अर-रूम · 26/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ ۝٢٦
Wa lahoo man fissamaawaati wal ardi kullul lahoo qaanitoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قَانِتُونَ (क़ानितून): आज्ञाकारी, विनम्र, अल्लाह के आदेश के सामने सिर झुकाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह की महानता और उसकी सर्वोच्च सत्ता को बयान करती है। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है—चाहे वह फ़रिश्ते हों, इंसान हों, जिन्नात हों, जानवर हों, पेड़-पौधे हों या निर्जीव वस्तुएँ—सब कुछ अल्लाह ही की मिल्कियत (स्वामित्व) में है। कोई भी चीज़ उसके दायरे से बाहर नहीं है।

हर मख़लूक़ (प्राणी) अपनी फ़ितरत (प्राकृतिक प्रवृत्ति) के अनुसार अल्लाह के आगे झुका हुआ है। फ़रिश्ते बिना किसी हिचकिचाहट के उसके आदेशों का पालन करते हैं, जानवर अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के तहत उसी के नियंत्रण में चलते हैं, और यहाँ तक कि पेड़-पौधे और पत्थर भी उसी के क़ानून के अधीन हैं। यहाँ तक कि जो लोग ज़बान से अल्लाह को नहीं मानते, वे भी उसके बनाए हुए नियमों से बच नहीं सकते—उनका जीना, मरना, साँस लेना, सब कुछ उसी की मर्ज़ी से चल रहा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब पूरी कायनात (ब्रह्मांड) अपने रब के आगे समर्पित है, तो हम इंसानों को भी अपने रब के आगे झुकना चाहिए। यह हमारे लिए बड़ी शर्म की बात है कि बेजुबान जानवर और बेजान चीज़ें भी अपने रब के हुक्म के सामने सर झुकाती हैं, लेकिन हम इंसान—जिन्हें अक्ल और समझ दी गई है—अपने रब की इबादत से मुँह मोड़ लें।

अल्लाह की रहमत देखिए कि उसने हमें अपनी इबादत का शरफ़ (सम्मान) दिया है। हमारा झुकना उसके लिए ज़रूरी नहीं है, बल्कि हमारे लिए ही बेहतर है। जब हम उसके आगे झुकते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है, और हमें उसकी मदद और हिफ़ाज़त हासिल होती है। यही सच्ची कामयाबी है—अल्लाह के आगे झुकना, उसकी रज़ा (प्रसन्नता) को अपना निशाना बनाना, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारना।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अर-रूम

24وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं
25وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
26وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं
27وَهُوَ الَّذِي يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِ ۚ وَلَهُ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
28ضَرَبَ لَكُم مَّثَلًا مِّنْ أَنفُسِكُمْ ۖ هَل لَّكُم مِّن مَّا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُم مِّن شُرَكَاءَ فِي مَا رَزَقْنَاكُمْ فَأَنتُمْ فِيهِ سَوَاءٌ تَخَافُونَهُمْ كَخِيفَتِكُمْ أَنفُسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल बयान की है हमने जो कुछ तुम्हे अता किया है क्या उसमें तुम्हारी लौन्डी गुलामों में से कोई (भी) तुम्हारा शरीक है कि (वह और) तुम उसमें बराबर हो जाओ (और क्या) तुम उनसे ऐसा ही ख़ौफ रखते हो जितना तुम्हें अपने लोगों का (हक़ हिस्सा न देने में) ख़ौफ होता है फिर बन्दों को खुदा का शरीक क्यों बनाते हो) अक्ल मन्दों के वास्ते हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं
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अनुवाद — अर-रूम 26

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सूरा आयत 26/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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