अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ: वे (स्त्रियाँ) जो अपनी दृष्टि को सिर्फ़ अपने पतियों पर ही रखती हैं, किसी और की ओर नहीं देखतीं।
- عِينٌ: बड़ी और खूबसूरत आँखों वाली (हसीन आँखों वाली)।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत के उन ईनामों का ज़िक्र कर रहे हैं जो उसके नेक बंदों के लिए तैयार किए गए हैं। फ़रमाता है कि जन्नत में उन (मोमिनों) के पास ऐसी पाक-दामन और पवित्र स्त्रियाँ होंगी जो अपनी निगाहें सिर्फ़ अपने शौहरों पर ही रखती हैं। वे किसी दूसरे की तरफ़ देखती ही नहीं, क्योंकि उन्हें अपने पतियों से इतनी मुहब्बत और रज़ामंदी होगी कि उनकी निगाहें कभी दूसरी तरफ़ नहीं जातीं। ये स्त्रियाँ बड़ी खूबसूरत आँखों वाली होंगी, जिनकी सुंदरता का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। उनकी आँखें इतनी प्यारी और मोहक होंगी कि देखने वाले की नज़रें ठहर जाएँ।
ये वो जन्नती हूरें हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए ख़ास तौर पर बनाया है। वे निगाहों की पाकी और अदा की नर्मी में मिसाल हैं। जिस तरह दुनिया में एक नेक औरती अपने शौहर की वफ़ादार होती है और उसकी मुहब्बत में डूबी रहती है, उसी तरह जन्नत में ये हूरें अपने पतियों की मुहब्बत में इस क़दर मग्न होंगी कि उन्हें किसी और की तरफ़ देखने की ज़रूरत ही नहीं होगी। उनकी आँखें सिर्फ़ अपने पतियों के लिए होंगी और उनकी खूबसूरती सिर्फ़ उन्हीं के लिए।
ये आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेअमतें सिर्फ़ खाने-पीने तक महदूद नहीं, बल्कि वहाँ की हर चीज़ में कमाल की खूबसूरती और राहत है। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए ऐसी चीज़ें तैयार की हैं जिनका कोई शुमार नहीं। ये उन लोगों के लिए इनाम है जो दुनिया में अल्लाह की इताअत करते हैं, अपनी निगाहों को हराम से बचाते हैं और अपने दिलों को पाक रखते हैं।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि जो लोग दुनिया में अपनी निगाहों को हराम से बचाते हैं और अपने दिलों को पाक रखते हैं, अल्लाह उन्हें जन्नत में ऐसा इनाम देगा जो हमारे ख़याल से भी बाहर है। ये अल्लाह का फ़ज़ल और करम है कि वो अपने नेक बंदों को ऐसी जगह देगा जहाँ हर तरफ़ खुशी और सुकून हो। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, उसकी इताअत करें और उससे जन्नत की दुआ करें, क्योंकि ये नेअमतें उन्हीं के लिए हैं जो अल्लाह के फ़रमाँबरदार बंदे हैं।
📜 आयत 46-50 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 48
सूरा अस-साफ्फात आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली…सूरा आयत 48/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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