अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ادْعُونِي — मुझे पुकारो, मेरी इबादत करो, मुझसे माँगो।
- أَسْتَجِبْ لَكُمْ — मैं तुम्हारी पुकार सुनूँगा, तुम्हारी दुआ क़बूल करूँगा।
- يَسْتَكْبِرُونَ — घमंड करते हैं, अहंकार करते हैं।
- عَنْ عِبَادَتِي — मेरी इबादत से (मुझे अकेला पूजने से)।
- دَاخِرِينَ — अपमानित, ज़लील, छोटे होकर।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने बंदों से बड़ी मुहब्बत और करम के साथ फ़रमा रहा है: "मेरे बंदो! मुझे पुकारो, मुझसे दुआ करो, मुझी से माँगो। मैं तुम्हारी दुआ सुनने और क़बूल करने के लिए तैयार हूँ।" यह अल्लाह का बेपनाह फज़ल है कि उसने अपने बंदों को खुद बुलाया है कि वे उससे माँगें। वह कहता है: "मुझसे माँगो, मैं दूँगा। मुझे पुकारो, मैं सुनूँगा।" यह कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी है! जो बंदा अल्लाह की तरफ रुजू करता है, उसकी दुआ कभी बेकार नहीं जाती। अल्लाह या तो उसे वही देता है जो वह माँगता है, या उससे बेहतर उसके हक में फ़ैसला करता है, या उसकी दुआ को उसकी आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया बना देता है।
लेकिन इसके बाद अल्लाह ने एक सख़्त चेतावनी भी दी: "जो लोग मेरी इबादत से घमंड करते हैं, मुझे पुकारने से अहंकार करते हैं, वह क़यामत के दिन ज़लील और अपमानित होकर जहन्नम में दाखिल होंगे।" यानी जो लोग अल्लाह की इबादत को अपनी शान के ख़िलाफ़ समझते हैं, या अपनी ज़रूरत ही महसूस नहीं करते, वह उस दिन बड़ी रुसवाई के साथ जहन्नम की आग में झोंके जाएँगे। आज वह अल्लाह के सामने सजदा करने में शर्म महसूस करते हैं, कल वहीं सिर झुकाकर ज़लील होंगे।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें दो चीज़ें सिखाती है: पहली, हमें हर हाल में अल्लाह से जुड़े रहना चाहिए। दुआ हमारी इबादत की रूह है। जब हम अल्लाह से माँगते हैं, तो हम अपनी कमज़ोरी और उसकी ताक़त का इक़रार करते हैं। दूसरी, हमें कभी भी अल्लाह की इबादत से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। नमाज़, दुआ, ज़िक्र — यह सब हमारी इज़्ज़त है, रुसवाई नहीं। जो लोग इनसे दूर भागते हैं, वह असल में अपनी ही रुसवाई की तरफ भाग रहे हैं।
आओ, हम आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत से रौशन करें। उससे दुआ करें, उससे माँगें, उसी पर भरोसा रखें। यक़ीनन, वह सुनने वाला, क़बूल करने वाला और बड़ा करम करने वाला है।
📜 आयत 58-62 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 60
सूरा ग़ाफिर आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार इरशाद फ़रमाता है कि तुम मुझसे दुआएं…सूरा आयत 60/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








