ग़ाफिर · 57/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
لَخَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٥٧
Lakhalqus samaawaati wal ardi akbaru min khalqin naasi wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा करने की ये निस्बत यक़ीनी बड़ा (काम) है मगर अक्सर लोग (इतना भी) नहीं जानते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • लख़ल्क़ुस्समावाति वल अर्ज़: आसमानों और ज़मीन की पैदाइश
  • अक्बरु: बड़ा है, महान है
  • मिन ख़ल्क़िन्नास: इंसानों की पैदाइश से
  • ला यअ्लमून: वे जानते नहीं

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत का एक अज़ीम सबक़ सिखा रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश इंसानों की पैदाइश से कहीं बड़ी और अज़ीम है। ज़रा सोचिए — ये विशाल आसमान, ये चमकते सितारे, ये बुलंद पहाड़, ये फैले हुए समुद्र, ये सारी कायनात — इन सबको पैदा करना इंसान को पैदा करने से कहीं ज़्यादा बड़ा काम है। जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को बिना किसी सहारे के पैदा कर दिया, क्या वह इंसानों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं?

यह आयत क़ियामत के दिन और दोबारा ज़िंदा होने पर दलील देती है। जो लोग मरने के बाद दोबारा उठने को नामुमकिन समझते हैं, उन्हें बताया जा रहा है कि जिस रब ने पहली बार इतनी बड़ी कायनात पैदा की, उसके लिए दोबारा पैदा करना उससे भी आसान है। यह कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि उसके लिए तो बस "कुन" (हो जा) कहना काफी है।

लेकिन अफ़सोस! अक्सर लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते। उनकी समझ पर ग़फ़लत और हवा-ओ-हवस का पर्दा पड़ा हुआ है। वे इतनी बड़ी निशानियों को देखकर भी इबरत हासिल नहीं करते। अगर वे ग़ौर करते तो समझ जाते कि जिस ख़ुदा ने यह सब बनाया, वही उन्हें दोबारा ज़िंदा करके उनके आमाल का हिसाब लेगा।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें ग़ौर-ओ-फ़िक्र की दावत देती है। जब हम आसमान की बुलंदियों को देखें, ज़मीन की फ़राख़ी को देखें, तो याद करें कि यह सब उस ज़ात की क़ुदरत का नमूना है जो हमें भी मरने के बाद ज़िंदा करेगा। यह ईमान हमारे दिलों को मज़बूत करता है और हमें अच्छे आमाल की तरफ़ राग़िब करता है। अल्लाह से डरने वाला इंसान कभी गुनाह नहीं कर सकता, क्योंकि वह जानता है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है। यही ईमान इंसान को ज़िंदगी की हर बुराई से बचाता है और नेकी की राह पर चलाता है।



📜 आयत 55-59 — सूरा ग़ाफिर

55فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
(ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है, और अपने (उम्मत की) गुनाहों की माफी माँगो और सुबह व शाम अपने परवरदिगार की हम्द व सना के साथ तसबीह करते रहो
56إِنَّ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۙ إِن فِي صُدُورِهِمْ إِلَّا كِبْرٌ مَّا هُم بِبَالِغِيهِ ۚ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
जिन लोगों के पास (ख़ुदा की तरफ से) कोई दलील तो आयी नहीं और (फिर) वह ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े निकालते हैं, उनके दिल में बुराई (की बेजां हवस) के सिवा कुछ नहीं हालाँकि वह लोग उस तक कभी पहुँचने वाले नहीं तो तुम बस ख़ुदा की पनाह माँगते रहो बेशक वह बड़ा सुनने वाला (और) देखने वाला है
57لَخَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा करने की ये निस्बत यक़ीनी बड़ा (काम) है मगर अक्सर लोग (इतना भी) नहीं जानते
58وَمَا يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَلَا الْمُسِيءُ ۚ قَلِيلًا مَّا تَتَذَكَّرُونَ
और अंधा और ऑंख वाला (दोनों) बराबर नहीं हो सकते और न मोमिनीन जिन्होने अच्छे काम किए और न बदकार (ही) बराबर हो सकते हैं बात ये है कि तुम लोग बहुत कम ग़ौर करते हो, कयामत तो ज़रूर आने वाली है
59إِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें किसी तरह का शक नहीं मगर अक्सर लोग (इस पर भी) ईमान नहीं रखते
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
57आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 57

सूरा ग़ाफिर आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा…

सूरा आयत 57/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए