अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صِرٌّ: अत्यधिक ठंडी हवा जो विनाशकारी हो।
- حَرْثَ: खेती, फसल।
- ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ: अपने ऊपर अत्याचार किया (अर्थात अपने कर्मों से स्वयं को नुकसान पहुँचाया)।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में काफ़िरों के उन खर्चों और अच्छे कार्यों की मिसाल दे रहा है जो वे इस सांसारिक जीवन में करते हैं, और जिनसे वे सवाब और अच्छे बदले की उम्मीद रखते हैं। उनके इन कार्यों की स्थिति ऐसी है जैसे एक खेत में किसान ने अच्छी फसल उगाई हो और उसे इससे बहुत लाभ की आशा हो, लेकिन अचानक एक अत्यंत ठंडी और विनाशकारी हवा चली जो उस फसल पर पड़ी और उसे पूरी तरह से नष्ट कर गई, यहाँ तक कि उसमें से कुछ भी बचा न रहा।
इसी प्रकार, काफ़िरों के अच्छे कार्य और खर्च, जिन्हें वे अल्लाह की राह में नहीं बल्कि अपनी इच्छाओं और दुनियावी मक़सदों के लिए करते हैं, उनके कुफ़्र और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दुश्मनी के कारण बेकार हो जाते हैं। जिस तरह वह ठंडी हवा फसल को नष्ट कर देती है, उसी तरह कुफ़्र उनके अच्छे कर्मों के सवाब को मिटा देता है, और आख़िरत में उन्हें इसका कोई फल नहीं मिलेगा।
यहाँ यह स्पष्ट कर दिया गया कि अल्लाह ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उन्होंने स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया, क्योंकि उन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया। अल्लाह तो न्यायपूर्ण है और किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, लेकिन उनके अपने कर्म ही उनके विनाश का कारण बने।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कर्म तभी स्वीकार होते हैं जब वे ईमान के साथ हों। बिना ईमान के किए गए अच्छे कार्य आख़िरत में किसी काम के नहीं आते।
- अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; इंसान का विनाश उसके अपने कर्मों का परिणाम होता है। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायप्रियता को दर्शाता है।
- दुनियावी आशाएँ और योजनाएँ क्षणभंगुर हैं। इंसान को चाहिए कि वह अपने कर्मों को अल्लाह की रज़ा के लिए करे, न कि केवल दुनिया के लिए।
- यह आयत मुसलमानों को शुक्रगुज़ार बनाती है कि अल्लाह ने उन्हें ईमान का मार्ग दिखाया और उनके अच्छे कर्मों को स्वीकार करने का वादा किया।
- काफ़िरों की स्थिति पर विचार करके मुसलमान को अपने ईमान की क़द्र करनी चाहिए और उसे मज़बूत बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि ईमान ही वह चीज़ है जो अच्छे कर्मों को अमर बनाती है।
📜 आयत 115-119 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 117
सूरा आल-इमरान आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी में ये लोग जो कुछ…सूरा आयत 117/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 115–119. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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