अर-रूम · 5/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
بِنَصْرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٥
Binasril laa; yansuru mai yashaaa`u wa Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِنَصْرِ اللهِ: अल्लाह की मदद और सहायता से।
  • يَنصُرُ مَن يَشَاءُ: वह जिसे चाहता है मदद देता है।
  • الْعَزِيزُ: वह सर्वशक्तिमान है, जिसे कोई हरा नहीं सकता।
  • الرَّحِيمُ: वह अपने बंदों पर बहुत दयालु और कृपालु है।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने रोमियों (बाइज़ेंटाइन साम्राज्य) की फारसियों पर विजय का उल्लेख किया है, जो उस समय हुई जब मुसलमानों को यह खबर मिली कि रोमी, जो अहल-ए-किताब (किताब वाले) थे, फारसियों से हार गए हैं। मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने इस पर खुशी मनाई और मुसलमानों का मज़ाक उड़ाया, क्योंकि फारसी मूर्तिपूजक थे और रोमी ईसाई थे। लेकिन अल्लाह ने क़ुरआन में पहले ही बता दिया था कि रोमी कुछ ही सालों में (तीन से दस साल के बीच) फिर से जीत हासिल कर लेंगे। और ऐसा ही हुआ—सात साल बाद रोमियों ने फारसियों को हरा दिया, और उस दिन मुसलमानों को बहुत खुशी हुई, क्योंकि यह अल्लाह के वादे की पूर्ति थी और इससे इस्लाम की सच्चाई साबित हुई।

यहाँ अल्लाह फ़रमाता है कि यह जीत अल्लाह ही की मदद से होती है। वह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत। उसका कोई मुक़ाबला नहीं कर सकता, वह सब पर ग़ालिब है। और वही अपने मोमिन बंदों पर रहम करने वाला है, उन्हें मुश्किलों से निकालकर कामयाबी देता है। यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी तसल्ली और उम्मीद का पैग़ाम है—चाहे हालात कितने भी खराब हों, अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, बशर्ते इंसान सब्र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जब हम देखते हैं कि दुनिया में कुछ लोग बुराई पर क़ाबिज़ हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की ताक़त सबसे बड़ी है। वह अकेला है जो हालात बदल सकता है। मुसलमानों को चाहिए कि वे हर हाल में अल्लाह की रहमत से निराश न हों, बल्कि उसकी मदद के लिए दुआ करें और अच्छे कामों पर डटे रहें। यही ईमान की निशानी है—कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी, चाहे देर हो। और जब वह मदद आती है, तो दिल को सुकून मिलता है और ईमान और मज़बूत होता है। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 3-7 — अर-रूम

3فِي أَدْنَى الْأَرْضِ وَهُم مِّن بَعْدِ غَلَبِهِمْ سَيَغْلِبُونَ
मगर ये लोग अनक़रीब ही अपने हार जाने के बाद चन्द सालों में फिर (अहले फ़ारस पर) ग़ालिब आ जाएँगे
4فِي بِضْعِ سِنِينَ ۗ لِلَّهِ الْأَمْرُ مِن قَبْلُ وَمِن بَعْدُ ۚ وَيَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ
क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर अम्र का एख्तेयार ख़ुदा ही को है और उस दिन ईमानदार लोग ख़ुदा की मदद से खुश हो जाएँगे
5بِنَصْرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है
6وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं
7يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِّنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ
ये लोग बस दुनियावी ज़िन्दगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और ये लोग आखेरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं
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अनुवाद — अर-रूम 5

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Tuesday, August 18, 2026

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