Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अथ़क़ाल (أثقال): बोझ, यहाँ अर्थ है गुनाह और पाप।
- अफ़्तिरा (افتراء): झूठ गढ़ना, अल्लाह पर झूठा आरोप लगाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो दूसरों को गुमराह करते हैं और उन्हें सीधे रास्ते से भटकाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मुशरिकीन, जो अपने बुज़ुर्गों की अंधी पैरवी करते हैं और दूसरों को भी अपने बातिल रास्ते पर चलने की दावत देते हैं, क़यामत के दिन वे न केवल अपने गुनाहों का बोझ उठाएँगे, बल्कि उन लोगों के गुनाहों का बोझ भी उठाएँगे जिन्हें उन्होंने गुमराह किया। यह बोझ उनके अपने बोझ के साथ और बढ़ जाएगा।
ग़ौरतलब है कि यहाँ यह स्पष्ट किया गया है कि जो लोग उनकी पैरवी करके गुमराह हुए, उनके गुनाहों में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि गुमराह करने वालों को भी उतना ही गुनाह मिलेगा जितना कि पैरवी करने वालों को। यह अल्लाह का बिल्कुल न्यायपूर्ण नियम है कि हर शख्स अपने किए का ज़िम्मेदार है, लेकिन जो दूसरों को गुमराह करता है, उसे दूसरों के गुनाह का हिस्सा भी दिया जाएगा।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़यामत के दिन उनसे पूछा जाएगा कि तुमने अल्लाह पर झूठे आरोप क्यों लगाए? तुमने उसके बारे में ऐसी बातें क्यों कहीं जो सच नहीं थीं? तुमने उसके दीन में ऐसी चीज़ें क्यों शामिल कीं जिनका उसने हुक्म नहीं दिया? यह पूछताछ सिर्फ़ तौबीह (डाँट-फटकार) के लिए होगी, क्योंकि उनका हिसाब पहले ही तय हो चुका होगा।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने आचरण और अपनी दावत का बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हम किसी को अच्छाई की तरफ बुलाते हैं, तो हमें उसका सवाब भी मिलेगा, और अगर हम किसी को बुराई की तरफ बुलाते हैं, तो हमें उसका गुनाह भी मिलेगा। यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अमल को सही करें और दूसरों को भी सिर्फ़ उसी रास्ते की दावत दें जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने बताया है। याद रखें, क़यामत का दिन बहुत करीब है, और उस दिन हर इंसान से उसके किए का हिसाब लिया जाएगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 11-15 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 13
सूरा अल-अंकबूत आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी…सूरा आयत 13/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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