Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ: यानी जब वह (इस्माईल) अपने पिता के साथ चलने-फिरने और काम करने की उम्र को पहुँच गया।
- أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ: मैंने स्वप्न में देखा (और नबियों का स्वप्न वही होता है, जो सत्य हो)।
- فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ: तो तू देख, तेरी क्या राय है?
- مِنَ الصَّابِرِينَ: धैर्य रखने वालों में से।
विस्तृत तफ़सीर:
जब हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम बड़े हुए और अपने पिता हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के साथ चलने-फिरने और उनके कामों में सहयोग करने लायक हो गए, तो अल्लाह ने अपने ख़लील (दोस्त) इब्राहीम को एक स्वप्न दिखाया, जिसमें उन्हें आदेश दिया गया कि वे अपने बेटे को क़ुर्बान करें। नबियों के स्वप्न सत्य होते हैं और वे अल्लाह की ओर से संदेश होते हैं। यह एक बहुत बड़ी परीक्षा थी, जो अल्लाह ने अपने नबी को दी।
हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से कहा: "मेरे प्यारे बेटे! मैंने स्वप्न में देखा है कि मैं तुझे ज़िब्ह कर रहा हूँ। अब तू बता, तेरी क्या राय है?" यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से सलाह इसलिए ली, ताकि उसके सब्र और अल्लाह के प्रति समर्पण का इम्तिहान हो सके, न कि इसलिए कि वे ख़ुद हिचकिचा रहे थे। वे अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।
इस पर हज़रत इस्माईल ने जो जवाब दिया, वह ईमान, सब्र और आज्ञाकारिता का अद्भुत नमूना है। उन्होंने कहा: "मेरे पिता! जो आदेश आपको मिला है, उसे पूरा कीजिए। आप मुझे अल्लाह की इच्छा से धैर्य रखने वालों में से पाएँगे।" यह जवाब दर्शाता है कि इस्माईल न केवल अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी थे, बल्कि अल्लाह के प्रति भी पूर्ण समर्पित थे। उन्होंने अपनी जान को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने के लिए तैयारी दिखाई, बिना किसी शिकायत या झिझक के।
यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में सब्र और समर्पण ही सबसे बड़ी कुर्बानी है। जब हम अल्लाह के हुक्मों को पूरा करते हैं, चाहे वे हमें कितने भी कठिन क्यों न लगें, तो अल्लाह हमें उसका बेहतरीन बदला देता है। इसी कुर्बानी की याद में अल्लाह ने ईद-उल-अज़हा का त्योहार रखा, ताकि हर मुसलमान इसी सब्र और समर्पण का पाठ सीखे।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि माता-पिता और बच्चों के बीच आपसी मशविरा और सम्मान कितना महत्वपूर्ण है। हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे से बात की, और बेटे ने पूरे आदर और समर्पण के साथ जवाब दिया। यह रिश्तों की मिठास और अल्लाह की राह में एकजुटता की सुंदर तस्वीर है।
आज हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह के हुक्मों को सबसे ऊपर रखें, और जब भी कोई मुश्किल आए, तो इस्माईल अलैहिस्सलाम की तरह सब्र और भरोसे के साथ उसका सामना करें। अल्लाह हमें इसी सब्र और समर्पण की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 100-104 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 102
सूरा अस-साफ्फात आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने…सूरा आयत 102/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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