अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اتَّقُوا (अत्तक़ू): डरो, बचो, सावधान रहो।
- مَا بَيْنَ أَيْدِيكُمْ (मा बैना अयदीकुम): जो तुम्हारे सामने है, यानी आख़िरत के मामले और उसकी कठिनाइयाँ।
- وَمَا خَلْفَكُمْ (वमा ख़ल्फ़कुम): जो तुम्हारे पीछे है, यानी दुनिया के मामले और उसके फ़ितने (परीक्षण)।
- لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ (लअल्लकुम तुरहमून): ताकि तुम पर रहम किया जाए, यानी अल्लाह की रहमत के हक़दार बनो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) से कहा जाता है कि "उस चीज़ से डरो जो तुम्हारे सामने है"—यानी आख़िरत का दिन, उसके हौलनाक मंज़र, हिसाब की सख़्ती, जहन्नम का अज़ाब—और "उस चीज़ से भी डरो जो तुम्हारे पीछे है"—यानी दुनिया की ज़िंदगी, जो ग़ाफ़िल (लापरवाह) लोगों के लिए धोखे का सामान है, जिसमें लोग अपने अमल (कर्मों) से भटक जाते हैं और अल्लाह की नाफ़रमानी में डूब जाते हैं—तो वे इस नसीहत को कानों पर नहीं डालते। उन्हें कहा जाता है कि "ऐसा करो ताकि तुम पर रहम किया जाए"—यानी अल्लाह की रहमत तुम्हें ढक ले, वह तुम्हारे गुनाह माफ़ कर दे और तुम्हें जन्नत में दाख़िल कर दे—लेकिन वे इस दावत (पुकार) से मुँह मोड़ लेते हैं, उसे गंभीरता से नहीं लेते, और अपनी ज़िद और अहंकार में ही डूबे रहते हैं।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का डर (तक़वा) ही वह चाबी है जो इंसान को दुनिया की फ़ितनों से बचाती है और आख़िरत की सख़्तियों से निजात दिलाती है। जो इंसान अल्लाह से डरता है, वह दुनिया में सही रास्ते पर चलता है और आख़िरत में अल्लाह की रहमत का हक़दार बनता है। यह नसीहत आज भी हमारे लिए है—हमें चाहिए कि जब हमें अच्छी बात कही जाए, तो उसे सुनें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी भलाई का रास्ता है। अल्लाह की रहमत उन्हीं पर होती है जो उसके डर से अपनी ज़िंदगी को सँवारते हैं और उसकी इबादत में मशग़ूल रहते हैं।
📜 आयत 43-47 — यासीन
अनुवाद — यासीन 45
सूरा यासीन आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उन कुफ्फ़ार से कहा जाता है कि इस…सूरा आयत 45/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








