Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَغْفِرُ: क्षमा करता है।
- يُعَذِّبُ: दंड देता है।
- غَفُورٌ: अत्यंत क्षमाशील।
- رَّحِيمٌ: बड़ा दयालु।
तफ़सीर (व्याख्या):
आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, वह सब अकेले अल्लाह ही का है—उसी की रचना, उसी का प्रबंधन और उसी का राज्य है। वह अपनी बुद्धि और न्याय के अनुसार जिसे चाहता है क्षमा कर देता है, और जिसे चाहता है दंड देता है। उसकी क्षमा उसकी दया और अनुग्रह से होती है, जबकि दंड उसके न्याय और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार। यह कोई मनमानी नहीं, बल्कि उसके ज्ञान और न्याय पर आधारित है। वह उन लोगों को क्षमा करता है जो तौबा करते हैं और उसकी ओर लौटते हैं, और उन्हें दंड देता है जो अवज्ञा और कुफ्र पर डटे रहते हैं। अल्लाह अपने बंदों के लिए अत्यंत क्षमाशील और दयालु है—उसकी क्षमा और दया उसके क्रोध से कहीं अधिक व्यापक है। इस आयत में मुसलमानों को यह भी सिखाया गया है कि वे काफिरों के लिए जल्दबाज़ी में बुरी दुआ न करें, क्योंकि अल्लाह ने यह तय किया है कि उनमें से कुछ लोग भविष्य में इस्लाम क़बूल करेंगे, और अल्लाह का ज्ञान सब कुछ समेटे हुए है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की संप्रभुता: यह आयत हमें याद दिलाती है कि पूरा ब्रह्मांड अल्लाह के अधिकार में है, इसलिए हमें अपने मामलों में केवल उसी पर भरोसा करना चाहिए और उसी से डरना चाहिए।
- आशा और भय का संतुलन: अल्लाह की क्षमा और दंड दोनों का उल्लेख हमें सिखाता है कि हम न तो उसकी रहमत से निराश हों और न ही उसकी पकड़ से बेख़बर रहें। यही संतुलन एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
- तौबा का द्वार: अल्लाह का "ग़फूर" और "रहीम" होना हमें बताता है कि चाहे कितने ही गुनाह क्यों न हों, तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। यह हमें निराशा से बचाकर अल्लाह की ओर लौटने की प्रेरणा देता है।
- जल्दबाज़ी से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि हम दूसरों के बारे में अल्लाह के फैसले की जल्दबाज़ी न करें, क्योंकि अल्लाह हर इंसान के भविष्य को जानता है—हो सकता है कि आज का दुश्मन कल का वली (मित्र) बन जाए। इससे हमारे दिल में रहम और नर्मी पैदा होती है।
- अल्लाह की रहमत की व्यापकता: यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से पहले है, और वह अपने बंदों से मुहब्बत करने वाला है। यही वजह है कि इस्लाम में उम्मीद और मुहब्बत का पैग़ाम सबसे आगे है।
📜 आयत 127-131 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 129
सूरा आल-इमरान आयत 129 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन…सूरा आयत 129/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 127–131. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


