अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- قَانِتُونَ (क़ानितून): आज्ञाकारी, विनम्र, अल्लाह के आदेश के सामने सिर झुकाने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह की महानता और उसकी सर्वोच्च सत्ता को बयान करती है। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है—चाहे वह फ़रिश्ते हों, इंसान हों, जिन्नात हों, जानवर हों, पेड़-पौधे हों या निर्जीव वस्तुएँ—सब कुछ अल्लाह ही की मिल्कियत (स्वामित्व) में है। कोई भी चीज़ उसके दायरे से बाहर नहीं है।
हर मख़लूक़ (प्राणी) अपनी फ़ितरत (प्राकृतिक प्रवृत्ति) के अनुसार अल्लाह के आगे झुका हुआ है। फ़रिश्ते बिना किसी हिचकिचाहट के उसके आदेशों का पालन करते हैं, जानवर अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के तहत उसी के नियंत्रण में चलते हैं, और यहाँ तक कि पेड़-पौधे और पत्थर भी उसी के क़ानून के अधीन हैं। यहाँ तक कि जो लोग ज़बान से अल्लाह को नहीं मानते, वे भी उसके बनाए हुए नियमों से बच नहीं सकते—उनका जीना, मरना, साँस लेना, सब कुछ उसी की मर्ज़ी से चल रहा है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब पूरी कायनात (ब्रह्मांड) अपने रब के आगे समर्पित है, तो हम इंसानों को भी अपने रब के आगे झुकना चाहिए। यह हमारे लिए बड़ी शर्म की बात है कि बेजुबान जानवर और बेजान चीज़ें भी अपने रब के हुक्म के सामने सर झुकाती हैं, लेकिन हम इंसान—जिन्हें अक्ल और समझ दी गई है—अपने रब की इबादत से मुँह मोड़ लें।
अल्लाह की रहमत देखिए कि उसने हमें अपनी इबादत का शरफ़ (सम्मान) दिया है। हमारा झुकना उसके लिए ज़रूरी नहीं है, बल्कि हमारे लिए ही बेहतर है। जब हम उसके आगे झुकते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है, और हमें उसकी मदद और हिफ़ाज़त हासिल होती है। यही सच्ची कामयाबी है—अल्लाह के आगे झुकना, उसकी रज़ा (प्रसन्नता) को अपना निशाना बनाना, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारना।
📜 आयत 24-28 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 26
सूरा अर-रूम आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है…सूरा आयत 26/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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