अल-अहज़ाब · 7/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ النَّبِيِّينَ مِيثَاقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۖ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا ۝٧
Wa iz akhaznaa minan Nabiyyeena meesaaqahum wa minka wa min Noohinw wa Ibraaheema wa Moosaa wa Eesab-ni-Maryama wa akhaznaa minhum meesaaqan ghaleezaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मीसेक़ (मिथ़ाक़): दृढ़ वचन, अटूट वादा, गंभीर संधि।
  • ग़लीज़: अत्यंत कठोर, बहुत मज़बूत और भारी।

तफ़सीर:

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब हमने सभी नबियों से उनका दृढ़ वचन लिया था — यह कि वे अल्लाह की इबादत करें, उसके साथ किसी को साझी न ठहराएँ, और उन्हें सौंपी गई रिसालत (पैग़ाम) को पूरी अमानतदारी से लोगों तक पहुँचाएँ। यह वचन उन सभी से लिया गया, और विशेष रूप से आपसे, नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा इब्ने मरियम से — ये वे महान पैग़म्बर हैं जिन्हें ‘उलुल-अज़्म’ (दृढ़ संकल्प वाले रसूल) कहा जाता है, क्योंकि ये शरीयत (धर्म-संहिता) के मूल स्तंभ हैं। हमने उनसे अत्यंत कठोर और भारी वचन लिया — एक ऐसा अहद जो अटल है, जिसे तोड़ना असंभव है — कि वे अल्लाह का संदेश पहुँचाने में कोई कसर न छोड़ें, एक-दूसरे की पुष्टि करें, और इस मार्ग पर हर कठिनाई को सहन करें।

यह वचन केवल शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक गंभीर ज़िम्मेदारी थी जो उनके कंधों पर रखी गई। यह मीसेक़ उनसे उस समय लिया गया जब उन्हें नबुव्वत के लिए चुना गया, और यह उनके जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बना।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाते हैं कि नबियों का मार्ग एक ही था — अल्लाह की इबादत, उसकी रिसालत का प्रचार, और सत्य पर अडिग रहना। यह वचन आज हमारे लिए भी एक सबक़ है कि हम अपने जीवन में अल्लाह से किए गए वादों को पूरा करें, अपने ईमान को मज़बूत रखें, और उस राह पर चलें जो इन महान पैग़म्बरों ने दिखाई।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का दीन (धर्म) कितना गंभीर और महत्वपूर्ण है — यह कोई खेल नहीं, बल्कि एक अमानत है जिसे निभाना हर मुसलमान का कर्तव्य है। जिस प्रकार नबियों ने इस अमानत को निभाया, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों का पालन करके इस अमानत को सँभालना है। यही सच्ची सफलता का मार्ग है — और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है।



📜 आयत 5-9 — अल-अहज़ाब

5ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ ۚ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَا أَخْطَأْتُم بِهِ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा करो यही खुदा के नज़दीक बहुत ठीक है हाँ अगर तुम लोग उनके असली बापों को न जानते हो तो तुम्हारे दीनी भाई और दोस्त हैं (उन्हें भाई या दोस्त कहकर पुकारा करो) और हाँ इसमें भूल चूक जाओ तो अलबत्ता उसका तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है मगर जब तुम दिल से जानबूझ कर करो (तो ज़रूर गुनाह है) और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है।
6النَّبِيُّ أَوْلَىٰ بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ ۗ وَأُولُو الْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِي كِتَابِ اللَّهِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ إِلَّا أَن تَفْعَلُوا إِلَىٰ أَوْلِيَائِكُم مَّعْرُوفًا ۚ كَانَ ذَٰلِكَ فِي الْكِتَابِ مَسْطُورًا
नबी तो मोमिनीन से खुद उनकी जानों से भी बढ़कर हक़ रखते हैं (क्योंकि वह गोया उम्मत के मेहरबान बाप हैं) और उनकी बीवियाँ (गोया) उनकी माएँ हैं और मोमिनीन व मुहाजिरीन में से (जो लोग बाहम) क़राबतदार हैं। किताबें खुदा की रूह से (ग़ैरों की निस्बत) एक दूसरे के (तर्के के) ज्यादा हक़दार हैं मगर (जब) तुम अपने दोस्तों के साथ सुलूक करना चाहो (तो दूसरी बात है) ये तो किताबे (खुदा) में लिखा हुआ (मौजूद) है
7وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ النَّبِيِّينَ مِيثَاقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۖ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था
8لِّيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ ۚ وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
ताकि (क़यामत के दिन) सच्चों (पैग़म्बरों) से उनकी सच्चाई तबलीग़े रिसालत का हाल दरियाफ्त करें और काफिरों के वास्ते तो उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार ही कर रखा है।
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
7आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 7

सूरा अल-अहज़ाब आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और…

सूरा आयत 7/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए