अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- फ़ौज (فَوْج): समूह, गिरोह
- मुक़्तहिम (مُقْتَحِم): ज़ोर से घुसने वाला, प्रवेश करने वाला
- ला मरहबा (لَا مَرْحَبًا): कोई स्वागत नहीं, कोई खुशआमदीद नहीं
- सालू (صَالُو): आग में प्रवेश करने वाले, जलने वाले
विस्तृत तफ़सीर:
जब अत्याचारी और सरकश लोग नरक में दाखिल होंगे, तो वहाँ उनके बीच वही झगड़े और लड़ाइयाँ होंगी जो दुनिया में हुआ करती थीं। वे एक-दूसरे को कोसेंगे और एक-दूसरे से बेज़ारी का इज़हार करेंगे। उस वक़्त नरक के कुछ निवासी दूसरे समूह की तरफ़ इशारा करते हुए कहेंगे: "यह एक गिरोह है जो तुम्हारे साथ नरक में ज़बरदस्ती घुस आया है।" यानी जब नए लोग नरक में दाखिल होंगे, तो पहले से मौजूद लोग उन्हें देखकर कहेंगे कि यह भी हमारे साथ नरक में आ गए।
जवाब में नरक के दूसरे निवासी कहेंगे: "इनके लिए कोई स्वागत नहीं, कोई खुशआमदीद नहीं! इनके लिए कोई आराम और सुख-चैन नहीं है।" यह कहकर वे उनसे अपनी बेज़ारी और नफ़रत का इज़हार करेंगे। फिर वे कहेंगे: "ये लोग भी आग में झुलसने वाले हैं, जैसे हम झुलस रहे हैं। ये भी उसी आग के अज़ाब का मज़ा चखेंगे जो हम चख रहे हैं।"
यह वो दर्दनाक मंज़र है जब नरक में दाखिल होने के बाद लोग एक-दूसरे को कोसेंगे और एक-दूसरे से लानत-मलामत करेंगे। लेकिन वहाँ कोई मदद करने वाला नहीं होगा, कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा, और न ही कोई राहत का ज़रिया होगा।
नसीहत और दावत का पहलू:
यह आयत हमें उस भयानक दिन की याद दिलाती है जब नरक में जाने वाले लोग एक-दूसरे से नफ़रत करेंगे और एक-दूसरे को कोसेंगे। आज हम दुनिया में जिन लोगों से मुहब्बत करते हैं, अगर वही लोग हमें नरक की तरफ़ ले जाएँ, तो कल क़यामत के दिन हम उनसे नफ़रत करेंगे और वे हमसे। इसलिए हमें चाहिए कि हम ऐसे लोगों की सोहबत चुनें जो हमें अल्लाह की राह दिखाएँ, जो हमें नेकी की तरफ़ बुलाएँ, और जो हमें जहन्नुम की आग से बचाएँ।
अल्लाह तआला ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें क़ुरआन और सुन्नत का रास्ता दिखाया। आओ हम इस नेमत की क़द्र करें, नेक कामों में जुट जाएँ, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करें जब हमें नरक में एक-दूसरे को कोसना पड़े। याद रखें, आज की मुहब्बत और दोस्ती अगर अल्लाह की रज़ा के लिए नहीं है, तो कल वही दोस्ती हमारे लिए अफ़सोस और पछतावे का सबब बनेगी। अल्लाह हम सबको जहन्नुम की आग से बचाए और जन्नत की राह दिखाए। आमीन।
📜 आयत 57-61 — साद
अनुवाद — साद 59
सूरा साद आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी…सूरा आयत 59/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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