साद · 50/88
अनुवाद उच्चारण — साद
جَنَّاتِ عَدْنٍ مُّفَتَّحَةً لَّهُمُ الْأَبْوَابُ ۝٥٠
Jannaati `adnim mufat tahatal lahumul abwaab
📖 हिंदी अर्थ
(यानि) हमेशा रहने के (बेहिश्त के) सदाबहार बाग़ात जिनके दरवाज़े उनके लिए (बराबर) खुले होगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جَنَّاتِ عَدْنٍ: स्थायी निवास के बगीचे, जहाँ हमेशा रहना होगा।
  • مُفَتَّحَةً لَهُمُ الْأَبْوَابُ: उनके लिए दरवाज़े खोले हुए होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह आख़िरत का इनाम है जो अल्लाह तआला ने अपने डरने वाले और आज्ञा मानने वाले बंदों के लिए तैयार किया है। ये जन्नत के ऐसे बाग़ हैं जो हमेशा रहने वाले हैं, और उनके दरवाज़े उनके लिए खुले हुए होंगे—न तो उन्हें बंद करने वाला कोई होगा और न ही उनमें कोई रुकावट। यह खुलापन उनके सम्मान और आदर के लिए होगा, जैसे किसी महान अतिथि के लिए महल के दरवाज़े खोल दिए जाएँ। जन्नत के ये दरवाज़े सिर्फ़ एक नहीं, बल्कि कई होंगे, और हर दरवाज़े से उन्हें प्रवेश का अधिकार होगा। यह अल्लाह की ओर से उनके लिए एक विशेष सम्मान है कि वे बिना किसी कठिनाई के, बिना किसी रोक-टोक के, सीधे उस स्थायी निवास में दाखिल होंगे जहाँ हर तरह की नेमतें और खुशियाँ उनका इंतज़ार कर रही हैं।

यहाँ अल्लाह तआला ने "मुफ़त्तहा" (खुले हुए) शब्द से यह संकेत दिया है कि जन्नत के दरवाज़े उनके लिए पहले से ही खोल दिए गए हैं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की प्रतीक्षा या परेशानी न उठानी पड़े। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है जो दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों से कितना प्रेम करता है और उनके लिए कितनी बड़ी तैयारी की है। जिस घर के दरवाज़े पहले से खुले हों, वहाँ पहुँचना कितना आसान होता है! यह अल्लाह की रहमत का एक नमूना है कि वह अपने बंदों का स्वागत करने के लिए जन्नत के दरवाज़े खोलकर रखता है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार ढालें, ताकि हम भी उन खुले दरवाज़ों से दाखिल होने वालों में शामिल हों। यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है, और जो कोई भी उसकी ओर रुजू करेगा, उसके लिए ये दरवाज़े खुले हैं। आइए, हम अपने अमल को सुधारें और इस महान इनाम की ओर बढ़ें, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 48-52 — साद

48وَاذْكُرْ إِسْمَاعِيلَ وَالْيَسَعَ وَذَا الْكِفْلِ ۖ وَكُلٌّ مِّنَ الْأَخْيَارِ
और (ऐ रसूल) इस्माईल और अलयसा और जुलकिफ़ल को (भी) याद करो और (ये) सब नेक बन्दों में हैं
49هَٰذَا ذِكْرٌ ۚ وَإِنَّ لِلْمُتَّقِينَ لَحُسْنَ مَآبٍ
ये एक नसीहत है और इसमें शक नहीं कि परहेज़गारों के लिए (आख़ेरत में) यक़ीनी अच्छी आरामगाह है
50جَنَّاتِ عَدْنٍ مُّفَتَّحَةً لَّهُمُ الْأَبْوَابُ
(यानि) हमेशा रहने के (बेहिश्त के) सदाबहार बाग़ात जिनके दरवाज़े उनके लिए (बराबर) खुले होगें
51مُتَّكِئِينَ فِيهَا يَدْعُونَ فِيهَا بِفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ وَشَرَابٍ
और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खुद्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे
52۞ وَعِندَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ أَتْرَابٌ
और उनके पहलू में नीची नज़रों वाली (शरमीली) कमसिन बीवियाँ होगी
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अनुवाद — साद 50

सूरा साद आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (यानि) हमेशा रहने के (बेहिश्त के) सदाबहार बाग़ात जिनके दरवाज़े…

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Tuesday, August 18, 2026

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