अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- यब्सुतु: फैलाना, विस्तृत करना
- अर-रिज़्क़: रोज़ी, आजीविका
- व यक़्दिरु: और तंग करता है, सीमित कर देता है
- आयात: निशानियाँ, सबूत, दलीलें
तफ़सीर:
क्या इन लोगों ने यह नहीं देखा और नहीं जाना कि अल्लाह ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है रोज़ी में कुशादगी (विस्तार) देता है, और जिसे चाहता है तंगी में डाल देता है? यह सब कुछ उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) और इच्छा के अनुसार होता है। जब वह किसी को अधिक रोज़ी देता है, तो यह उसके लिए एक इम्तिहान होता है कि वह शुक्र अदा करता है या कुफ़्रान (नाशुक्री) करता है। और जब किसी की रोज़ी तंग कर देता है, तो यह भी एक आज़माइश है कि वह सब्र करता है या बेचैन और शिकायत करने वाला बन जाता है।
यानी रोज़ी का बढ़ना या घटना अपने आप में कोई इज़्ज़त या ज़िल्लत की निशानी नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक परीक्षा है। वह जिसे चाहता है धन-दौलत देकर आज़माता है, और जिसे चाहता है तंगी में डालकर परखता है। यह सब उसकी रहमत और हिकमत के अनुसार होता है।
बेशक इस विस्तार और तंगी में, इस बढ़त और कमी में उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं। क्योंकि ईमानवाले इन्हीं चीज़ों से अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति), उसकी हिकमत और उसकी रहमत को समझते हैं। वे जानते हैं कि रोज़ी देने वाला सिर्फ अल्लाह है, और वही उसे रोकने वाला भी है। इसलिए वे कभी किसी और से उम्मीद नहीं रखते और न ही किसी और से डरते हैं।
प्यारे भाइयो और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी रोज़ी के मामले में अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें। जब हमारे पास ज़्यादा हो, तो शुक्र करें और ज़रूरतमंदों की मदद करें। और जब कमी हो, तो सब्र करें और अल्लाह से दुआ करते रहें। याद रखिए, अल्लाह जिससे चाहता है रोज़ी बढ़ा देता है और जिससे चाहता है तंग कर देता है — यह सब उसकी हिकमत पर आधारित है। हमारा काम सिर्फ अल्लाह पर ईमान लाना और उसके फैसलों पर राज़ी रहना है। यही ईमान की निशानी है, और इसी में हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 35-39 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 37
सूरा अर-रूम आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि…सूरा आयत 37/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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