अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नुत्फ़ा (نُّطْفَةٍ): मनी (वीर्य) की एक बूँद।
- ख़सीम (خَصِيمٌ): बहुत झगड़ालू, विरोध करने वाला।
- मुबीन (مُبِينٌ): स्पष्ट, खुला हुआ (अपने झगड़े में प्रत्यक्ष)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस इंसान पर अचरज व्यक्त करती है जो मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होने (आख़िरत) का इन्कार करता है। क्या उसने कभी अपनी पैदाइश की शुरुआत पर ग़ौर नहीं किया? हमने उसे एक बेहद कमज़ोर और तुच्छ मनी की बूँद से पैदा किया। फिर उसे अलग-अलग अवस्थाओं (ख़ून की फुटकी, गोश्त का टुकड़ा, हड्डियाँ, फिर जान डालना) से गुज़ारा, यहाँ तक कि वह बड़ा होकर एक ज़िंदा, ताक़तवर और बोलने-चालने वाला इंसान बन गया।
अब वही इंसान, जो कल तक एक बूँद पानी था, आज अपने रब के सामने खड़ा होकर खुली झगड़ालू और जिद्दी बहस करता है। वह क़ुदरत-ए-ख़ुदा पर सवाल उठाता है और पूछता है: "ये हड्डियाँ कौन ज़िंदा करेगा?" (यासीन: 78) — जबकि उसकी अपनी पैदाइश ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जिसने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
दावत और नसीहत:
ऐ इंसान! ज़रा सोच — तू ख़ुद एक बेजान बूँद था, फिर तुझे ज़िंदगी मिली। जिस रब ने तुझे इस मुक़ाम तक पहुँचाया, क्या वह तुझे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? तेरी अपनी पैदाइश तेरे लिए सबसे बड़ी निशानी है। ये झगड़े और शक तेरे काम न आएँगे। अपने रब की तरफ़ लौट, उसकी क़ुदरत पर ईमान ला, और उस दिन की तैयारी कर जब तू उसके सामने अकेला खड़ा होगा। याद रख — जो तुझे पहली बार मिट्टी और पानी से बना सकता है, वही तुझे दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने में हरगिज़ असमर्थ नहीं है। तेरी किस्मत तेरे ईमान और अमल पर टिकी है, इसलिए इस मौके़ को हाथ से जाने मत दे।
📜 आयत 75-79 — यासीन
अनुवाद — यासीन 77
सूरा यासीन आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि…सूरा आयत 77/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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