अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُتُّمْ: तुम मर गए (स्वाभाविक मृत्यु)।
- قُتِلْتُمْ: तुम मारे गए (युद्ध या किसी अन्य कारण से शहीद हुए)।
- تُحْشَرُونَ: तुम इकट्ठे किए जाओगे (हश्र के दिन उठाए जाओगे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को सांत्वना और चेतावनी देते हुए फ़रमाता है कि चाहे तुम अपने बिस्तरों पर प्राकृतिक मौत मरो, या युद्ध के मैदान में शहीद होकर मारे जाओ, अंततः तुम सबको एक ही स्थान पर एकत्र होना है। मौत का तरीक़ा चाहे जो भी हो, अंजाम सबका एक ही है—अल्लाह की ओर लौटना। वहाँ तुम्हें तुम्हारे सभी कर्मों का हिसाब दिया जाएगा, और तुम्हारे अच्छे या बुरे कामों के अनुसार तुम्हें बदला मिलेगा। यह बात इसलिए कही गई ताकि मुसलमानों को युद्ध से पीछे हटने या मौत से डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि मौत किसी भी हालत में आनी है, और अल्लाह के पास ही सबको जाना है। जो लोग अल्लाह की राह में लड़ते हुए मरते हैं, वे शहीद हैं और उनका अज्र अल्लाह के पास महान है, और जो अपनी मौत मरते हैं, वे भी अल्लाह की रहमत के मोहताज हैं। दोनों ही सूरतों में अल्लाह की ओर ही पलटना है, इसलिए मौत के डर से ईमान और जिहाद जैसे अफ़ज़ल कामों को नहीं छोड़ना चाहिए।
फ़ायदे (सबक़):
- मौत की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि मौत से भागना बेकार है, क्योंकि चाहे हम किसी भी हाल में मरें, हमें अल्लाह के सामने हाज़िर होना ही है। यह यक़ीन इंसान को बहादुर बनाता है और उसे अल्लाह की राह में कुर्बानी के लिए तैयार करता है।
- हश्र का विश्वास: इस आयत से हमें आख़िरत के दिन पर ईमान मज़बूत होता है, कि हमारे सारे कर्म दर्ज हैं और हमें उनका हिसाब देना है। यह विश्वास इंसान को नेक कामों की तरफ़ राग़िब करता है और गुनाहों से बचाता है।
- शहादत की फ़ज़ीलत: जब मुसलमान जानता है कि मरना या मारा जाना दोनों ही अल्लाह की ओर ले जाते हैं, तो वह अल्लाह की राह में जिहाद से पीछे नहीं हटता। शहीद की मौत को मौत नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत का ज़रिया समझा जाता है, जो इस्लाम की तालीमात में बड़ी तरग़ीब है।
- अल्लाह पर भरोसा: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे, क्योंकि उसी की तरफ़ लौटना है। यह भरोसा इंसान के दिल को सुकून देता है और उसे दुनिया के दुख-दर्द से बेपरवाह बनाता है।
- अमल की अहमियत: चूँकि हमें अल्लाह के सामने हाज़िर होकर अपने कर्मों का हिसाब देना है, इसलिए हर पल नेक अमल करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि उस दिन हमारा पलड़ा भारी हो और हम कामयाबी पाएँ।
📜 आयत 156-160 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 158
सूरा आल-इमरान आयत 158 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम (अपनी मौत से) मरो या मारे जाओ…सूरा आयत 158/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 156–160. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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