अस-साफ्फात · 110/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ۝١١٠
Kazaalika najzil muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
  • نَجْزِي: हम बदला देते हैं, प्रतिफल प्रदान करते हैं।
  • الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वाले, अच्छा काम करने वाले, जो अपने अमल को ख़ूबसूरत बनाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि जिस तरह हमने अपने नेक बंदे हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उनकी आज्ञाकारिता, उनके धैर्य और उनके अल्लाह के हुक्म के सामने पूर्ण समर्पण का बदला दिया — उन्हें सलामती, रहमत, दुनिया में अच्छी यादगार और आख़िरत में ऊँचे दर्जे अता किए — उसी तरह हम उन सभी लोगों को भी बदला देते हैं जो नेकी करते हैं।

यानी अल्लाह का क़ानून और उसकी सुन्नत (रीति) यही है कि जो बंदा अपने अमल को ख़ालिस अल्लाह के लिए करता है, अपने कामों को सुधारता है, और अपने रब के हुक्मों का पालन करता है, अल्लाह उसे बेहतरीन बदला देता है। यह अल्लाह का वादा है — नेकी करने वालों के लिए बेहतरीन अंजाम है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राह में की गई छोटी से छोटी नेकी भी रद्द नहीं होती। जो लोग अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालते हैं, उनके लिए दुनिया में भी इज़्ज़त और आख़िरत में भी कामयाबी है। अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम को उनकी कुर्बानी और फ़रमाँबरदारी का ऐसा इनाम दिया जो क़यामत तक याद रखा जाएगा — और यही अल्लाह का तरीका है: वह अपने मुहसिन (नेकी करने वाले) बंदों को कभी निराश नहीं करता।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए, अपनी नीयत को ख़ालिस करना चाहिए, और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह का इनाम उसके बंदों के लिए हमेशा तैयार है — बशर्ते वे सच्चे दिल से नेकी करें और उसी की राह पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 108-112 — अस-साफ्फात

108وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है
109سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ
कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं
110كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं
111إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
112وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
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110आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 110

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Tuesday, August 18, 2026

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