अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْسُطُ الرِّزْقَ: रोज़ी को फैलाना, यानी किसी को अधिक देना और किसी को कम देना।
- وَيَقْدِرُ: तंग करना, यानी रोज़ी को सीमित और संकुचित करना।
- يُخْلِفُهُ: उसकी जगह देना, बदला देना, क्षतिपूर्ति करना।
- خَيْرُ الرَّازِقِينَ: सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जो अपने धन और संतान पर इतराते हैं और सोचते हैं कि यही सब कुछ है—कि मेरा रब ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है रोज़ी में कुशादगी (खुशहाली) देता है और जिसे चाहता है तंगी देता है। यह सब उसकी हिकमत और मसलहत के अनुसार होता है, न कि किसी की ताक़त या कमज़ोरी की वजह से। वह जानता है कि किसके लिए कितनी रोज़ी बेहतर है।
फिर अल्लाह तआला अपने बंदों को एक बहुत बड़ी खुशखबरी देता है: "और जो कुछ भी तुम अल्लाह की राह में खर्च करोगे—चाहे वह थोड़ा हो या बहुत—तो अल्लाह उसका बदला ज़रूर देगा।" यानी जो व्यक्ति अल्लाह की राह में दान करता है, खर्च करता है, वह कभी घाटे में नहीं रहता। अल्लाह उसे दुनिया में बेहतर चीज़ों से बदला देता है, और आख़िरत में उसे ऐसा अज्र (इनाम) अता करेगा जिसका कोई अंदाज़ा नहीं। कभी-कभी अल्लाह उसे दिल की क़नाअत (संतोष) देता है जो किसी खज़ाने से बेहतर है, और कभी उसे और अधिक माल देता है।
और अल्लाह ही सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है। लोग अक्सर कहते हैं कि "अमुक राजा अपने सैनिकों को रोज़ी देता है" या "फलाँ व्यक्ति अपने परिवार का पालन-पोषण करता है"—लेकिन असल में रोज़ी देने वाला सिर्फ अल्लाह है। वही है जो सबको रोज़ी पहुँचाता है, चाहे वह राजा हो या रंक, अमीर हो या ग़रीब। इसलिए बंदे को चाहिए कि वह रोज़ी का तालिब (माँगने वाला) सिर्फ अल्लाह से हो, और उसी के बताए हुए जायज़ ज़राइए (साधनों) को अपनाए।
दावती पहलू:
यह आयत मुसलमानों के दिलों में एक अजीब सुकून और भरोसा पैदा करती है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि रोज़ी देने वाला अल्लाह है, तो हम किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते, किसी से डरते नहीं, और न ही किसी की ज़ुल्म की परवाह करते हैं। अल्लाह ने हमें खर्च करने की तरग़ीब (प्रोत्साहन) दी है और वादा किया है कि वह बदला देगा। यह एक ऐसा वादा है जो कभी टूटता नहीं। जो व्यक्ति अल्लाह की राह में खर्च करता है, वह कभी फ़क़ीर (ग़रीब) नहीं होता, बल्कि अल्लाह उसे और बढ़ाता है। यही वह रास्ता है जो दिल को साफ करता है, माल को बरकत देता है, और आख़िरत में जन्नत का ज़रिया बनता है। तो आओ, हम अपनी रोज़ी के लिए सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करें, और अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करने से न हिचकिचाएँ—क्योंकि अल्लाह सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है।
📜 आयत 37-41 — सबा
अनुवाद — सबा 39
सूरा सबा आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों…सूरा आयत 39/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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