अस-सजदा · 13/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
وَلَوْ شِئْنَا لَآتَيْنَا كُلَّ نَفْسٍ هُدَاهَا وَلَٰكِنْ حَقَّ الْقَوْلُ مِنِّي لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ ۝١٣
Wa law shi`naa la-aatainaa kulla nafsin hudaahaa wa laakin haqqal qawlu minnee la amla`anna jahannama minal jinnati wannaasi ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
और अब तो हमको (क़यामत का)े पूरा पूरा यक़ीन है और (ख़ुदा फरमाएगा कि) अगर हम चाहते तो दुनिया ही में हर शख़्श को (मजबूर करके) राहे रास्त पर ले आते मगर मेरी तरफ से (रोजे अज़ा) ये बात क़रार पा चुकी है कि मै जहन्नुम को जिन्नात और आदमियों से भर दूँगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • हुदाहा: उसका मार्गदर्शन, यानी ईमान की तौफ़ीक़ और सीधे रास्ते की समझ।
  • ह़क़्क़ल क़ौल: मेरी ओर से यह बात सिद्ध और अटल हो चुकी है।
  • अजमईन: सब मिलकर, समस्त।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर हम चाहते तो हर इंसान को उसका मार्गदर्शन दे देते, यानी हर नफ़्स को ईमान और हिदायत की तौफ़ीक़ अता कर देते और उसे ईमान लाने पर मजबूर कर देते। लेकिन अल्लाह की हिक्मत और अदल यही था कि उसने इंसान को इख़्तियार (स्वतंत्र विकल्प) दिया, ताकि वह अपनी मर्ज़ी से ईमान और अच्छे कर्मों का रास्ता चुने। यही इम्तिहान का मक़सद है।

लेकिन अल्लाह का वह फ़ैसला पहले से तय हो चुका है जो उसने फ़रमाया: "मैं जहन्नम को जिन्नों और इंसानों से भर दूँगा।" यह बात अटल है और इसका कारण यह है कि बहुत से लोगों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से कुफ्र और गुमराही को चुना, हिदायत और ईमान को ठुकरा दिया। उन्होंने सत्य को देखते हुए भी उसे नहीं अपनाया और अपने लिए जहन्नम का रास्ता खुद चुना।

यहाँ एक बड़ी हिक्मत यह है कि अल्लाह ने किसी पर ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उन्होंने खुद अपने कर्मों से यह अंजाम कमाया। अल्लाह की रहमत और हिदायत का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला था, लेकिन जिन्होंने उसे ठुकराया, उनका अंजाम जहन्नम है। यह अल्लाह का अदल और हिक्मत है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में ईमान और नेक अमल को अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ने हमें अक़्ल और इख़्तियार दिया है। हमें उस रास्ते पर चलना चाहिए जो अल्लाह को पसंद है, ताकि हम उस अटल फ़ैसले से बच सकें जो गुमराहों के लिए है। अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है और वह चाहता है कि हम उसकी ओर रुजू करें, लेकिन हमें खुद आगे बढ़कर उसकी हिदायत को क़बूल करना होगा।



📜 आयत 11-15 — सूरा अस-सजदा

11۞ قُلْ يَتَوَفَّاكُم مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मल्कुलमौत जो तुम्हारे ऊपर तैनात है वही तुम्हारी रुहें क़ब्ज़ करेगा उसके बाद तुम सबके सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
12وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الْمُجْرِمُونَ نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ عِندَ رَبِّهِمْ رَبَّنَا أَبْصَرْنَا وَسَمِعْنَا فَارْجِعْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا إِنَّا مُوقِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम को बहुत अफसोस होगा अगर तुम मुजरिमों को देखोगे कि वह (हिसाब के वक्त) अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने सर झुकाए खड़े हैं और(अर्ज़ कर रहे हैं) परवरदिगार हमने (अच्छी तरह देखा और सुन लिया तू हमें दुनिया में एक दफा फिर लौटा दे कि हम नेक काम करें
13وَلَوْ شِئْنَا لَآتَيْنَا كُلَّ نَفْسٍ هُدَاهَا وَلَٰكِنْ حَقَّ الْقَوْلُ مِنِّي لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
और अब तो हमको (क़यामत का)े पूरा पूरा यक़ीन है और (ख़ुदा फरमाएगा कि) अगर हम चाहते तो दुनिया ही में हर शख़्श को (मजबूर करके) राहे रास्त पर ले आते मगर मेरी तरफ से (रोजे अज़ा) ये बात क़रार पा चुकी है कि मै जहन्नुम को जिन्नात और आदमियों से भर दूँगा
14فَذُوقُوا بِمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا إِنَّا نَسِينَاكُمْ ۖ وَذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
तो चूँकि तुम आज के दिन हुज़ूरी को भूले बैठे थे तो अब उसका मज़ा चखो हमने तुमको क़सदन भुला दिया और जैसी जैसी तुम्हारी करतूतें थीं (उनके बदले) अब हमेशा के अज़ाब के मज़े चखो
15إِنَّمَا يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا الَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا بِهَا خَرُّوا سُجَّدًا وَسَبَّحُوا بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ ۩
हमारी आयतों पर ईमान बस वही लोग लाते हैं कि जिस वक्त उन्हें वह (आयते) याद दिलायी गयीं तो फौरन सजदे में गिर पड़ने और अपने परवरदिगार की हम्दो सना की तस्बीह पढ़ने लगे और ये लोग तकब्बुर नही करते (15) (सजदा)
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अस-सजदा 13

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Thursday, October 1, 2026

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