अल-अंकबूत · 9/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِي الصَّالِحِينَ ۝٩
Wallazeena aamanoo w a`amilus saalihaati lanudkhilan nahum fis saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम उन्हें (क़यामत के दिन) ज़रुर नेको कारों में दाख़िल करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया।
  • عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: नेक और अच्छे कर्म किए।
  • لَنُدْخِلَنَّهُمْ: हम उन्हें अवश्य दाखिल करेंगे (प्रवेश देंगे)।
  • فِي الصَّالِحِينَ: नेक लोगों के समूह में, यानी उन्हीं के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए अल्लाह की ओर से एक बड़ी खुशखबरी और सम्मान का वादा है, जो सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाते हैं और अपने जीवन को नेक कर्मों से सजाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को वह अपनी विशेष रहमत से नवाज़ेगा और उन्हें अपने नेक बंदों के समूह में शामिल करेगा।

इसका मतलब यह है कि ईमान और अच्छे कर्मों का संगम ही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा, बल्कि उन्हें उन महान हस्तियों के साथ उठाएगा जो अल्लाह के नेक बंदे हैं — चाहे वे नबी हों, सिद्दीक़ हों, शहीद हों या सालिहीन (नेक लोग)। यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इज़्ज़त है कि वे उन पाक लोगों के साथ होंगे।

कुछ मुफ़स्सिरीन ने इसका अर्थ यह भी लिया है कि अल्लाह उन्हें नेक लोगों के दर्जे पर दाखिल करेगा, यानी उन्हें जन्नत में वही ऊँचा मुक़ाम देगा जो नेक लोगों को मिलता है। दोनों अर्थों में एक ही बात है — ईमानवालों के लिए जन्नत और अल्लाह की रज़ा (खुशी) का वादा है।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक उम्मीद और हौसले की बात है जो अपनी कमज़ोरियों और गुनाहों के बावजूद अल्लाह की ओर रुजू करता है। अल्लाह ने यह नहीं कहा कि हम सिर्फ़ मासूम (बेदाग) लोगों को ही जन्नत देंगे, बल्कि उसने ईमान और नेक कर्मों को शर्त बनाया है। इसका मतलब है कि जब तक इंसान ज़िंदा है, उसके पास मौका है कि वह अपने ईमान को मज़बूत करे और अपने अच्छे कर्मों से अल्लाह की रहमत का हक़दार बने।

यह वादा हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — वह अपने बंदों को उनकी छोटी-सी नेकी पर भी बड़ा इनाम देता है और उन्हें अपने प्यारे बंदों के साथ जोड़ देता है। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने ईमान को जीवित रखना चाहिए और भले कामों में लगे रहना चाहिए, ताकि हम भी उस मुबारक समूह में शामिल हो सकें, जिसका वादा अल्लाह ने अपनी इस आयत में किया है।

याद रखिए, ईमान और अमल-ए-सालिह (नेक कर्म) ही वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के करीब लाता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को इसी दिशा में ढालें और अल्लाह से इस वादे की पूर्ति की दुआ करें।



📜 आयत 7-11 — अल-अंकबूत

7وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम यक़ीनन उनके गुनाहों की तरफ से कफ्फारा क़रार देगें और ये (दुनिया में) जो आमाल करते थे हम उनके आमाल की उन्हें अच्छी से अच्छी जज़ा अता करेंगे
8وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ حُسْنًا ۖ وَإِن جَاهَدَاكَ لِتُشْرِكَ بِي مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ فَلَا تُطِعْهُمَا ۚ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और हमने इन्सान को अपने माँ बाप से अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया है और (ये भी कि) अगर तुझे तेरे माँ बाप इस बात पर मजबूर करें कि ऐसी चीज़ को मेरा शरीक बना जिन (के शरीक होने) का मुझे इल्म तक नहीं तो उनका कहना न मानना तुम सबको (आख़िर एक दिन) मेरी तरफ लौट कर आना है मै जो कुछ तुम लोग (दुनिया में) करते थे बता दूँगा
9وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِي الصَّالِحِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम उन्हें (क़यामत के दिन) ज़रुर नेको कारों में दाख़िल करेंगे
10وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ فَإِذَا أُوذِيَ فِي اللَّهِ جَعَلَ فِتْنَةَ النَّاسِ كَعَذَابِ اللَّهِ وَلَئِن جَاءَ نَصْرٌ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمْ ۚ أَوَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِمَا فِي صُدُورِ الْعَالَمِينَ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कह देते हैं कि हम ख़ुदा पर ईमान लाए फिर जब उनको ख़ुदा के बारे में कुछ तकलीफ़ पहुँची तो वह लोगों की तकलीफ़ देही को अज़ाब के बराबर ठहराते हैं और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की मदद आ पहुँची और तुम्हें फतेह हुई तो यही लोग कहने लगते हैं कि हम भी तो तुम्हारे साथ ही साथ थे भला जो कुछ सारे जहाँन के दिलों में है क्या ख़ुदा बख़ूबी वाक़िफ नहीं (ज़रुर है)
11وَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْمُنَافِقِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है
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अनुवाद — अल-अंकबूत 9

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Tuesday, August 18, 2026

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