अन-निसा · 69/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَالرَّسُولَ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَاءِ وَالصَّالِحِينَ ۚ وَحَسُنَ أُولَٰئِكَ رَفِيقًا ۝٦٩
Wa many-yuti`il laaha war Rasoola fa ulaaa`ika ma`al lazeena an`amal laahu `alaihim minan nabiyyeena wassiddeeqeena washshuhadaaa`i wassaaliheen; wa hasuna ulaaa`ika rafeeqaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स ने ख़ुदा और रसूल की इताअत की तो ऐसे लोग उन (मक़बूल) बन्दों के साथ होंगे जिन्हें ख़ुदा ने अपनी नेअमतें दी हैं यानि अम्बिया और सिद्दीक़ीन और शोहदा और सालेहीन और ये लोग क्या ही अच्छे रफ़ीक़ हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصِّدِّيقِينَ: वे लोग जो अपने ईमान में पूर्ण सत्यवादी हों, जिनका विश्वास, कथन और कर्म सब सत्य पर हो।
  • الشُّهَدَاءِ: वे लोग जो अल्लाह के मार्ग में शहीद हुए, या जिन्होंने अपने जीवन में सत्य की गवाही दी।
  • الصَّالِحِينَ: वे नेक लोग जिनके बाहरी और भीतरी दोनों पहलू अच्छे हों और जिनके कर्म सुधर जाएँ।
  • رَفِيقًا: साथी, संगी।

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का पालन करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो व्यक्ति अल्लाह के आदेशों और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शिक्षाओं का पालन करेगा, वह उन महान लोगों के साथ होगा जिन पर अल्लाह ने अपनी विशेष कृपा की है। ये लोग चार श्रेणियों में आते हैं:

  1. नबी (पैगंबर): वे महान पुरुष जिन्हें अल्लाह ने अपना संदेश पहुँचाने के लिए चुना।
  2. सिद्दीक़ीन: वे सच्चे लोग जिन्होंने पैगंबरों की पुष्टि में पूर्ण सत्य का पालन किया, जैसे अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.)।
  3. शुहदा: वे शहीद जो अल्लाह के मार्ग में अपनी जान न्योछावर कर देते हैं।
  4. सालेहीन: वे नेक लोग जिनके कर्म और आचरण अच्छे होते हैं।

यह आयत एक विशेष घटना के संदर्भ में उतरी। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के एक सेवक थुबान (रज़ि.) ने डर व्यक्त किया कि वे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ऊँची मर्तबा के कारण क़यामत के दिन उन्हें नहीं देख पाएँगे। तब यह आयत उतरी कि जो अल्लाह और रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, वह उन्हीं के साथ होगा, चाहे उसका दर्जा उनके बराबर न हो। इसका मतलब यह है कि आज्ञाकारी लोग जन्नत में नबियों की संगत और उनके दर्शन का आनंद लेंगे, उनकी मजलिस में शामिल होंगे और उनसे मिल सकेंगे। आयत के अंत में कहा गया कि ये लोग कितने अच्छे साथी हैं! यानी जन्नत में इनके साथ रहना कितना सुखद और सम्मानजनक होगा।

शिक्षाएँ और लाभ:

  • यह आयत मुसलमानों को प्रोत्साहित करती है कि वे अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करें, क्योंकि इसी का परिणाम जन्नत में सर्वश्रेष्ठ लोगों की संगत है।
  • यह बताती है कि अल्लाह की रहमत इतनी व्यापक है कि वह अपने आज्ञाकारी बंदों को नबियों, सिद्दीक़ीन, शुहदा और सालेहीन के साथ उठाएगा, भले ही उनके कर्म उनके बराबर न हों।
  • यह आयत उन लोगों के लिए सांत्वना है जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से प्रेम करते हैं और उनसे मिलने की लालसा रखते हैं — आज्ञाकारिता ही उस मुलाकात का माध्यम है।
  • यह हमें सिखाती है कि अच्छे साथी का चुनाव कितना महत्वपूर्ण है; जन्नत में सबसे अच्छे साथी वे ही हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी कृपा से नवाज़ा है।
  • यह आयत हमें आशा देती है कि अल्लाह की आज्ञाकारिता का फल केवल जन्नत ही नहीं, बल्कि जन्नत में सर्वोच्च लोगों की संगति भी है — यह एक ऐसा सम्मान है जो किसी और माध्यम से नहीं मिल सकता।
🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अन-निसा

67وَإِذًا لَّآتَيْنَاهُم مِّن لَّدُنَّا أَجْرًا عَظِيمًا
और (दीन में भी) बहुत साबित क़दमी से जमे रहते और इस सूरत में हम भी अपनी तरफ़ से ज़रूर बड़ा अच्छा बदला देते
68وَلَهَدَيْنَاهُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
और उनको राहे रास्त की भी ज़रूर हिदायत करते
69وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَالرَّسُولَ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَاءِ وَالصَّالِحِينَ ۚ وَحَسُنَ أُولَٰئِكَ رَفِيقًا
और जिस शख्स ने ख़ुदा और रसूल की इताअत की तो ऐसे लोग उन (मक़बूल) बन्दों के साथ होंगे जिन्हें ख़ुदा ने अपनी नेअमतें दी हैं यानि अम्बिया और सिद्दीक़ीन और शोहदा और सालेहीन और ये लोग क्या ही अच्छे रफ़ीक़ हैं
70ذَٰلِكَ الْفَضْلُ مِنَ اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ عَلِيمًا
ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है और ख़ुदा तो वाक़िफ़कारी में बस है
71يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا خُذُوا حِذْرَكُمْ فَانفِرُوا ثُبَاتٍ أَوِ انفِرُوا جَمِيعًا
ऐ ईमानवालों (जिहाद के वक्त) अपनी हिफ़ाज़त के (ज़राए) अच्छी तरह देखभाल लो फिर तुम्हें इख्तेयार है ख्वाह दस्ता दस्ता निकलो या सबके सब इकट्ठे होकर निकल खड़े हो
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अनुवाद — अन-निसा 69

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Tuesday, August 18, 2026

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