आल-इमरान · 3/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
نَزَّلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَأَنزَلَ التَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ ۝٣
Nazzala `alaikal Kitaaba bilhaqqi musaddiqal limaa baina yadaihi wa anzalat Tawraata wal Injeel
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाज़िल की जो (आसमानी किताबें पहले से) उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाज़िल की
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَزَّلَ: उतारा (क्रमिक रूप से, विस्तार के साथ)
  • الْكِتَابَ: यहाँ अर्थ क़ुरआन से है
  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, पूर्ण सत्यता और न्याय के साथ
  • مُصَدِّقًا: पुष्टि करने वाला, सत्यापित करने वाला
  • لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ: जो इससे पहले आईं (पिछली किताबें)
  • أَنزَلَ: उतारा (एक साथ, समग्र रूप से)
  • التَّوْرَاةَ: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई किताब
  • الْإِنجِيلَ: हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई किताब

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर क़ुरआन उतारा, जो पूर्ण सत्य है—उसकी ख़बरें सच्ची हैं, उसके आदेश न्याय पर आधारित हैं, और उसमें कोई संदेह या विरोधाभास नहीं। यह क़ुरआन उन सभी दिव्य किताबों की पुष्टि करता है जो इससे पहले उतारी गईं, जैसे तौरात, ज़बूर और इंजील। इसका अर्थ यह है कि क़ुरआन उन किताबों के मूल सत्य की गवाही देता है और उनके उन मौलिक सिद्धांतों की पुष्टि करता है जो अल्लाह की ओर से थे—तौहीद, रिसालत, आख़िरत का दिन, और नेकी का आदेश। क़ुरआन और पिछली किताबों के बीच कोई वास्तविक विरोध नहीं, क्योंकि सभी का स्रोत एक ही अल्लाह है।

अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर तौरात उतारी, जिसमें रोशनी और मार्गदर्शन था, और हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पर इंजील उतारी। ये दोनों किताबें क़ुरआन से पहले उतारी गईं, ताकि लोगों को उनके दीन और दुनिया की भलाई का रास्ता दिखाया जा सके। गौरतलब है कि अल्लाह ने क़ुरआन के लिए "नज़्ज़ल" (क्रमिक रूप से उतारना) शब्द इस्तेमाल किया, क्योंकि क़ुरआन 23 वर्षों की अवधि में थोड़ा-थोड़ा करके उतारा गया, जबकि तौरात और इंजील के लिए "अन्ज़ल" शब्द आया, क्योंकि वे एक ही बार में समग्र रूप से उतारी गईं। यह क़ुरआन की महानता और उसके निरंतर मार्गदर्शन की ओर संकेत है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने मानवता के मार्गदर्शन के लिए हर युग में अपने रसूल और किताबें भेजीं, और अंतिम किताब क़ुरआन है जो सभी पिछली किताबों की सच्चाई की पुष्टि करती है। यह हमारे लिए अल्लाह की असीम दया और कृपा का प्रमाण है कि उसने हमें यह मार्गदर्शन दिया। हमें इस नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और क़ुरआन को पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने का प्रयास करना चाहिए। क़ुरआन ही वह रस्सी है जो हमें अल्लाह से जोड़ती है, और जो इसे थामे रहेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। अल्लाह हमें क़ुरआन को अपना साथी बनाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — आल-इमरान

1الم
अलिफ़ लाम मीम
2اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ
अल्लाह ही वह (ख़ुदा) है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं है वही ज़िन्दा (और) सारे जहान का सॅभालने वाला है
3نَزَّلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَأَنزَلَ التَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ
(ऐ रसूल) उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाज़िल की जो (आसमानी किताबें पहले से) उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाज़िल की
4مِن قَبْلُ هُدًى لِّلنَّاسِ وَأَنزَلَ الْفُرْقَانَ ۗ إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ
और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाली किताब (कुरान) नाज़िल की बेशक जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को न माना उनके लिए सख्त अज़ाब है और ख़ुदा हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है
5إِنَّ اللَّهَ لَا يَخْفَىٰ عَلَيْهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ
बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में
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अनुवाद — आल-इमरान 3

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Tuesday, August 18, 2026

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