अस-साफ्फात · 103/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ ۝١٠٣
Falammaaa aslamaa wa tallahoo liljabeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَسْلَمَا (अस्लमा): दोनों ने आत्मसमर्पण कर दिया, अल्लाह के आदेश के सामने सिर झुका दिया।
  • تَلَّهُ (तल्लाहु): उसे लिटा दिया, गिरा दिया।
  • لِلْجَبِينِ (लिल-जबीन): माथे के किनारे (पेशानी के पार्श्व भाग) पर।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब पिता और पुत्र दोनों ने अल्लाह के आदेश के सामने पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण कर दिया और उसके फैसले पर राज़ी हो गए, तो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को माथे के बल लिटा दिया, ताकि वह उसे ज़िब्ह (क़ुर्बान) कर सकें। यह वह क्षण था जब पिता अपने सबसे प्यारे बेटे को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने के लिए पूरी तरह तैयार था, और बेटा भी अपने पिता के हाथों अल्लाह के लिए क़ुर्बान होने के लिए बिल्कुल राज़ी था।

यह दृश्य ईमान, सब्र और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण की सबसे ऊँची मिसाल है। इस आयत में हमें सिखाया गया है कि जब इंसान अपनी इच्छाओं, मोहब्बतों और सबसे प्यारी चीज़ों को अल्लाह के हुक्म के आगे पेश कर देता है, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। यहाँ अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के इस अटूट ईमान को देखते हुए उनके बेटे को बचा लिया और इस क़ुर्बानी को उनके लिए सदा के लिए यादगार बना दिया।

यह घटना हमें सिखाती है कि हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखना चाहिए, चाहे वह हमें कितना भी कठिन क्यों न लगे। अल्लाह अपने बंदों पर उनकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता, और जब बंदा पूरी नीयत से अल्लाह की राह में कदम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसके लिए रास्ते खोल देता है और उसे सब्र का अज्र देता है। यही सच्चा ईमान है—जब दिल, ज़ुबान और अमल तीनों अल्लाह के सामने झुक जाएँ।



📜 आयत 101-105 — अस-साफ्फात

101فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
103فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया
104وَنَادَيْنَاهُ أَن يَا إِبْرَاهِيمُ
और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम
105قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
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103आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 103

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Tuesday, August 18, 2026

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