आल-इमरान · 90/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ ۝٩٠
Innal lazeena kafaroo ba`da eemaanihim summaz daadoo kufral lan tuqbala tawbatuhum wa ulaaa`ika humud daaalloon
📖 हिंदी अर्थ
जो अपने ईमान के बाद काफ़िर हो बैठे फ़िर (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ़्र बढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कुबूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ازْدَادُوا كُفْرًا: कुफ्र में और बढ़ गए, यानी लगातार कुफ्र पर कायम रहे और उसमें अधिकता की।
  • لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ: उनकी तौबा (क्षमा-याचना) कबूल नहीं की जाएगी।
  • الضَّالُّونَ: गुमराह लोग, जो सीधे रास्ते से भटक गए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो पहले ईमान लाए, फिर कुफ्र (अविश्वास) की ओर मुड़ गए, और फिर उन्होंने अपने कुफ्र को और बढ़ाया—यानी वे लगातार अविश्वास और विद्रोह पर कायम रहे। ऐसे लोगों की तौबा उस वक्त कबूल नहीं होती जब वे मौत के सामने आ जाएं और आखिरी सांसों में तौबा करें, क्योंकि उस वक्त तौबा का समय बीत चुका होता है। यह वही हालत है जब इंसान को अपनी गलती का एहसास होता है, लेकिन वह समय तौबा के लिए नहीं रहता। ये लोग ही सच्चे गुमराह हैं, जिन्होंने सीधे रास्ते को छोड़ दिया और अपने लिए विनाश का रास्ता चुना।

यह आयत उन लोगों के बारे में भी है जिन्होंने हक (सत्य) को जानने के बाद उसे ठुकरा दिया, जैसे कि किताब वाले जिन्होंने पहले अपने नबी पर ईमान रखा, फिर दूसरे नबी (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आने पर उन्हें नकार दिया और कुफ्र में बढ़ते चले गए। ऐसे लोगों के लिए मौत के वक्त तौबा का दरवाजा बंद है, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर हक को ठुकराया।

दावत और नसीहत (उपदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि तौबा का दरवाजा हमेशा खुला रहता है, लेकिन उसे मौत के आने से पहले ही कर लेना चाहिए। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमाशील है, वह अपने बंदों की तौबा को पसंद करता है, लेकिन जब इंसान मौत के फरिश्ते को देख ले, तब की गई तौबा कबूल नहीं होती। इसलिए आज ही, इसी पल अपने रब की ओर लौट जाओ, अपने गुनाहों से तौबा करो, और अपने ईमान को मजबूत करो। अल्लाह के रास्ते से भटकने वाले कभी सुकून नहीं पाते, जबकि ईमान और नेक अमल वालों के लिए जन्नत की खुशखबरी है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 88-92 — आल-इमरान

88خَالِدِينَ فِيهَا لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी
89إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
90إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ
जो अपने ईमान के बाद काफ़िर हो बैठे फ़िर (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ़्र बढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कुबूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं
91إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ الْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ افْتَدَىٰ بِهِ ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया और कुफ़्र की हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी (छुटकारा पाने) में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कुबूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
92لَن تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّىٰ تُنفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَيْءٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَلِيمٌ
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई
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अनुवाद — आल-इमरान 90

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Tuesday, August 18, 2026

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