ग़ाफिर · 37/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ ۝٣٧
Asbaabas samaawaati faattali`a ilaaa ilaahi Moosaa wa innee la azunnuhoo kaazibaa; wa kazaalika zuyyina li-Fir`awna sooo`u `amalihee wa sudda `anis sabeel; wa maa kaidu Fir`awna illaa fee tabaab
📖 हिंदी अर्थ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ: आसमानों के रास्ते और दरवाज़े।
  • فَأَطَّلِعَ: ताकि मैं झाँककर देख सकूँ।
  • إِلَٰهِ مُوسَىٰ: मूसा (अलैहिस्सलाम) के पूज्य (जिसे वे पूजते हैं)।
  • كَاذِبًا: झूठा।
  • زُيِّنَ: सुंदर बनाकर दिखाया गया।
  • صُدَّ عَنِ السَّبِيلِ: सीधे रास्ते से रोका गया।
  • تَبَابٍ: विनाश, घाटा और हानि।

तफ़सीर (व्याख्या):

फ़िरऔन ने अपने मंत्री हामान से कहा कि वह उसके लिए एक ऊँची इमारत बनाए, ताकि वह आसमानों के दरवाज़ों तक पहुँच सके और वहाँ से मूसा (अलैहिस्सलाम) के पूज्य को देख सके। वह यह कहकर लोगों को बहकाना चाहता था कि मूसा झूठा है, क्योंकि उसका दावा है कि उसका रब आसमानों के ऊपर है। फ़िरऔन ने यह बात केवल लोगों को धोखा देने और अपने झूठे दावे को सच साबित करने के लिए कही थी।

इसी तरह, फ़िरऔन का बुरा काम उसकी नज़र में सुंदर बना दिया गया, और वह सीधे रास्ते से भटकाकर गुमराही के रास्ते पर लगा दिया गया। उसका यह सारा जाल और चालबाज़ी, जो वह मूसा (अलैहिस्सलाम) की आयतों को झूठा साबित करने के लिए कर रहा था, आखिरकार उसके विनाश और घाटे का ही कारण बनी। उसकी यह सारी कोशिशें न केवल दुनिया में बेकार गईं, बल्कि आख़िरत में भी उसे सिर्फ़ शर्मिंदगी और अज़ाब का सामना करना पड़ेगा।


दावत और नसीहत का पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अहंकार और सच्चाई से मुँह मोड़ना इंसान को किस हद तक अंधा कर सकता है। फ़िरऔन के पास ताकत, सत्ता और साधन थे, लेकिन उसके घमंड ने उसे सच्चाई देखने से रोक दिया। आज भी इंसान अपनी समझ, विज्ञान और तरक्की के घमंड में आकर अल्लाह की आयतों को झुठलाता है, लेकिन अल्लाह का कानून है कि जो सच्चाई से दुश्मनी करता है, उसकी चालें उसी के लिए विनाश का कारण बनती हैं।

याद रखिए, सच्चाई को झुठलाने वाले चाहे कितनी भी ऊँची इमारतें बना लें, कितने ही जाल बुन लें, अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी की सच्चाई आखिरकार जीती, और फ़िरऔन जैसे ज़ालिम का साम्राज्य तबाह हो गया। यही अल्लाह का वादा है — सच्चाई और ईमान हमेशा सरबुलंद रहता है, और झूठ और ज़ुल्म का अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं।

🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — ग़ाफिर

35الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है
36وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
37أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
38وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा
39يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
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अनुवाद — ग़ाफिर 37

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Tuesday, August 18, 2026

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