साद · 58/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
وَآخَرُ مِن شَكْلِهِ أَزْوَاجٌ ۝٥٨
Wa aakharu min shak liheee azwaaj
📖 हिंदी अर्थ
तो ये लोग उन्हीं पड़े चखा करें (कुछ लोगों के बारे में) बड़ों से कहा जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَآخَرُ: और दूसरा (अज़ाब)
  • مِن شَكْلِهِ: उसी प्रकार का, उसी जैसा
  • أَزْوَاجٌ: कई प्रकार के, कई किस्में

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों और मुन्किरों के लिए है जिन्होंने आख़िरत को झुठलाया और अल्लाह के रसूलों को नकारा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उनके लिए वह अज़ाब जो पहले ज़िक्र हुआ—यानी खौलता हुआ पानी और बदबूदार पीप जो उनके बदन से बहता होगा—यह सिर्फ़ एक अज़ाब नहीं है, बल्कि इसी तरह के और भी कई प्रकार के अज़ाब हैं जो उनके लिए तैयार किए गए हैं। हर अज़ाब एक दूसरे से अलग और अपनी किस्म में सख़्त होगा।

यानी जहन्नम में सिर्फ़ एक ही तरह की सज़ा नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग किस्मों के अज़ाब होंगे—कभी आग की लपटें, कभी ठंडी हवा (ज़म्हरीर), कभी ज़हरीले कीड़े, कभी जंज़ीरें और बेड़ियाँ, कभी जलता हुआ पानी, कभी पीप और गंदगी। यह सब उनके कुफ़्र और गुनाहों की सज़ा के तौर पर होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही उसकी रहमत की तरफ़ बुलाती है। जिस तरह जहन्नम में अज़ाब की कई किस्में हैं, उसी तरह अल्लाह की रहमत और जन्नत की नेमतें भी कई किस्मों में हैं। अल्लाह ने अपने बंदों पर रहम करते हुए उन्हें आगाह किया है ताकि वे अपनी ज़िंदगी को सुधारें और उस रास्ते पर चलें जो उन्हें जन्नत तक पहुँचाए।

हमें चाहिए कि इस आयत से सबक लें और अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं और उसके हुक्मों को मानते हैं। यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, उनके लिए वहाँ कई तरह के अज़ाब हैं, और जो लोग अल्लाह की इताअत करते हैं, उनके लिए ऐसी नेमतें हैं जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता।

अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की नेमतों से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 56-60 — सूरा साद

56جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا فَبِئْسَ الْمِهَادُ
जहन्नुम जिसमें उनको जाना पड़ेगा तो वह क्या बुरा ठिकाना है
57هَٰذَا فَلْيَذُوقُوهُ حَمِيمٌ وَغَسَّاقٌ
ये खौलता हुआ पानी और पीप और इस तरह अनवा अक़साम की दूसरी चीज़े हैं
58وَآخَرُ مِن شَكْلِهِ أَزْوَاجٌ
तो ये लोग उन्हीं पड़े चखा करें (कुछ लोगों के बारे में) बड़ों से कहा जाएगा
59هَٰذَا فَوْجٌ مُّقْتَحِمٌ مَّعَكُمْ ۖ لَا مَرْحَبًا بِهِمْ ۚ إِنَّهُمْ صَالُو النَّارِ
ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी जाएगी उनका भला न हो ये सब भी दोज़ख़ को जाने वाले हैं
60قَالُوا بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ الْقَرَارُ
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
58आयत

अनुवाद — साद 58

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Thursday, October 1, 2026

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