यासीन · 77/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
أَوَلَمْ يَرَ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ ۝٧٧
Awalam yaral insaanu annaa khalaqnaahu min nutfatin fa-izaa huwa khaseemum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नुत्फ़ा (نُّطْفَةٍ): मनी (वीर्य) की एक बूँद।
  • ख़सीम (خَصِيمٌ): बहुत झगड़ालू, विरोध करने वाला।
  • मुबीन (مُبِينٌ): स्पष्ट, खुला हुआ (अपने झगड़े में प्रत्यक्ष)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस इंसान पर अचरज व्यक्त करती है जो मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होने (आख़िरत) का इन्कार करता है। क्या उसने कभी अपनी पैदाइश की शुरुआत पर ग़ौर नहीं किया? हमने उसे एक बेहद कमज़ोर और तुच्छ मनी की बूँद से पैदा किया। फिर उसे अलग-अलग अवस्थाओं (ख़ून की फुटकी, गोश्त का टुकड़ा, हड्डियाँ, फिर जान डालना) से गुज़ारा, यहाँ तक कि वह बड़ा होकर एक ज़िंदा, ताक़तवर और बोलने-चालने वाला इंसान बन गया।

अब वही इंसान, जो कल तक एक बूँद पानी था, आज अपने रब के सामने खड़ा होकर खुली झगड़ालू और जिद्दी बहस करता है। वह क़ुदरत-ए-ख़ुदा पर सवाल उठाता है और पूछता है: "ये हड्डियाँ कौन ज़िंदा करेगा?" (यासीन: 78) — जबकि उसकी अपनी पैदाइश ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जिसने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

दावत और नसीहत:

ऐ इंसान! ज़रा सोच — तू ख़ुद एक बेजान बूँद था, फिर तुझे ज़िंदगी मिली। जिस रब ने तुझे इस मुक़ाम तक पहुँचाया, क्या वह तुझे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? तेरी अपनी पैदाइश तेरे लिए सबसे बड़ी निशानी है। ये झगड़े और शक तेरे काम न आएँगे। अपने रब की तरफ़ लौट, उसकी क़ुदरत पर ईमान ला, और उस दिन की तैयारी कर जब तू उसके सामने अकेला खड़ा होगा। याद रख — जो तुझे पहली बार मिट्टी और पानी से बना सकता है, वही तुझे दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने में हरगिज़ असमर्थ नहीं है। तेरी किस्मत तेरे ईमान और अमल पर टिकी है, इसलिए इस मौके़ को हाथ से जाने मत दे।

🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — यासीन

75لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَهُمْ وَهُمْ لَهُمْ جُندٌ مُّحْضَرُونَ
और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत में) उन सबकी हाज़िरी ली जाएगी
76فَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّا نَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनकी बातों से आज़ुरदा ख़ातिर (पेरशान) न हो जो कुछ ये लोग छिपा कर करते हैं और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हैं-हम सबको यक़ीनी जानते हैं
77أَوَلَمْ يَرَ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है
78وَضَرَبَ لَنَا مَثَلًا وَنَسِيَ خَلْقَهُ ۖ قَالَ مَن يُحْيِي الْعِظَامَ وَهِيَ رَمِيمٌ
और हमारी निसबत बातें बनाने लगा और अपनी ख़िलक़त (की हालत) भूल गया और कहने लगा कि भला जब ये हड्डियां (सड़गल कर) ख़ाक हो जाएँगी तो (फिर) कौन (दोबारा) ज़िन्दा कर सकता है
79قُلْ يُحْيِيهَا الَّذِي أَنشَأَهَا أَوَّلَ مَرَّةٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ خَلْقٍ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि उसको वही ज़िन्दा करेगा जिसने उनको (जब ये कुछ न थे) पहली बार ज़िन्दा कर (रखा)
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अनुवाद — यासीन 77

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सूरा आयत 77/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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