अस-साफ्फात · 101/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ ۝١٠١
Fabashsharnaahu bighulaamin haleem
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَبَشَّرْنَاهُ: हमने उसे (इब्राहीम अलैहिस्सलाम को) खुशखबरी दी।
  • بِغُلَامٍ: एक लड़के (बेटे) की।
  • حَلِيمٍ: जो सहनशील, धैर्यवान और समझदार हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमारे प्यारे नबी इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उस दुआ का जवाब है, जो उन्होंने अपने रब से की थी। अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल की और उन्हें एक ऐसे बेटे की खुशखबरी दी, जो बड़ा होकर हलीम (सहनशील, बुद्धिमान और धैर्यवान) होगा। यह बेटा कोई और नहीं बल्कि हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम थे।

यह खुशखबरी सिर्फ़ एक बेटे की नहीं थी, बल्कि यह एक नेक और परहेज़गार औलाद की बशारत थी, जो अपने बुज़ुर्गी (बड़ी उम्र) में हलीम कहलाएगा। यानी वह बचपन में समझदार होगा और जवानी में पूरी तरह सहनशील और संतुलित इंसान बनेगा। यह उस इंसान के लिए सबसे बड़ी नेमत है कि उसे ऐसी औलाद मिले जो अल्लाह का फरमाँबरदार हो और अपने माँ-बाप के लिए रहमत बने।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जब इंसान अपनी ज़रूरतें अल्लाह के सामने रखता है और सब्र के साथ दुआ करता है, तो अल्लाह उसे सबसे अच्छे तरीके से जवाब देता है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जब दुआ की, तो अल्लाह ने उन्हें सिर्फ़ बेटा ही नहीं दिया, बल्कि ऐसा बेटा दिया जो इतिहास में हलीम (सहनशील) के नाम से मशहूर हुआ। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम भी अपने रब से अच्छी और नेक औलाद की दुआ करें, और याद रखें कि अल्लाह सुनने वाला और क़बूल करने वाला है।

यह खुशखबरी आज भी हर उस माँ-बाप के लिए उम्मीद की किरण है जो नेक औलाद की तमन्ना रखते हैं। अल्लाह तआला जब चाहता है, तो बंदे को ऐसी नेमत देता है जिसकी उसे उम्मीद भी नहीं होती। हमें चाहिए कि हम इब्राहीम अलैहिस्सलाम की तरह अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी से माँगें, क्योंकि वही सबसे बड़ा देने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 99-103 — अस-साफ्फात

99وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ
तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ
100رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा
101فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
103فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 101

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Tuesday, August 18, 2026

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