Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया।
- عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: नेक और अच्छे कर्म किए।
- لَنُدْخِلَنَّهُمْ: हम उन्हें अवश्य दाखिल करेंगे (प्रवेश देंगे)।
- فِي الصَّالِحِينَ: नेक लोगों के समूह में, यानी उन्हीं के साथ।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के लिए अल्लाह की ओर से एक बड़ी खुशखबरी और सम्मान का वादा है, जो सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाते हैं और अपने जीवन को नेक कर्मों से सजाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को वह अपनी विशेष रहमत से नवाज़ेगा और उन्हें अपने नेक बंदों के समूह में शामिल करेगा।
इसका मतलब यह है कि ईमान और अच्छे कर्मों का संगम ही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा, बल्कि उन्हें उन महान हस्तियों के साथ उठाएगा जो अल्लाह के नेक बंदे हैं — चाहे वे नबी हों, सिद्दीक़ हों, शहीद हों या सालिहीन (नेक लोग)। यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इज़्ज़त है कि वे उन पाक लोगों के साथ होंगे।
कुछ मुफ़स्सिरीन ने इसका अर्थ यह भी लिया है कि अल्लाह उन्हें नेक लोगों के दर्जे पर दाखिल करेगा, यानी उन्हें जन्नत में वही ऊँचा मुक़ाम देगा जो नेक लोगों को मिलता है। दोनों अर्थों में एक ही बात है — ईमानवालों के लिए जन्नत और अल्लाह की रज़ा (खुशी) का वादा है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस इंसान के लिए एक उम्मीद और हौसले की बात है जो अपनी कमज़ोरियों और गुनाहों के बावजूद अल्लाह की ओर रुजू करता है। अल्लाह ने यह नहीं कहा कि हम सिर्फ़ मासूम (बेदाग) लोगों को ही जन्नत देंगे, बल्कि उसने ईमान और नेक कर्मों को शर्त बनाया है। इसका मतलब है कि जब तक इंसान ज़िंदा है, उसके पास मौका है कि वह अपने ईमान को मज़बूत करे और अपने अच्छे कर्मों से अल्लाह की रहमत का हक़दार बने।
यह वादा हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — वह अपने बंदों को उनकी छोटी-सी नेकी पर भी बड़ा इनाम देता है और उन्हें अपने प्यारे बंदों के साथ जोड़ देता है। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने ईमान को जीवित रखना चाहिए और भले कामों में लगे रहना चाहिए, ताकि हम भी उस मुबारक समूह में शामिल हो सकें, जिसका वादा अल्लाह ने अपनी इस आयत में किया है।
याद रखिए, ईमान और अमल-ए-सालिह (नेक कर्म) ही वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के करीब लाता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को इसी दिशा में ढालें और अल्लाह से इस वादे की पूर्ति की दुआ करें।
📜 आयत 7-11 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 9
सूरा अल-अंकबूत आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे…सूरा आयत 9/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


