आल-इमरान · 57/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ ۝٥٧
Wa ammal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati fa yuwaffeehim ujoorahum; wallaahu laa yuhibbuz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ: उन्हें उनका पूरा-पूरा प्रतिफल (बदला) देगा, बिना किसी कमी के।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जिनमें सबसे बड़ा अत्याचार शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार ठहराना) और कुफ्र (अस्वीकार) है।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाया और अच्छे कर्म किए—जैसे नमाज़, ज़कात, रोज़ा, रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार, और अन्य नेक कार्य। अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा प्रतिफल देगा, जिसमें कोई कमी नहीं होगी। यह विशेष रूप से ईसा (अलैहिस्सलाम) के अनुयायियों के संदर्भ में है, जिन्होंने उनकी शिक्षाओं पर चलते हुए ईमान लाया और नेक कर्म किए, और उन्हें उनका पूरा बदला मिलेगा। इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि वह अत्याचारियों को पसंद नहीं करता—और सबसे बड़ा अत्याचार अल्लाह के साथ शिर्क करना और उसके रसूलों को झुठलाना है। ऐसे लोग अल्लाह की पसंद से वंचित हैं और उनके लिए कठोर यातना है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत और न्याय का पता चलता है कि वह किसी का अच्छा काम बेकार नहीं करता, बल्कि पूरा-पूरा बदला देता है।
  2. ईमान और नेक कर्मों का आपस में गहरा संबंध है—सिर्फ ईमान काफी नहीं, बल्कि अच्छे कर्म भी ज़रूरी हैं।
  3. शिर्क और कुफ्र को सबसे बड़ा अत्याचार बताया गया है, जो इंसान को अल्लाह की मुहब्बत से दूर कर देता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को उम्मीद देती है कि उनके छोटे-बड़े सभी नेक काम अल्लाह के यहाँ सुरक्षित हैं और उन्हें पूरा इनाम मिलेगा।
  5. अल्लाह की मुहब्बत पाने का रास्ता ईमान और नेक कर्म हैं, और उसकी नाराज़गी से बचने का रास्ता ज़ुल्म (विशेषकर शिर्क) से दूर रहना है।


📜 आयत 55-59 — आल-इमरान

55إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَىٰ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذِينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है
56فَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा
57وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता
58ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं
59إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया
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अनुवाद — आल-इमरान 57

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सूरा आयत 57/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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