आल-इमरान · 116/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۚ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ۝١١٦
Innal lazeena kafaroo lan tughniya `anhum amwaalum wa laaa awlaaduhum minal laahi shai anw wa ulaaa`ika Ashaabun Naar; hum feehaa khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ – उनके काम न आएगी, उन्हें बचा नहीं सकेगी।
  • مِنَ اللهِ شَيْئًا – अल्लाह के (अज़ाब) से कुछ भी (नहीं बचा सकेंगे)।
  • أَصْحَابُ النَّارِ – आग (जहन्नम) वाले, यानी उसके साथी और हमेशा रहने वाले।
  • خَالِدُونَ – हमेशा के लिए रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की हालत बयान कर रहा है जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुटलाया और उसके रसूलों पर ईमान नहीं लाए। अल्लाह फ़रमाता है कि ये काफ़िर लोग चाहे कितनी ही दौलत और औलाद रखते हों, उनकी ये चीज़ें उन्हें अल्लाह के अज़ाब से कुछ भी नहीं बचा सकतीं। न उनके माल उनके काम आएंगे, न उनकी औलाद उन्हें अल्लाह की पकड़ से छुड़ा सकेगी। बल्कि ये चीज़ें उनके लिए अज़ाब का सबब बनेंगी और क़यामत के दिन उनके लिए पछतावे और हसरत का ज़रिया होंगी। ये लोग जहन्नम के साथी हैं और उसमें हमेशा रहने वाले हैं, वहाँ से उनका निकलना कभी मुमकिन नहीं होगा। यानी दुनिया में जिस चीज़ पर उन्हें नाज़ था और जिसे वो अपनी ताक़त समझते थे, वो आख़िरत में उनके किसी काम न आएगी।

फ़ायदे (सीख):

  1. दौलत और औलाद अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाली नहीं हैं, इसलिए इन पर भरोसा करना और इन्हें ही सब कुछ समझ लेना बड़ी नादानी है।
  2. सच्ची कामयाबी सिर्फ़ ईमान और नेक अमल में है, न कि माल और औलाद की कसरत में।
  3. ये आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की आज्ञा को सबसे ऊपर रखना चाहिए, क्योंकि आख़िरत में सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसका क़ुबूल करना ही काम आएगा।
  4. काफ़िरों की हालत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि जो लोग हक़ को नकारते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है, इसलिए हमें हक़ पर साबित क़दम रहना चाहिए और अल्लाह की रहमत के तलबगार बने रहना चाहिए।
  5. ये आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि दुनिया की चीज़ों की वजह से किसी को डरना नहीं चाहिए, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह का डर और उसकी रज़ा ही असली पूँजी है।


📜 आयत 114-118 — आल-इमरान

114يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَأُولَٰئِكَ مِنَ الصَّالِحِينَ
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं
115وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَن يُكْفَرُوهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالْمُتَّقِينَ
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ़ है
116إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۚ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे
117مَثَلُ مَا يُنفِقُونَ فِي هَٰذِهِ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَثَلِ رِيحٍ فِيهَا صِرٌّ أَصَابَتْ حَرْثَ قَوْمٍ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ فَأَهْلَكَتْهُ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ اللَّهُ وَلَٰكِنْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी में ये लोग जो कुछ (ख़िलाफ़ शरा) ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल अन्धड़ की मिसाल है जिसमें बहुत पाला हो और वह उन लोगों के खेत पर जा पड़े जिन्होंने (कुफ़्र की वजह से) अपनी जानों पर सितम ढाया हो और फिर पाला उसे मार के (नास कर दे) और ख़ुदा ने उनपर जुल्म कुछ नहीं किया बल्कि उन्होंने आप अपने ऊपर जुल्म किया
118يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا بِطَانَةً مِّن دُونِكُمْ لَا يَأْلُونَكُمْ خَبَالًا وَدُّوا مَا عَنِتُّمْ قَدْ بَدَتِ الْبَغْضَاءُ مِنْ أَفْوَاهِهِمْ وَمَا تُخْفِي صُدُورُهُمْ أَكْبَرُ ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْآيَاتِ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गैरो को) अपना राज़दार न बनाओ (क्योंकि) ये गैर लोग तुम्हारी बरबादी में कुछ उठा नहीं रखेंगे (बल्कि जितना ज्यादा तकलीफ़) में पड़ोगे उतना ही ये लोग ख़ुश होंगे दुश्मनी तो उनके मुंह से टपकती है और जो (बुग़ज़ व हसद) उनके दिलों में भरा है वह कहीं उससे बढ़कर है हमने तुमसे (अपने) एहकाम साफ़ साफ़ बयान कर दिये अगर तुम समझ रखते हो
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अनुवाद — आल-इमरान 116

सूरा आल-इमरान आयत 116 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब)…

सूरा आयत 116/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 114–118. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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