अल-अंकबूत · 13/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالًا مَّعَ أَثْقَالِهِمْ ۖ وَلَيُسْأَلُنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ ۝١٣
Wa la yahmilunna asqaa lahum wa asqaalam ma`a asqaalihim wa la yus`alunna Yawmal Qiyaamati `ammaa kaanoo yaftaroon
📖 हिंदी अर्थ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अथ़क़ाल (أثقال): बोझ, यहाँ अर्थ है गुनाह और पाप।
  • अफ़्तिरा (افتراء): झूठ गढ़ना, अल्लाह पर झूठा आरोप लगाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो दूसरों को गुमराह करते हैं और उन्हें सीधे रास्ते से भटकाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मुशरिकीन, जो अपने बुज़ुर्गों की अंधी पैरवी करते हैं और दूसरों को भी अपने बातिल रास्ते पर चलने की दावत देते हैं, क़यामत के दिन वे न केवल अपने गुनाहों का बोझ उठाएँगे, बल्कि उन लोगों के गुनाहों का बोझ भी उठाएँगे जिन्हें उन्होंने गुमराह किया। यह बोझ उनके अपने बोझ के साथ और बढ़ जाएगा।

ग़ौरतलब है कि यहाँ यह स्पष्ट किया गया है कि जो लोग उनकी पैरवी करके गुमराह हुए, उनके गुनाहों में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि गुमराह करने वालों को भी उतना ही गुनाह मिलेगा जितना कि पैरवी करने वालों को। यह अल्लाह का बिल्कुल न्यायपूर्ण नियम है कि हर शख्स अपने किए का ज़िम्मेदार है, लेकिन जो दूसरों को गुमराह करता है, उसे दूसरों के गुनाह का हिस्सा भी दिया जाएगा।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़यामत के दिन उनसे पूछा जाएगा कि तुमने अल्लाह पर झूठे आरोप क्यों लगाए? तुमने उसके बारे में ऐसी बातें क्यों कहीं जो सच नहीं थीं? तुमने उसके दीन में ऐसी चीज़ें क्यों शामिल कीं जिनका उसने हुक्म नहीं दिया? यह पूछताछ सिर्फ़ तौबीह (डाँट-फटकार) के लिए होगी, क्योंकि उनका हिसाब पहले ही तय हो चुका होगा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने आचरण और अपनी दावत का बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हम किसी को अच्छाई की तरफ बुलाते हैं, तो हमें उसका सवाब भी मिलेगा, और अगर हम किसी को बुराई की तरफ बुलाते हैं, तो हमें उसका गुनाह भी मिलेगा। यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अमल को सही करें और दूसरों को भी सिर्फ़ उसी रास्ते की दावत दें जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने बताया है। याद रखें, क़यामत का दिन बहुत करीब है, और उस दिन हर इंसान से उसके किए का हिसाब लिया जाएगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 11-15 — सूरा अल-अंकबूत

11وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِقِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है
12وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا اتَّبِعُوا سَبِيلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَايَاكُمْ وَمَا هُم بِحَامِلِينَ مِنْ خَطَايَاهُم مِّن شَيْءٍ ۖ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े पर चलो और (क़यामत में) तुम्हारे गुनाहों (के बोझ) को हम (अपने सर) ले लेंगे हालॉकि ये लोग ज़रा भी तो उनके गुनाह उठाने वाले नहीं ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
13وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالًا مَّعَ أَثْقَالِهِمْ ۖ وَلَيُسْأَلُنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी
14وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَلَبِثَ فِيهِمْ أَلْفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمْسِينَ عَامًا فَأَخَذَهُمُ الطُّوفَانُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा तो वह उनमें पचास कम हज़ार बरस रहे (और हिदायत किया किए और जब न माना) तो आख़िर तूफान ने उन्हें ले डाला और वह उस वक्त भी सरकश ही थे
15فَأَنجَيْنَاهُ وَأَصْحَابَ السَّفِينَةِ وَجَعَلْنَاهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ
फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा लिया और हमने इस वाक़िये को सारी ख़ुदाई के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दी
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 13

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Thursday, October 1, 2026

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