अर-रूम · 37/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٣٧
Awalam yaraw annal laaha yabsutur rizqa limai yashaaa`u wa yaqdir; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि खुदा ही जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग करता है-कुछ शक नहीं कि इसमें ईमानरदार लोगों के वास्ते (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • यब्सुतु: फैलाना, विस्तृत करना
  • अर-रिज़्क़: रोज़ी, आजीविका
  • व यक़्दिरु: और तंग करता है, सीमित कर देता है
  • आयात: निशानियाँ, सबूत, दलीलें

तफ़सीर:

क्या इन लोगों ने यह नहीं देखा और नहीं जाना कि अल्लाह ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है रोज़ी में कुशादगी (विस्तार) देता है, और जिसे चाहता है तंगी में डाल देता है? यह सब कुछ उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) और इच्छा के अनुसार होता है। जब वह किसी को अधिक रोज़ी देता है, तो यह उसके लिए एक इम्तिहान होता है कि वह शुक्र अदा करता है या कुफ़्रान (नाशुक्री) करता है। और जब किसी की रोज़ी तंग कर देता है, तो यह भी एक आज़माइश है कि वह सब्र करता है या बेचैन और शिकायत करने वाला बन जाता है।

यानी रोज़ी का बढ़ना या घटना अपने आप में कोई इज़्ज़त या ज़िल्लत की निशानी नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक परीक्षा है। वह जिसे चाहता है धन-दौलत देकर आज़माता है, और जिसे चाहता है तंगी में डालकर परखता है। यह सब उसकी रहमत और हिकमत के अनुसार होता है।

बेशक इस विस्तार और तंगी में, इस बढ़त और कमी में उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं। क्योंकि ईमानवाले इन्हीं चीज़ों से अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति), उसकी हिकमत और उसकी रहमत को समझते हैं। वे जानते हैं कि रोज़ी देने वाला सिर्फ अल्लाह है, और वही उसे रोकने वाला भी है। इसलिए वे कभी किसी और से उम्मीद नहीं रखते और न ही किसी और से डरते हैं।

प्यारे भाइयो और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी रोज़ी के मामले में अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें। जब हमारे पास ज़्यादा हो, तो शुक्र करें और ज़रूरतमंदों की मदद करें। और जब कमी हो, तो सब्र करें और अल्लाह से दुआ करते रहें। याद रखिए, अल्लाह जिससे चाहता है रोज़ी बढ़ा देता है और जिससे चाहता है तंग कर देता है — यह सब उसकी हिकमत पर आधारित है। हमारा काम सिर्फ अल्लाह पर ईमान लाना और उसके फैसलों पर राज़ी रहना है। यही ईमान की निशानी है, और इसी में हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।



📜 आयत 35-39 — सूरा अर-रूम

35أَمْ أَنزَلْنَا عَلَيْهِمْ سُلْطَانًا فَهُوَ يَتَكَلَّمُ بِمَا كَانُوا بِهِ يُشْرِكُونَ
क्या हमने उन लोगों पर कोई दलील नाज़िल की है जो उस (के हक़ होने) को बयान करती है जिसे ये लोग ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं (हरग़िज नहीं)
36وَإِذَا أَذَقْنَا النَّاسَ رَحْمَةً فَرِحُوا بِهَا ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ إِذَا هُمْ يَقْنَطُونَ
और जब हमने लोगों को (अपनी रहमत की लज्ज़त) चखा दी तो वह उससे खुश हो गए और जब उन्हें अपने हाथों की अगली कारसतानियो की बदौलत कोई मुसीबत पहुँची तो यकबारगी मायूस होकर बैठे रहते हैं
37أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि खुदा ही जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग करता है-कुछ शक नहीं कि इसमें ईमानरदार लोगों के वास्ते (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
38فَآتِ ذَا الْقُرْبَىٰ حَقَّهُ وَالْمِسْكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
(तो ऐ रसूल अपनी) क़राबतदार (फातिमा ज़हरा) का हक़ फिदक दे दो और मोहताज व परदेसियों का (भी) जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के ख्वाहॉ हैं उन के हक़ में सब से बेहतर यही है और ऐसे ही लोग आखेरत में दिली मुरादे पाएँगें
39وَمَا آتَيْتُم مِّن رِّبًا لِّيَرْبُوَ فِي أَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُو عِندَ اللَّهِ ۖ وَمَا آتَيْتُم مِّن زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहॉ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अर-रूम 37

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Friday, October 2, 2026

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