यासीन · 78/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
وَضَرَبَ لَنَا مَثَلًا وَنَسِيَ خَلْقَهُ ۖ قَالَ مَن يُحْيِي الْعِظَامَ وَهِيَ رَمِيمٌ ۝٧٨
Wa daraba lanaa maslanw-wa nasiya khalqahoo qaala mai-yuhyil`izaama wa hiya rameem
📖 हिंदी अर्थ
और हमारी निसबत बातें बनाने लगा और अपनी ख़िलक़त (की हालत) भूल गया और कहने लगा कि भला जब ये हड्डियां (सड़गल कर) ख़ाक हो जाएँगी तो (फिर) कौन (दोबारा) ज़िन्दा कर सकता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَمِيمٌ: चूर-चूर, बिखरी हुई और सड़ी-गली हड्डियाँ।
  • يُحْيِي: जीवित करना, दोबारा जान डालना।
  • ضَرَبَ مَثَلًا: मिसाल देना, उदाहरण पेश करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस इन्सान का ज़िक्र कर रहा है जो आख़िरत के दिन को झुठलाता है और क़ियामत के मंज़र का मज़ाक़ उड़ाता है। वह अल्लाह के सामने एक बेहूदा मिसाल पेश करता है और कहता है: "ये सड़ी-गली हड्डियाँ कौन ज़िन्दा करेगा?" — यानी वह अल्लाह की क़ुदरत को भूल गया और अपनी पैदाइश के शुरुआती हालात पर ग़ौर नहीं किया।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इस शख़्स ने हमारे लिए एक ऐसी मिसाल बयान की जो बिल्कुल ग़लत और बेजा है। उसने अपनी पैदाइश को भुला दिया — वह एक नुत्फ़े (बूँद) से बना, फिर ख़ून के लोथड़े से, फिर गोश्त के टुकड़े से, और आख़िरकार एक मुकम्मल इन्सान बन गया। जो अल्लाह उसे पहली बार पैदा कर सका, वही अल्लाह उसे दोबारा क्यों नहीं ज़िन्दा कर सकता?

ये हड्डियाँ चाहे कितनी ही बिखरी और सड़ी-गली क्यों न हों, अल्लाह के लिए उन्हें जोड़ना और उनमें जान डालना बिल्कुल आसान है। जिसने पूरी कायनात को पैदा किया, जिसने आसमान और ज़मीन को बनाया, उसके लिए मुर्दों को ज़िन्दा करना कोई मुश्किल काम नहीं।

ये आयत हमें सिखाती है कि इन्सान को अपनी पैदाइश पर ग़ौर करना चाहिए। जब हम ख़ुद एक क़तरे से बने हैं, तो हमें अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन रखना चाहिए। क़ियामत का दिन आना हक़ है, और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। जो लोग इस पर शक करते हैं, वह दरअसल अपनी अक़्ल और समझ पर पर्दा डाल लेते हैं।

अल्लाह तआला हमें सच्चा यक़ीन अता करे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी क़ुदरत को समझते हैं और उसके हुक्म के आगे सर झुकाते हैं। आमीन।



📜 आयत 76-80 — सूरा यासीन

76فَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّا نَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनकी बातों से आज़ुरदा ख़ातिर (पेरशान) न हो जो कुछ ये लोग छिपा कर करते हैं और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हैं-हम सबको यक़ीनी जानते हैं
77أَوَلَمْ يَرَ الْإِنسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है
78وَضَرَبَ لَنَا مَثَلًا وَنَسِيَ خَلْقَهُ ۖ قَالَ مَن يُحْيِي الْعِظَامَ وَهِيَ رَمِيمٌ
और हमारी निसबत बातें बनाने लगा और अपनी ख़िलक़त (की हालत) भूल गया और कहने लगा कि भला जब ये हड्डियां (सड़गल कर) ख़ाक हो जाएँगी तो (फिर) कौन (दोबारा) ज़िन्दा कर सकता है
79قُلْ يُحْيِيهَا الَّذِي أَنشَأَهَا أَوَّلَ مَرَّةٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ خَلْقٍ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि उसको वही ज़िन्दा करेगा जिसने उनको (जब ये कुछ न थे) पहली बार ज़िन्दा कर (रखा)
80الَّذِي جَعَلَ لَكُم مِّنَ الشَّجَرِ الْأَخْضَرِ نَارًا فَإِذَا أَنتُم مِّنْهُ تُوقِدُونَ
और वह हर तरह की पैदाइश से वाक़िफ है जिसने तुम्हारे वास्ते (मिर्ख़ और अफ़ार के) हरे दरख्त से आग पैदा कर दी फिर तुम उससे (और) आग सुलगा लेते हो
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
78आयत

अनुवाद — यासीन 78

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Saturday, October 3, 2026

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