अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَسْلَمَا (अस्लमा): दोनों ने आत्मसमर्पण कर दिया, अल्लाह के आदेश के सामने सिर झुका दिया।
- تَلَّهُ (तल्लाहु): उसे लिटा दिया, गिरा दिया।
- لِلْجَبِينِ (लिल-जबीन): माथे के किनारे (पेशानी के पार्श्व भाग) पर।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब पिता और पुत्र दोनों ने अल्लाह के आदेश के सामने पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण कर दिया और उसके फैसले पर राज़ी हो गए, तो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को माथे के बल लिटा दिया, ताकि वह उसे ज़िब्ह (क़ुर्बान) कर सकें। यह वह क्षण था जब पिता अपने सबसे प्यारे बेटे को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने के लिए पूरी तरह तैयार था, और बेटा भी अपने पिता के हाथों अल्लाह के लिए क़ुर्बान होने के लिए बिल्कुल राज़ी था।
यह दृश्य ईमान, सब्र और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण की सबसे ऊँची मिसाल है। इस आयत में हमें सिखाया गया है कि जब इंसान अपनी इच्छाओं, मोहब्बतों और सबसे प्यारी चीज़ों को अल्लाह के हुक्म के आगे पेश कर देता है, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। यहाँ अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के इस अटूट ईमान को देखते हुए उनके बेटे को बचा लिया और इस क़ुर्बानी को उनके लिए सदा के लिए यादगार बना दिया।
यह घटना हमें सिखाती है कि हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखना चाहिए, चाहे वह हमें कितना भी कठिन क्यों न लगे। अल्लाह अपने बंदों पर उनकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता, और जब बंदा पूरी नीयत से अल्लाह की राह में कदम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसके लिए रास्ते खोल देता है और उसे सब्र का अज्र देता है। यही सच्चा ईमान है—जब दिल, ज़ुबान और अमल तीनों अल्लाह के सामने झुक जाएँ।
📜 आयत 101-105 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 103
सूरा अस-साफ्फात आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने…सूरा आयत 103/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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