अल-अंकबूत · 5/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
مَن كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآتٍ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٥
Man kaana yarjoo liqaaa `allaahi fa inna ajalal laahi laaat; wa Huwass Sameeul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
जो शख्स ख़ुदा से मिलने (क़यामत के आने) की उम्मीद रखता है तो (समझ रखे कि) ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) मीयाद ज़रुर आने वाली है और वह (सबकी) सुनता (और) जानता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ: अल्लाह से मिलने की उम्मीद रखना, उसके सवाब की आशा रखना और आख़िरत के हिसाब से डरना।
  • أَجَلَ اللَّهِ: अल्लाह का निर्धारित समय, यानी क़यामत का दिन और उसका फैसला।
  • لَآتٍ: ज़रूर आने वाला है, इसमें कोई शक नहीं।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • العَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफसीर:

यह आयत मोमिनों के दिलों को उम्मीद और यक़ीन से भर देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो शख्स अल्लाह से मिलने की उम्मीद रखता है — यानी उसके सवाब की आशा रखता है, उसके दीदार का शौक़ रखता है, और आख़िरत के हिसाब-किताब पर ईमान रखता है — तो उसे यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का निर्धारित समय ज़रूर आने वाला है। वह दिन दूर नहीं, बल्कि हर पल क़रीब आ रहा है। यह वादा सच्चा है और इसमें कोई शक नहीं।

यह आयत मोमिन को बताती है कि उसकी उम्मीद बेकार नहीं जाएगी। जो शख्स अल्लाह से मिलने की आशा रखता है, वह अपने आमाल को सुधारता है, गुनाहों से बचता है, और नेक कामों में जुट जाता है। उसकी यह कोशिश और उम्मीद अल्लाह के यहाँ ज़ाया नहीं होगी।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो सिफ़ात (गुणों) का ज़िक्र करता है: वह सुनने वाला है — वह अपने बंदों की दुआओं, तौबा और पुकार को सुनता है; और वह जानने वाला है — वह उनके दिलों के हाल, उनके अमाल और उनकी नीयतों को पूरी तरह जानता है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह हर किसी को उसके अमाल का पूरा-पूरा बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से मिलने की उम्मीद ही असली उम्मीद है। जो लोग दुनिया की चमक-दमक में खोए हुए हैं और आख़िरत को भूल गए हैं, उन्हें यह आयत जगाती है कि वह दिन ज़रूर आएगा जब सब कुछ खत्म हो जाएगा और हर इंसान अपने अमाल के साथ अल्लाह के सामने पेश होगा। यह उम्मीद इंसान को जीवन में सही रास्ता दिखाती है, उसे गुनाहों से रोकती है और नेकी की तरफ़ रग़बत देती है। अल्लाह से मिलने की आशा रखने वाला इंसान कभी मायूस नहीं होता, क्योंकि उसे यक़ीन होता है कि उसका रब सब कुछ सुनता और जानता है — उसकी मेहनत, उसकी दुआ, उसकी नेकियाँ — सब कुछ उसके हिसाब में दर्ज है। यही वह उम्मीद है जो दिल को सुकून देती है और ज़िंदगी को मक़सद देती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — अल-अंकबूत

3وَلَقَدْ فَتَنَّا الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ صَدَقُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْكَاذِبِينَ
और हमने तो उन लोगों का भी इम्तिहान लिया जो उनसे पहले गुज़र गए ग़रज़ ख़ुदा उन लोगों को जो सच्चे (दिल से ईमान लाए) हैं यक़ीनन अलहाएदा देखेगा और झूठों को भी (अलहाएदा) ज़रुर देखेगा
4أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ أَن يَسْبِقُونَا ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
क्या जो लोग बुरे बुरे काम करते हैं उन्होंने ये समझ लिया है कि वह हमसे (बचकर) निकल जाएँगे (अगर ऐसा है तो) ये लोग क्या ही बुरे हुक्म लगाते हैं
5مَن كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآتٍ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
जो शख्स ख़ुदा से मिलने (क़यामत के आने) की उम्मीद रखता है तो (समझ रखे कि) ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) मीयाद ज़रुर आने वाली है और वह (सबकी) सुनता (और) जानता है
6وَمَن جَاهَدَ فَإِنَّمَا يُجَاهِدُ لِنَفْسِهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ
और जो शख्स (इबादत में) कोशिश करता है तो बस अपने ही वास्ते कोशिश करता है (क्योंकि) इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा सारे जहाँन (की इबादत) से बेनियाज़ है
7وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम यक़ीनन उनके गुनाहों की तरफ से कफ्फारा क़रार देगें और ये (दुनिया में) जो आमाल करते थे हम उनके आमाल की उन्हें अच्छी से अच्छी जज़ा अता करेंगे
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
5आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 5

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Tuesday, August 18, 2026

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