अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- زُلْفَىٰ – अर्थात निकटता, क़ुर्ब।
- الْغُرُفَاتِ – अर्थात जन्नत के ऊँचे महल और ऊँचे दर्जे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में स्पष्ट कर रहे हैं कि माल और औलाद—जिन पर लोग अक्सर नाज़ करते हैं और जिन्हें अपनी इज़्ज़त और बड़ाई का ज़रिया समझते हैं—वे दरअसल अल्लाह के यहाँ किसी को क़ुर्ब (निकटता) और बुलंद दर्जा दिलाने का ज़रिया नहीं हैं। न माल अपनी हैसियत से, न औलाद अपनी तादाद से इंसान को अल्लाह के यहाँ अज़ीज़ बना सकती है। यह एक बहुत बड़ी हक़ीक़त है जो अक्सर लोगों की समझ से दूर रहती है—लोग सोचते हैं कि बड़ी दौलत, बड़ी औलाद, बड़ा ख़ानदान—यही कामयाबी है, लेकिन अल्लाह फ़रमा रहे हैं कि इन चीज़ों का कोई वज़न उसके यहाँ नहीं।
हाँ, अल्लाह के यहाँ क़ुर्बत और बुलंदी सिर्फ़ उस बंदे को मिलती है जो ईमान लाए और नेक अमल करे। यानी दिल से अल्लाह पर ईमान रखे और अपने आमाल को सुधारे। जो शख्स ईमान और अमल-ए-सालिह की राह पर चलता है, उसके लिए अल्लाह ने दो बड़ी ख़ुशख़बरीयाँ सुनाई हैं:
पहली यह कि उसका अज्र (बदला) कई गुना बढ़ा दिया जाता है—नेकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक, बल्कि अल्लाह जिसे चाहे और भी ज़्यादा दे। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि वह अपने नेक बंदों के छोटे-छोटे अमल को भी बड़ा अज्र अता करता है।
दूसरी ख़ुशख़बरी यह कि वे लोग जन्नत के ऊँचे महलों (ग़ुरफ़ात) में होंगे, जहाँ वे हर ख़ौफ़ और हर अंदेशे से महफ़ूज़ होंगे—न अज़ाब का डर, न मौत का ग़म, न नेअमतों के ख़त्म होने का खटका। वहाँ वे पूरी तरह आमीन (सुरक्षित) होंगे।
इस आयत में अल्लाह ने यह भी बता दिया कि माल और औलाद को अगर सही तरीक़े से इस्तेमाल किया जाए तो वे भी क़ुर्बत का ज़रिया बन सकते हैं—माल को अल्लाह की राह में ख़र्च करके, और औलाद को नेक बनाकर जो अपने माँ-बाप के लिए दुआ करे। लेकिन यह तभी मुमकिन है जब इंसान पहले ईमान और अमल-ए-सालिह की बुनियाद रखे।
यह आयत हमें सिखाती है कि असली कामयाबी दौलत और औलाद की कसरत में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसके यहाँ बुलंद दर्जे में है। जो लोग दुनिया की चमक-दमक पर नाज़ करते हैं, वह चीज़ें उन्हें अल्लाह के यहाँ कुछ भी फ़ायदा नहीं देंगी। लेकिन जो लोग ईमान और नेक अमल की राह पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी उनके लिए ऐसे महल तैयार हैं जिनके बारे में किसी आँख ने देखा नहीं, किसी कान ने सुना नहीं।
तो प्यारे भाइयों और बहनों! हमें अपनी ज़िंदगी का रुख़ माल और औलाद की मुहब्बत से हटाकर अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा की तरफ करना चाहिए। अपने माल को अल्लाह की राह में ख़र्च करें, अपनी औलाद को नेक और पारसा बनाएँ, और खुद भी ईमान और नेक अमल पर जमे रहें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के यहाँ बुलंद दर्जे तक पहुँचाएगा और जन्नत के ऊँचे महलों में हमारी जगह बनाएगा। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 35-39 — सबा
अनुवाद — सबा 37
सूरा सबा आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये…सूरा आयत 37/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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