अर-रूम · 39/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمَا آتَيْتُم مِّن رِّبًا لِّيَرْبُوَ فِي أَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُو عِندَ اللَّهِ ۖ وَمَا آتَيْتُم مِّن زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ ۝٣٩
Wa maaa aataitum mir ribal li yarbuwa feee amwaalin naasi falaa yarboo `indal laahi wa maaa aataitum min zaakaatin tureedoona wajhal laahi fa ulaaa`ika humul mud`ifoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहॉ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِبًا (रिबा): सूद, ब्याज, या वह अतिरिक्त राशि जो किसी को इस उद्देश्य से दी जाए कि बदले में अधिक मिले।
  • لِيَرْبُوَ (लि-यरबुवा): ताकि वह बढ़े और अधिक हो जाए।
  • زَكَاةٍ (ज़कात): पवित्रता, वह धन जो अल्लाह की राह में खर्च किया जाए, जैसे ज़कात और सदक़ा।
  • الْمُضْعِفُونَ (अल-मुज़'इफ़ून): वे लोग जिनके अच्छे कर्मों को कई गुना बढ़ा दिया जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो धन तुम लोगों को इस नीयत से देते हो कि बदले में उससे ज़्यादा वापस मिले — यानी सूद या रिबा के रूप में — तो यह अल्लाह के यहाँ कभी बरकत वाला नहीं होता। चाहे दुनिया में वह धन बढ़ता हुआ दिखे, लेकिन अल्लाह के यहाँ उसका कोई सवाब नहीं, बल्कि वह मिट जाता है और उसमें बरकत नहीं डाली जाती। यह एक ऐसा काम है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।

इसके विपरीत, जो लोग अपना धन ज़कात और सदक़े के रूप में खर्च करते हैं — सिर्फ अल्लाह की खुशी और उसका चेहरा (वज्ह) पाने के लिए, न कि किसी दुनियावी मक़सद या लोगों की तारीफ़ के लिए — तो ऐसे लोग ही असली कामयाब हैं। अल्लाह उनके इस खर्च को कई गुना बढ़ा देता है, और उनके अच्छे कर्मों को भारी कर देता है। यही वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह के यहाँ अज्र (इनाम) का दरवाज़ा खुला है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बता रहे हैं कि असली नफा (लाभ) वह नहीं जो दुनिया में दिखता है, बल्कि असली नफा वह है जो अल्लाह के यहाँ मिलता है। सूद और रिबा का रास्ता भले ही दुनिया में फायदेमंद लगे, लेकिन यह आख़िरत में नुकसान का सबब है। जबकि ज़कात और सदक़ा — जो खुशी-खुशी और अल्लाह की रज़ा के लिए दिया जाए — वह इंसान के लिए बरकत, रिज़्क़ में अफ़ज़ाइश और आख़िरत में ऊँचे दर्जों का ज़रिया बनता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करें, न कि सूद और रिबा के जाल में फँसें। जब हम अल्लाह की रज़ा के लिए देंगे, तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में बरकत देगा। याद रखिए, अल्लाह का वादा सच्चा है — वह ज़कात देने वालों के माल को घटाता नहीं, बल्कि बढ़ाता है और उन्हें कई गुना अज्र अता करता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में इस तालीम को अपनाएँ और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 37-41 — अर-रूम

37أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि खुदा ही जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग करता है-कुछ शक नहीं कि इसमें ईमानरदार लोगों के वास्ते (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
38فَآتِ ذَا الْقُرْبَىٰ حَقَّهُ وَالْمِسْكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
(तो ऐ रसूल अपनी) क़राबतदार (फातिमा ज़हरा) का हक़ फिदक दे दो और मोहताज व परदेसियों का (भी) जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के ख्वाहॉ हैं उन के हक़ में सब से बेहतर यही है और ऐसे ही लोग आखेरत में दिली मुरादे पाएँगें
39وَمَا آتَيْتُم مِّن رِّبًا لِّيَرْبُوَ فِي أَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُو عِندَ اللَّهِ ۖ وَمَا آتَيْتُم مِّن زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहॉ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं
40اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۖ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَفْعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيْءٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) ज़िन्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं
41ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ لِيُذِيقَهُم بَعْضَ الَّذِي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फसाद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ
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अनुवाद — अर-रूम 39

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Tuesday, August 18, 2026

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