Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رِبًا (रिबा): सूद, ब्याज, या वह अतिरिक्त राशि जो किसी को इस उद्देश्य से दी जाए कि बदले में अधिक मिले।
- لِيَرْبُوَ (लि-यरबुवा): ताकि वह बढ़े और अधिक हो जाए।
- زَكَاةٍ (ज़कात): पवित्रता, वह धन जो अल्लाह की राह में खर्च किया जाए, जैसे ज़कात और सदक़ा।
- الْمُضْعِفُونَ (अल-मुज़'इफ़ून): वे लोग जिनके अच्छे कर्मों को कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुसलमानों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो धन तुम लोगों को इस नीयत से देते हो कि बदले में उससे ज़्यादा वापस मिले — यानी सूद या रिबा के रूप में — तो यह अल्लाह के यहाँ कभी बरकत वाला नहीं होता। चाहे दुनिया में वह धन बढ़ता हुआ दिखे, लेकिन अल्लाह के यहाँ उसका कोई सवाब नहीं, बल्कि वह मिट जाता है और उसमें बरकत नहीं डाली जाती। यह एक ऐसा काम है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
इसके विपरीत, जो लोग अपना धन ज़कात और सदक़े के रूप में खर्च करते हैं — सिर्फ अल्लाह की खुशी और उसका चेहरा (वज्ह) पाने के लिए, न कि किसी दुनियावी मक़सद या लोगों की तारीफ़ के लिए — तो ऐसे लोग ही असली कामयाब हैं। अल्लाह उनके इस खर्च को कई गुना बढ़ा देता है, और उनके अच्छे कर्मों को भारी कर देता है। यही वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह के यहाँ अज्र (इनाम) का दरवाज़ा खुला है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें बता रहे हैं कि असली नफा (लाभ) वह नहीं जो दुनिया में दिखता है, बल्कि असली नफा वह है जो अल्लाह के यहाँ मिलता है। सूद और रिबा का रास्ता भले ही दुनिया में फायदेमंद लगे, लेकिन यह आख़िरत में नुकसान का सबब है। जबकि ज़कात और सदक़ा — जो खुशी-खुशी और अल्लाह की रज़ा के लिए दिया जाए — वह इंसान के लिए बरकत, रिज़्क़ में अफ़ज़ाइश और आख़िरत में ऊँचे दर्जों का ज़रिया बनता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करें, न कि सूद और रिबा के जाल में फँसें। जब हम अल्लाह की रज़ा के लिए देंगे, तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में बरकत देगा। याद रखिए, अल्लाह का वादा सच्चा है — वह ज़कात देने वालों के माल को घटाता नहीं, बल्कि बढ़ाता है और उन्हें कई गुना अज्र अता करता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में इस तालीम को अपनाएँ और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 37-41 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 39
सूरा अर-रूम आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के…सूरा आयत 39/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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