अल-अहज़ाब · 3/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا ۝٣
Wa tawakkal `alal laah; wa kafaa billaahi Wakeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और खुदा ही पर भरोसा रखो और खुदा ही कारसाजी के लिए काफी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَكَّلْ: भरोसा करना, अपने सभी मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर देना।
  • وَكِيلًا: कार्य-साधक, रक्षक, और जो बंदे के सारे काम संभाल ले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके माध्यम से पूरी उम्मत को एक अनमोल नसीहत दे रहा है—"और तुम अल्लाह पर भरोसा रखो।" यानी अपने सारे मामलों, छोटे-बड़े हर काम में, हर मुश्किल और हर फैसले में अल्लाह ही पर निर्भर रहो। तवक्कुल का मतलब यह नहीं कि हाथ-पाँव छोड़ दिए जाएँ, बल्कि इसका मतलब है कि पूरी कोशिश करो, फिर नतीजे को अल्लाह के सुपुर्द कर दो और दिल से यकीन रखो कि जो अल्लाह चाहेगा, वही होगा और जो होगा, उसमें हमारी भलाई ही होगी।

फिर अल्लाह फरमाता है: "और अल्लाह ही काफी है कार्य-साधक के रूप में।" यानी जब तुमने अल्लाह पर भरोसा कर लिया, तो समझ लो कि तुम्हारे लिए सबसे मज़बूत सहारा मिल गया। अल्लाह अपने उस बंदे के लिए काफी है जो उस पर भरोसा करता है और उसी की ओर रुजू करता है। वह उसकी हिफाज़त करता है, उसकी रोज़ी का इंतज़ाम करता है, और उसे हर मुश्किल से निकालने का रास्ता दिखाता है। जिसे अल्लाह मिल जाए, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर परेशानी में—चाहे वह रोज़ी की तंगी हो, बीमारी हो, दुश्मन का डर हो या भविष्य की चिंता—हमारा सहारा सिर्फ अल्लाह होना चाहिए। जब दिल अल्लाह पर भरोसा करता है, तो इंसान को एक अजीब सुकून और इत्मीनान मिलता है। कोई भी मुश्किल उसे घबरा नहीं सकती, क्योंकि उसे यकीन होता है कि अल्लाह उसके साथ है। यही तवक्कुल हमें बहादुर, सब्र करने वाला और हर हाल में शुक्रगुज़ार बनाता है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्चा तवक्कुल अता करे और हमें उन लोगों में शामिल करे जिनके लिए वह खुद काफी है। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अहज़ाब

1يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ اتَّقِ اللَّهَ وَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَالْمُنَافِقِينَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
ऐ नबी खुदा ही से डरते रहो और काफिरों और मुनाफिक़ों की बात न मानो इसमें शक नहीं कि खुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है।
2وَاتَّبِعْ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास जो ''वही'' की जाती है (बस) उसी की पैरवी करो तुम लोग जो कुछ कर रहे हो खुदा उससे यक़ीनी अच्छा तरह आगाह है।
3وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
और खुदा ही पर भरोसा रखो और खुदा ही कारसाजी के लिए काफी है
4مَّا جَعَلَ اللَّهُ لِرَجُلٍ مِّن قَلْبَيْنِ فِي جَوْفِهِ ۚ وَمَا جَعَلَ أَزْوَاجَكُمُ اللَّائِي تُظَاهِرُونَ مِنْهُنَّ أُمَّهَاتِكُمْ ۚ وَمَا جَعَلَ أَدْعِيَاءَكُمْ أَبْنَاءَكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ قَوْلُكُم بِأَفْوَاهِكُمْ ۖ وَاللَّهُ يَقُولُ الْحَقَّ وَهُوَ يَهْدِي السَّبِيلَ
ख़ुदा ने किसी आदमी के सीने में दो दिल नहीं पैदा किये कि (एक ही वक्त दो इरादे कर सके) और न उसने तुम्हारी बीवियों को जिन से तुम जेहार करते हो तुम्हारी माएँ बना दी और न उसने तुम्हारे लिये पालकों को तुम्हारे बेटे बना दिये। ये तो फ़क़त तुम्हारी मुँह बोली बात (और ज़ुबानी जमा खर्च) है और (चाहे किसी को बुरी लगे या अच्छी) खुदा तो सच्ची कहता है और सीधी राह दिखाता है।
5ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ ۚ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَا أَخْطَأْتُم بِهِ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा करो यही खुदा के नज़दीक बहुत ठीक है हाँ अगर तुम लोग उनके असली बापों को न जानते हो तो तुम्हारे दीनी भाई और दोस्त हैं (उन्हें भाई या दोस्त कहकर पुकारा करो) और हाँ इसमें भूल चूक जाओ तो अलबत्ता उसका तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है मगर जब तुम दिल से जानबूझ कर करो (तो ज़रूर गुनाह है) और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है।
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 3

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Monday, September 28, 2026

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