अस-सजदा · 12/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الْمُجْرِمُونَ نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ عِندَ رَبِّهِمْ رَبَّنَا أَبْصَرْنَا وَسَمِعْنَا فَارْجِعْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا إِنَّا مُوقِنُونَ ۝١٢
Wa law taraaa izil mujrimoona naakisoo ru`oosihim `inda rabbihim rabbanaaa absarnaa wa sami`naa farji`naa na`mal saalihan innaa mooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम को बहुत अफसोस होगा अगर तुम मुजरिमों को देखोगे कि वह (हिसाब के वक्त) अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने सर झुकाए खड़े हैं और(अर्ज़ कर रहे हैं) परवरदिगार हमने (अच्छी तरह देखा और सुन लिया तू हमें दुनिया में एक दफा फिर लौटा दे कि हम नेक काम करें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ — अपने सिर झुकाए हुए (शर्म और अपमान से)
  • أَبْصَرْنَا — हमने देख लिया (अब हमें सत्य दिखाई दे गया)
  • فَارْجِعْنَا — हमें वापस भेज दे (दुनिया में)
  • مُوقِنُونَ — हमें अब पूर्ण विश्वास हो गया है

विस्तृत तफसीर:

ऐ नबी! काश तुम उस भयानक दृश्य को देख पाते जब अपराधी (जिन्होंने आख़िरत को झुठलाया था) अपने रब के सामने खड़े होंगे, शर्म और अपमान के मारे अपने सिर झुकाए हुए। उनकी यह हालत देखकर तुम्हें अंदाज़ा होता कि उन पर कितनी बड़ी मुसीबत टूट पड़ी है। वे उस दिन कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमने अब सब कुछ देख लिया — हमने तेरे वादे की सच्चाई को अपनी आँखों से देख लिया, और हमने उन बातों को भी सुन लिया जो तेरे रसूल दुनिया में हमें सुना रहे थे। हमने उन्हें झुठलाया था, लेकिन आज सब कुछ साफ़ दिख रहा है।"

फिर वे गिड़गिड़ाते हुए कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमें एक बार फिर दुनिया में वापस भेज दे, ताकि हम अच्छे कर्म कर सकें। हम अब पूरे यक़ीन के साथ मानते हैं कि तू सच्चा है, तेरा वादा सच्चा है, और आख़िरत का दिन सच्चा है।" लेकिन यह पछतावा उस वक़्त बेकार होगा, क्योंकि मौका हाथ से निकल चुका होगा।

यह दृश्य इतना भयावह और दिल दहला देने वाला होगा कि अगर कोई इसे देखे तो उसकी रूह काँप जाए। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ा अफ़सोस का पल होगा जिन्होंने दुनिया में आराम और मौज-मस्ती को सब कुछ समझ लिया था, और आख़िरत की तैयारी को भूल गए थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि आज का दिन ही हमारे पास सबसे कीमती खज़ाना है। आज हम जो एक नेक काम कर लें, वह कल हमारे लिए रोशनी बनेगा। आज हम जो एक गुनाह से बच जाएँ, वह कल हमारे लिए नजात (मुक्ति) का ज़रिया बनेगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — उसने हमें मौका दिया है, हमारी साँसें चल रही हैं, हमारा दिल धड़क रहा है। यही वह वक़्त है जब हम अपने रब की तरफ लौट सकते हैं, तौबा कर सकते हैं, और अपनी ज़िंदगी को सही राह पर ला सकते हैं। कल जब हमारे सामने वह दृश्य आएगा, तो हमें पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ लौट आओ, उसकी रहमत का सहारा लो, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (खुशी) के मुताबिक ढाल लो। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 10-14 — अस-सजदा

10وَقَالُوا أَإِذَا ضَلَلْنَا فِي الْأَرْضِ أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۚ بَلْ هُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ كَافِرُونَ
और ये लोग कहते हैं कि जब हम ज़मीन में नापैद हो जाएँगे तो क्या हम फिर नया जन्म लेगे (क़यामत से नही) बल्कि ये लोग अपने परवरदिगार के (सामने हुज़ूरी ही) से इन्कार रखते हैं
11۞ قُلْ يَتَوَفَّاكُم مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मल्कुलमौत जो तुम्हारे ऊपर तैनात है वही तुम्हारी रुहें क़ब्ज़ करेगा उसके बाद तुम सबके सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
12وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الْمُجْرِمُونَ نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ عِندَ رَبِّهِمْ رَبَّنَا أَبْصَرْنَا وَسَمِعْنَا فَارْجِعْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا إِنَّا مُوقِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम को बहुत अफसोस होगा अगर तुम मुजरिमों को देखोगे कि वह (हिसाब के वक्त) अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने सर झुकाए खड़े हैं और(अर्ज़ कर रहे हैं) परवरदिगार हमने (अच्छी तरह देखा और सुन लिया तू हमें दुनिया में एक दफा फिर लौटा दे कि हम नेक काम करें
13وَلَوْ شِئْنَا لَآتَيْنَا كُلَّ نَفْسٍ هُدَاهَا وَلَٰكِنْ حَقَّ الْقَوْلُ مِنِّي لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
और अब तो हमको (क़यामत का)े पूरा पूरा यक़ीन है और (ख़ुदा फरमाएगा कि) अगर हम चाहते तो दुनिया ही में हर शख़्श को (मजबूर करके) राहे रास्त पर ले आते मगर मेरी तरफ से (रोजे अज़ा) ये बात क़रार पा चुकी है कि मै जहन्नुम को जिन्नात और आदमियों से भर दूँगा
14فَذُوقُوا بِمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا إِنَّا نَسِينَاكُمْ ۖ وَذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
तो चूँकि तुम आज के दिन हुज़ूरी को भूले बैठे थे तो अब उसका मज़ा चखो हमने तुमको क़सदन भुला दिया और जैसी जैसी तुम्हारी करतूतें थीं (उनके बदले) अब हमेशा के अज़ाब के मज़े चखो
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अनुवाद — अस-सजदा 12

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Tuesday, August 18, 2026

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