सबा · 39/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ لَهُ ۚ وَمَا أَنفَقْتُم مِّن شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ ۝٣٩
Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa`u min `ibaadihee wa yaqdiru lah; wa maaa anfaqtum min shai`in fahuwa yukhlifuhoo wa Huwa khairur raaziqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَبْسُطُ الرِّزْقَ: रोज़ी को फैलाना, यानी किसी को अधिक देना और किसी को कम देना।
  • وَيَقْدِرُ: तंग करना, यानी रोज़ी को सीमित और संकुचित करना।
  • يُخْلِفُهُ: उसकी जगह देना, बदला देना, क्षतिपूर्ति करना।
  • خَيْرُ الرَّازِقِينَ: सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जो अपने धन और संतान पर इतराते हैं और सोचते हैं कि यही सब कुछ है—कि मेरा रब ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है रोज़ी में कुशादगी (खुशहाली) देता है और जिसे चाहता है तंगी देता है। यह सब उसकी हिकमत और मसलहत के अनुसार होता है, न कि किसी की ताक़त या कमज़ोरी की वजह से। वह जानता है कि किसके लिए कितनी रोज़ी बेहतर है।

फिर अल्लाह तआला अपने बंदों को एक बहुत बड़ी खुशखबरी देता है: "और जो कुछ भी तुम अल्लाह की राह में खर्च करोगे—चाहे वह थोड़ा हो या बहुत—तो अल्लाह उसका बदला ज़रूर देगा।" यानी जो व्यक्ति अल्लाह की राह में दान करता है, खर्च करता है, वह कभी घाटे में नहीं रहता। अल्लाह उसे दुनिया में बेहतर चीज़ों से बदला देता है, और आख़िरत में उसे ऐसा अज्र (इनाम) अता करेगा जिसका कोई अंदाज़ा नहीं। कभी-कभी अल्लाह उसे दिल की क़नाअत (संतोष) देता है जो किसी खज़ाने से बेहतर है, और कभी उसे और अधिक माल देता है।

और अल्लाह ही सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है। लोग अक्सर कहते हैं कि "अमुक राजा अपने सैनिकों को रोज़ी देता है" या "फलाँ व्यक्ति अपने परिवार का पालन-पोषण करता है"—लेकिन असल में रोज़ी देने वाला सिर्फ अल्लाह है। वही है जो सबको रोज़ी पहुँचाता है, चाहे वह राजा हो या रंक, अमीर हो या ग़रीब। इसलिए बंदे को चाहिए कि वह रोज़ी का तालिब (माँगने वाला) सिर्फ अल्लाह से हो, और उसी के बताए हुए जायज़ ज़राइए (साधनों) को अपनाए।

दावती पहलू:

यह आयत मुसलमानों के दिलों में एक अजीब सुकून और भरोसा पैदा करती है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि रोज़ी देने वाला अल्लाह है, तो हम किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते, किसी से डरते नहीं, और न ही किसी की ज़ुल्म की परवाह करते हैं। अल्लाह ने हमें खर्च करने की तरग़ीब (प्रोत्साहन) दी है और वादा किया है कि वह बदला देगा। यह एक ऐसा वादा है जो कभी टूटता नहीं। जो व्यक्ति अल्लाह की राह में खर्च करता है, वह कभी फ़क़ीर (ग़रीब) नहीं होता, बल्कि अल्लाह उसे और बढ़ाता है। यही वह रास्ता है जो दिल को साफ करता है, माल को बरकत देता है, और आख़िरत में जन्नत का ज़रिया बनता है। तो आओ, हम अपनी रोज़ी के लिए सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करें, और अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करने से न हिचकिचाएँ—क्योंकि अल्लाह सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है।



📜 आयत 37-41 — सूरा सबा

37وَمَا أَمْوَالُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُم بِالَّتِي تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰ إِلَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ جَزَاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ آمِنُونَ
और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे
38وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
और जो लोग हमारी आयतों (की तोड़) में मुक़ाबले की नीयत से दौड़ द्दूप करते हैं वही लोग (जहन्नुम के) अज़ाब में झोक दिए जाएॅगे
39قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ لَهُ ۚ وَمَا أَنفَقْتُم مِّن شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है
40وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
41قَالُوا سُبْحَانَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم ۖ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّ ۖ أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ
तू ही हमारा मालिक है न ये लोग (ये लोग हमारी नहीं) बल्कि जिन्नात (खबाएस भूत-परेत) की परसतिश करते थे कि उनमें के अक्सर लोग उन्हीं पर ईमान रखते थे
सबाकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — सबा 39

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Thursday, October 1, 2026

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