अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُقْسِمُ: क़सम खाते हैं, शपथ लेते हैं।
- الْمُجْرِمُونَ: अपराधी, अर्थात मुशरिक (बहुदेववादी) और काफ़िर लोग।
- مَا لَبِثُوا: वे (दुनिया या क़ब्र में) नहीं रहे।
- غَيْرَ سَاعَةٍ: एक घंटे के अलावा, अर्थात बहुत थोड़े समय के सिवा।
- يُؤْفَكُونَ: उन्हें (सत्य से) फेर दिया जाता था, या वे झूठ की ओर मोड़ दिए जाते थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जिस दिन क़ियामत (प्रलय) का दिन आएगा और अल्लाह तआला सभी लोगों को क़ब्रों से उठाएगा, उस दिन अपराधी और मुशरिक लोग क़समें खाकर कहेंगे कि हम (दुनिया या क़ब्र में) एक घंटे से ज़्यादा नहीं रहे। वे दुनिया की ज़िंदगी को बहुत छोटा और मामूली समझेंगे, क्योंकि जब वे आख़िरत के भयानक दृश्य देखेंगे और उसके सामने दुनिया की अवधि को महसूस करेंगे, तो उन्हें लगेगा कि उनका जीवन बहुत थोड़ा था। लेकिन उनकी यह क़सम झूठी होगी, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने दुनिया में काफ़ी लंबा समय बिताया था, परन्तु आख़िरत के सामने उसे बहुत कम महसूस करेंगे। यह उनका झूठ और धोखा होगा, जैसे वे दुनिया में भी झूठ बोलते थे और सत्य (हक़) से मुँह मोड़ते थे। उन्हें दुनिया में भी सत्य से फेर दिया जाता था, और वे अपनी ज़िद और अहंकार के कारण अल्लाह के रसूलों की बात नहीं मानते थे, इसलिए आज भी वे उसी झूठ और धोखे में हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी और अस्थायी है, और आख़िरत का दिन सच्चा और स्थायी है। हमें चाहिए कि हम इस छोटी सी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें, और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलें, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदगी और पछतावा न उठाना पड़े। याद रखिए, आज का हर पल कीमती है, और क़ियामत के दिन हमें अपने हर अमल का हिसाब देना है। अल्लाह तआला हमें सत्य पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो उस दिन झूठी क़समें खाकर शर्मिंदा होंगे। आमीन।
📜 आयत 53-57 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 55
सूरा अर-रूम आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन क़यामत बरपा होगी तो गुनाहगार लोग कसमें…सूरा आयत 55/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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