साद · 51/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
مُتَّكِئِينَ فِيهَا يَدْعُونَ فِيهَا بِفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ وَشَرَابٍ ۝٥١
Muttaki`eena feehaa yad`oona feehaa bifaakihatin kaseeratinw wa sharaab
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खुद्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُتَّكِئِينَ — तकियों के सहारे आराम से बैठे हुए (झुके हुए)
  • يَدْعُونَ — वे बुलाएँगे / माँगेंगे (ख़ादिमों से)
  • بِفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ — अनेक प्रकार के फल
  • وَشَرَابٍ — और पेय पदार्थ (पीने की चीज़ें)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) की उस नेमत भरी ज़िंदगी का सुंदर चित्रण करती है जो अल्लाह तआला के डर और उसकी इताअत (आज्ञाकारिता) के कारण जन्नत तक पहुँचे हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जन्नत के अंदर तख़्तों (आरामदेह सिंहासनों) पर तकिया लगाए आराम से बैठे होंगे। उनकी हर इच्छा पूरी होगी, और वे अपने ख़ादिमों से अनेक प्रकार के फल और स्वादिष्ट पेय पदार्थ माँगेंगे — जो कुछ भी उनका दिल चाहेगा और आँखें लुत्फ़ उठाएँगी, वह सब उनके सामने हाज़िर होगा।

इस आयत में फलों का विशेष रूप से ज़िक्र इसलिए किया गया है कि जन्नत में उनका खाना-पीना सिर्फ़ आनंद और लज़्ज़त के लिए होगा, न कि भूख या प्यास बुझाने के लिए — क्योंकि जन्नत में न भूख होगी, न प्यास। यह उस आराम और सुकून की झलक है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना कृपालु है। उसने अपने नेक बंदों के लिए ऐसी जगह तैयार की है जहाँ हर तरह की खुशी और आराम मौजूद है। ज़रा सोचिए — जिस जन्नत में ये नेमतें हैं, उसका रास्ता सिर्फ़ अल्लाह की इताअत और उसके डर से गुज़रता है। यानी दुनिया में कुछ दिन की परहेज़गारी और नेकी का इनाम ऐसी जगह है जहाँ कभी कोई दुख, थकान या मायूसी नहीं होगी। अल्लाह ने अपने बंदों को यह खुशख़बरी सुनाई है ताकि वे दुनिया की मुश्किलों में हिम्मत न हारें और यक़ीन रखें कि उनकी मेहनत और सब्र का फल बेहतरीन है। यह हमारे रब की उस रहमत की निशानी है जो उसने अपने मोमिन बंदों पर फ़रमा दी है — और यही वह चीज़ है जो हमें अल्लाह की मोहब्बत और उसकी इताअत की तरफ़ खींचती है।



📜 आयत 49-53 — सूरा साद

49هَٰذَا ذِكْرٌ ۚ وَإِنَّ لِلْمُتَّقِينَ لَحُسْنَ مَآبٍ
ये एक नसीहत है और इसमें शक नहीं कि परहेज़गारों के लिए (आख़ेरत में) यक़ीनी अच्छी आरामगाह है
50جَنَّاتِ عَدْنٍ مُّفَتَّحَةً لَّهُمُ الْأَبْوَابُ
(यानि) हमेशा रहने के (बेहिश्त के) सदाबहार बाग़ात जिनके दरवाज़े उनके लिए (बराबर) खुले होगें
51مُتَّكِئِينَ فِيهَا يَدْعُونَ فِيهَا بِفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ وَشَرَابٍ
और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खुद्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे
52۞ وَعِندَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ أَتْرَابٌ
और उनके पहलू में नीची नज़रों वाली (शरमीली) कमसिन बीवियाँ होगी
53هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِيَوْمِ الْحِسَابِ
(मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
51आयत

अनुवाद — साद 51

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Saturday, October 3, 2026

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