अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِتَسْكُنُوا: ताकि तुम आराम करो और सुकून पाओ।
- مُبْصِرًا: रोशन और चमकीला, जिसमें देखा जा सके।
- ذُو فَضْلٍ: बड़े कृपा और एहसान वाला।
- لَا يَشْكُرُونَ: शुक्र अदा नहीं करते।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह है जिसने अपनी बेपनाह रहमत और हिकमत से रात और दिन को तुम्हारे लिए बनाया। रात को उसने अंधेरा और ठंडक वाला बनाया ताकि तुम उसमें सुकून पाओ, तुम्हारी थकान दूर हो, तुम्हारे बदन को आराम मिले और तुम्हारी रूह को सकून हासिल हो। यह रात का सुकून अल्लाह की उस हिकमत का नतीजा है जिसने शरीर की हरकतों को कम करके सुकून और नींद का ज़रिया बनाया। और दिन को उसने रोशन बनाया ताकि तुम उसमें अपने काम-काज कर सको, रोज़ी कमा सको, इबादत कर सको और ज़िंदगी के मामलात को अंजाम दे सको।
यह अल्लाह का बहुत बड़ा एहसान है कि उसने रात और दिन का यह निज़ाम बनाया। अगर रात हमेशा रहे तो ज़िंदगी ठहर जाए, और अगर दिन हमेशा रहे तो इंसान थक जाए। अल्लाह ने इन दोनों को बदल-बदल कर लाने का सिलसिला जारी रखा ताकि इंसान की ज़िंदगी आसान हो जाए।
बेशक अल्लाह तआला लोगों पर बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है। उसने ज़ाहिरी और बातिनी (दिखने वाली और न दिखने वाली) हर नेमत से लोगों को नवाज़ा है। लेकिन अफ़सोस! अधिकतर लोग इन नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते। वे अल्लाह की इबादत नहीं करते, उसके हुक्मों की पैरवी नहीं करते और अपनी ज़िंदगी ग़फ़लत में गुज़ार देते हैं। वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं और अपने रब की तरफ़ रुजू नहीं करते।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की हर नेमत पर शुक्र अदा करना चाहिए। रात और दिन का बदलना, सुकून और काम का मिलना, यह सब अल्लाह की रहमत है। जो शख्स अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। शुक्र का सबसे बड़ा तरीक़ा यह है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों को मानें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें।
अल्लाह तआला हम सबको शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और उसकी नेमतों की क़द्र करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 59-63 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 61
सूरा ग़ाफिर आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते रात बनाई ताकि…सूरा आयत 61/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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