फातिर · 14/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ ۝١٤
in tad`oohum laa yasma`oo du`aaa`akum wa law sami`oo mas tajaaboo lakum; wa Yawmal Qiyaamati Yakfuroona bishirkikum; wa laa yunabbi`uka mislu khabeer
📖 हिंदी अर्थ
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कुबूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाक़िफकार (शख्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَدْعُوهُمْ – तुम उन्हें पुकारो (उनसे प्रार्थना करो)
  • لَا يَسْمَعُوا – वे सुनते नहीं
  • مَا اسْتَجَابُوا – वे उत्तर नहीं देते (तुम्हारी माँग पूरी नहीं करते)
  • يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ – वे तुम्हारे शिर्क (ठहराए जाने) से इनकार करेंगे (बराअत ज़ाहिर करेंगे)
  • خَبِيرٍ – पूर्ण ज्ञान रखने वाला (अल्लाह)

तफ़सीर:

ऐ लोगों! जिन मूर्तियों और झूठे माबूदों को तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो, वे तुम्हारी पुकार सुनने की शक्ति ही नहीं रखतीं। वे तो बेजान पत्थर और जड़ चीज़ें हैं, जिनमें न सुनने की क्षमता है, न बोलने की, न किसी काम की। भले ही फ़र्ज़न (मान लिया जाए) कि वे तुम्हारी पुकार सुन भी लें, तो भी वे तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकते, न तुम्हारी कोई ज़रूरत पूरी कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास तो किसी चीज़ का अधिकार ही नहीं है।

और क़ियामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क से बराअत (इनकार) करेंगे। यानी जब सब कुछ खुल जाएगा, तो वे माबूद गवाही देंगे कि हमें तो कुछ पता ही नहीं था कि तुम हमारी पूजा करते थे, और वे तुमसे कहेंगे कि हम तुम्हारे इस काम से बिल्कुल बेज़ार हैं। यही हाल उन सब झूठे माबूदों का होगा जिनकी लोग अल्लाह के सिवा परसतिश करते हैं।

ऐ नबी! तुम्हें इन सब हक़ीक़तों से सच्ची और पूरी ख़बर देने वाला कोई नहीं है, सिवाय अल्लाह के। वही अल्लाह है जो हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है – वह जानता है कि आख़िरत में क्या होगा, बंदों का अंजाम क्या है, और कौन सच्चा है और कौन झूठा। उसकी ख़बर से बढ़कर सच्ची और भरोसेमंद कोई ख़बर नहीं हो सकती।


दावती पहलू:

यह आयत हमें बड़ी सीख देती है कि हम अपनी हर ज़रूरत, हर मुश्किल और हर दुआ में सिर्फ़ अल्लाह ही से माँगें। वही सुनने वाला है, वही क़ुदरत रखने वाला है, और वही हमारी मदद कर सकता है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधते हैं, वे सिर्फ़ अपने आप को धोखा देते हैं। क़ियामत के दिन सब कुछ साफ़ हो जाएगा कि सिर्फ़ अल्लाह ही सच्चा माबूद है और उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दें, और उसी से मदद माँगें – क्योंकि वही सब कुछ जानने वाला और सब कुछ करने की ताक़त रखने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — फातिर

12وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَائِغٌ شَرَابُهُ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى الْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खुश ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत (ख़ुश्गवार) है और ये (दूसरा) खारी कड़ुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
13يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۚ وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक्त पर चला करता है वही खुदा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते
14إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कुबूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाक़िफकार (शख्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता
15۞ يَا أَيُّهَا النَّاسُ أَنتُمُ الْفُقَرَاءُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَاللَّهُ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
लोगों तुम सब के सब खुदा के (हर वक्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खुदा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है
16إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी ख़िलक़त ला बसाए
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अनुवाद — फातिर 14

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Tuesday, August 18, 2026

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