Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آيَةٌ: निशानी, प्रमाण, सबूत।
- نَسْلَخُ: हम खींच लेते हैं, निकाल देते हैं (जैसे खाल खींची जाती है)।
- مُظْلِمُونَ: अंधेरे में डूबे हुए, अंधकार में प्रवेश करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी कुदरत और एकता की एक और स्पष्ट निशानी बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि रात और दिन का आना-जाना, उनका बदलना, यह सब उसकी कुदरत की ज़बरदस्त दलील है। जब अल्लाह चाहता है तो दिन की रोशनी को रात से खींच लेता है, जैसे किसी जानवर की खाल उतारी जाती है। यानी जैसे खाल उतारते ही शरीर बेनकाब हो जाता है, उसी तरह जब सूरज डूबता है तो रोशनी छिन जाती है और पूरी दुनिया अंधेरे में डूब जाती है।
ग़ौर करने वाली बात यह है कि अल्लाह ने दिन को रात से "निकालने" की बजाय "खींचने" का शब्द इस्तेमाल किया है। इससे पता चलता है कि असल चीज़ रात (अंधेरा) है और दिन उसके ऊपर चढ़ा हुआ एक पर्दा है। जब अल्लाह चाहता है, वह यह पर्दा हटा देता है और अंधेरा छा जाता है। यही वजह है कि आयत के आखिर में फ़रमाया: "फिर अचानक वे अंधेरे में होते हैं" यानी लोगों को पता भी नहीं चलता और पूरी दुनिया अंधकार में डूब जाती है।
यह निशानी हमें सिखाती है कि जिस तरह अल्लाह दिन और रात को बदलता है, उसी तरह वह इंसान की ज़िंदगी के हालात भी बदलता है। कभी खुशी और रोशनी का दौर होता है, तो कभी ग़म और अंधेरे का। मगर जिस तरह रात के बाद सुबह ज़रूर आती है, उसी तरह मुसीबत के बाद आसानी भी ज़रूर आती है। यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की बड़ाई को दिल से स्वीकार करता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह कायनात अपने आप नहीं चल रही, बल्कि एक ताकतवर और हिकमत वाला अल्लाह इसे चला रहा है। जिस अल्लाह ने रात और दिन का यह निज़ाम बनाया है, वही हमारी ज़िंदगी के हर मामले का मालिक है। इसलिए हमें चाहिए कि हम उसी की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी के दिए हुए हुक्मों पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 35-39 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 37
सूरा यासीन आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मेरी क़ुदरत की एक निशानी रात है जिससे हम…सूरा आयत 37/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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