अस-साफ्फात · 102/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ ۝١٠٢
Falamma balagha ma`a hus sa`ya qaala yaa buniya inneee araa fil manaami anneee azbahuka fanzur maazaa taraa; qaala yaaa abatif `al maa tu`maru satajidunee in shaaa`allaahu minas saabireen
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ: यानी जब वह (इस्माईल) अपने पिता के साथ चलने-फिरने और काम करने की उम्र को पहुँच गया।
  • أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ: मैंने स्वप्न में देखा (और नबियों का स्वप्न वही होता है, जो सत्य हो)।
  • فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ: तो तू देख, तेरी क्या राय है?
  • مِنَ الصَّابِرِينَ: धैर्य रखने वालों में से।

विस्तृत तफ़सीर:

जब हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम बड़े हुए और अपने पिता हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के साथ चलने-फिरने और उनके कामों में सहयोग करने लायक हो गए, तो अल्लाह ने अपने ख़लील (दोस्त) इब्राहीम को एक स्वप्न दिखाया, जिसमें उन्हें आदेश दिया गया कि वे अपने बेटे को क़ुर्बान करें। नबियों के स्वप्न सत्य होते हैं और वे अल्लाह की ओर से संदेश होते हैं। यह एक बहुत बड़ी परीक्षा थी, जो अल्लाह ने अपने नबी को दी।

हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से कहा: "मेरे प्यारे बेटे! मैंने स्वप्न में देखा है कि मैं तुझे ज़िब्ह कर रहा हूँ। अब तू बता, तेरी क्या राय है?" यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से सलाह इसलिए ली, ताकि उसके सब्र और अल्लाह के प्रति समर्पण का इम्तिहान हो सके, न कि इसलिए कि वे ख़ुद हिचकिचा रहे थे। वे अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

इस पर हज़रत इस्माईल ने जो जवाब दिया, वह ईमान, सब्र और आज्ञाकारिता का अद्भुत नमूना है। उन्होंने कहा: "मेरे पिता! जो आदेश आपको मिला है, उसे पूरा कीजिए। आप मुझे अल्लाह की इच्छा से धैर्य रखने वालों में से पाएँगे।" यह जवाब दर्शाता है कि इस्माईल न केवल अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी थे, बल्कि अल्लाह के प्रति भी पूर्ण समर्पित थे। उन्होंने अपनी जान को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने के लिए तैयारी दिखाई, बिना किसी शिकायत या झिझक के।

यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में सब्र और समर्पण ही सबसे बड़ी कुर्बानी है। जब हम अल्लाह के हुक्मों को पूरा करते हैं, चाहे वे हमें कितने भी कठिन क्यों न लगें, तो अल्लाह हमें उसका बेहतरीन बदला देता है। इसी कुर्बानी की याद में अल्लाह ने ईद-उल-अज़हा का त्योहार रखा, ताकि हर मुसलमान इसी सब्र और समर्पण का पाठ सीखे।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि माता-पिता और बच्चों के बीच आपसी मशविरा और सम्मान कितना महत्वपूर्ण है। हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से बात की, और बेटे ने पूरे आदर और समर्पण के साथ जवाब दिया। यह रिश्तों की मिठास और अल्लाह की राह में एकजुटता की सुंदर तस्वीर है।

आज हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह के हुक्मों को सबसे ऊपर रखें, और जब भी कोई मुश्किल आए, तो इस्माईल अलैहिस्सलाम की तरह सब्र और भरोसे के साथ उसका सामना करें। अल्लाह हमें इसी सब्र और समर्पण की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 100-104 — अस-साफ्फात

100رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा
101فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
103فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया
104وَنَادَيْنَاهُ أَن يَا إِبْرَاهِيمُ
और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 102

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Tuesday, August 18, 2026

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