अल-अंकबूत · 7/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٧
Wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lanukaf firanna `anhum saiyiaatihim wa lanajziyannahum ahsanal lazee kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम यक़ीनन उनके गुनाहों की तरफ से कफ्फारा क़रार देगें और ये (दुनिया में) जो आमाल करते थे हम उनके आमाल की उन्हें अच्छी से अच्छी जज़ा अता करेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ: हम उनके गुनाहों को ज़रूर मिटा देंगे और उन्हें ढक देंगे, यानी उन पर अज़ाब नहीं करेंगे।
  • وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ: हम उन्हें उनके अच्छे कर्मों का सबसे उत्तम बदला ज़रूर देंगे, यानी उनकी नेकियों को कई गुना बढ़ाकर देंगे।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो अल्लाह पर ईमान लाते हैं, उसके रसूल की तस्दीक़ करते हैं, और अपने ईमान के साथ नेक काम करते हैं—चाहे वह नमाज़ हो, ज़कात हो, रोज़ा हो, या लोगों की भलाई के लिए किए गए काम। अल्लाह तआला का वादा है कि वह उनके गुनाहों को माफ़ कर देगा और उन्हें पूरी तरह मिटा देगा, जैसे कि उन्होंने कभी किए ही न हों। यह अल्लाह का बड़ा फज़ल है कि वह गुनाहों को नेकियों से बदल देता है।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि वह उन्हें उनके अच्छे कामों का सबसे अच्छा बदला देगा। यानी अल्लाह उनकी छोटी नेकी को भी बड़ा करके उसका अज्र अता करेगा, और हर नेकी का बदला कई गुना बढ़ा देगा। यह अल्लाह की रहमत है कि वह बुराई का बदला उतना ही देता है, लेकिन भलाई का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक बढ़ा देता है।

इस आयत में उन लोगों के लिए तसल्ली है जो ईमान की राह में मुश्किलें झेलते हैं, और सब्र करते हैं। अल्लाह उन्हें यक़ीन दिलाता है कि उनकी मेहनत और सब्र बेकार नहीं जाएगा। जो लोग दुनिया में अल्लाह की राह में कष्ट सहते हैं, उनके लिए आख़िरत में ऐसा इनाम है जिसका कोई अंदाज़ा नहीं। यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और नेक कर्म साथ-साथ चलते हैं—सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान काफ़ी नहीं, बल्कि अमल से उसे साबित करना ज़रूरी है।

यह भी याद रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है। वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। जो लोग उस पर भरोसा करके नेक काम करते हैं, उनके लिए आख़िरत में कामयाबी यक़ीनी है। यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ बुलाती है और बताती है कि उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है—बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ पलटने की और अच्छे काम करने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-अंकबूत

5مَن كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآتٍ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
जो शख्स ख़ुदा से मिलने (क़यामत के आने) की उम्मीद रखता है तो (समझ रखे कि) ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) मीयाद ज़रुर आने वाली है और वह (सबकी) सुनता (और) जानता है
6وَمَن جَاهَدَ فَإِنَّمَا يُجَاهِدُ لِنَفْسِهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ
और जो शख्स (इबादत में) कोशिश करता है तो बस अपने ही वास्ते कोशिश करता है (क्योंकि) इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा सारे जहाँन (की इबादत) से बेनियाज़ है
7وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम यक़ीनन उनके गुनाहों की तरफ से कफ्फारा क़रार देगें और ये (दुनिया में) जो आमाल करते थे हम उनके आमाल की उन्हें अच्छी से अच्छी जज़ा अता करेंगे
8وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ حُسْنًا ۖ وَإِن جَاهَدَاكَ لِتُشْرِكَ بِي مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ فَلَا تُطِعْهُمَا ۚ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और हमने इन्सान को अपने माँ बाप से अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया है और (ये भी कि) अगर तुझे तेरे माँ बाप इस बात पर मजबूर करें कि ऐसी चीज़ को मेरा शरीक बना जिन (के शरीक होने) का मुझे इल्म तक नहीं तो उनका कहना न मानना तुम सबको (आख़िर एक दिन) मेरी तरफ लौट कर आना है मै जो कुछ तुम लोग (दुनिया में) करते थे बता दूँगा
9وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِي الصَّالِحِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम उन्हें (क़यामत के दिन) ज़रुर नेको कारों में दाख़िल करेंगे
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अनुवाद — अल-अंकबूत 7

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Tuesday, August 18, 2026

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