सबा · 38/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ ۝٣٨
Wallazeena yas`awna feee Aayaatinaa mu`aajizeena ulaaa`ika fil`azaabi muhdaroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग हमारी आयतों (की तोड़) में मुक़ाबले की नीयत से दौड़ द्दूप करते हैं वही लोग (जहन्नुम के) अज़ाब में झोक दिए जाएॅगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَسْعَوْنَ – प्रयास करते हैं, दौड़ते हैं
  • مُعَاجِزِينَ – हमें विवश करने की कोशिश करते हुए, अर्थात हमारी आयतों को झुठलाकर उन्हें बेकार करने का प्रयास करते हुए
  • مُحْضَرُونَ – उपस्थित किए जाएंगे, हाज़िर किए जाएंगे

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो अल्लाह की आयतों के खिलाफ साजिशें करते हैं और उन्हें झुठलाने की कोशिश करते हैं। ये लोग सोचते हैं कि वे अल्लाह को हरा देंगे या उसकी योजनाओं को विफल कर देंगे, लेकिन वे बिल्कुल गलत हैं। अल्लाह की शक्ति से कोई नहीं बच सकता।

ऐसे लोग जो हद से बढ़कर अल्लाह की आयतों का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें झुठलाते हैं, और दूसरों को भी सच्चाई से रोकते हैं, उनके लिए अंजाम बहुत भयानक है। वे दुनिया में भले ही कुछ समय के लिए अपनी मंज़िल हासिल कर लें, लेकिन आख़िरत में उन्हें ज़रूर पकड़ा जाएगा। क़यामत के दिन उन्हें अज़ाब के सामने हाज़िर किया जाएगा, और वे उस अज़ाब से बच नहीं पाएंगे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि अल्लाह की आयतों के साथ खिलवाड़ करना, उन्हें झुठलाना, या उनके खिलाफ साजिशें रचना सबसे बड़ी गलती है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह किसी को भी उसकी नाफ़रमानी की सज़ा दिए बिना नहीं छोड़ता।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह की आयतों का सम्मान करना चाहिए, उन पर अमल करना चाहिए, और उन्हें दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए। जो लोग अल्लाह की राह में प्रयास करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा इनाम है, और जो लोग अल्लाह की आयतों के खिलाफ प्रयास करते हैं, उनके लिए बड़ा अज़ाब है।

याद रखिए, अल्लाह की किताब क़ुरआन हमारे लिए हिदायत है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। और जो इससे मुंह मोड़ेगा या इसके खिलाफ साजिशें करेगा, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 36-40 — सबा

36قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिऐ चाहता है) तंग करता है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
37وَمَا أَمْوَالُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُم بِالَّتِي تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰ إِلَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ جَزَاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ آمِنُونَ
और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे
38وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
और जो लोग हमारी आयतों (की तोड़) में मुक़ाबले की नीयत से दौड़ द्दूप करते हैं वही लोग (जहन्नुम के) अज़ाब में झोक दिए जाएॅगे
39قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ لَهُ ۚ وَمَا أَنفَقْتُم مِّن شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है
40وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
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अनुवाद — सबा 38

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सूरा आयत 38/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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