरोसा था, उस दिन उनसे बिछड़ जाएँगे और वे उनके किसी काम न आएँगे। यहाँ तक कि वे स्वयं उनसे बचने की कोशिश करेंगे, जैसा कि क़ुरआन ने बताया कि मूर्तियाँ उनसे बराअत (बेज़ारी) जताएँगी।
यह दृश्य हमें सिखाता है कि सत्य केवल अल्लाह का है, और उसकी इबादत ही सच्चा रास्ता है। दुनिया में जो भी झूठे सहारे और झूठे देवता हैं, वे सब बेकार हैं। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में यह मौका दिया है कि हम उसकी इबादत करें, उसके रास्ते पर चलें, और उसके नबियों की बात मानें, ताकि उस दिन हम शर्मिंदा न हों और हमारे पास कोई प्रमाण हो। याद रखिए, जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह को पहचान लेता है और उसकी इबादत करता है, उसके लिए उस दिन खुशखबरी है, और जो उससे मुँह मोड़ता है, उसके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई को अपनाना चाहिए और झूठे दावों से बचना चाहिए। अल्लाह तआला हर चीज़ को जानता है, और उसका न्याय पूर्ण है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को शिर्क से पाक रखें और केवल अल्लाह की इबादत करें, क्योंकि वही सच्चा मालिक है, और उसके सिवा जो कुछ भी है, वह मिथ्या है।
📜 आयत 73-77 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 75
सूरा अल-क़सस आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम हर एक उम्मत से एक गवाह (पैग़म्बर) निकाले…सूरा आयत 75/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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