ग़ाफिर · 61/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ ۝٦١
Allaahul lazee ja`ala lakumul laila litqaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; innal laaha lazoo fadlin `alan naasi wa laakinna aksaran naasi laa yashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम करो और दिन को रौशन (बनाया) तकि काम करो बेशक ख़ुदा लोगों परा बड़ा फज़ल व करम वाला है, मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं अदा करते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِتَسْكُنُوا: ताकि तुम आराम करो और सुकून पाओ।
  • مُبْصِرًا: रोशन और चमकीला, जिसमें देखा जा सके।
  • ذُو فَضْلٍ: बड़े कृपा और एहसान वाला।
  • لَا يَشْكُرُونَ: शुक्र अदा नहीं करते।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह है जिसने अपनी बेपनाह रहमत और हिकमत से रात और दिन को तुम्हारे लिए बनाया। रात को उसने अंधेरा और ठंडक वाला बनाया ताकि तुम उसमें सुकून पाओ, तुम्हारी थकान दूर हो, तुम्हारे बदन को आराम मिले और तुम्हारी रूह को सकून हासिल हो। यह रात का सुकून अल्लाह की उस हिकमत का नतीजा है जिसने शरीर की हरकतों को कम करके सुकून और नींद का ज़रिया बनाया। और दिन को उसने रोशन बनाया ताकि तुम उसमें अपने काम-काज कर सको, रोज़ी कमा सको, इबादत कर सको और ज़िंदगी के मामलात को अंजाम दे सको।

यह अल्लाह का बहुत बड़ा एहसान है कि उसने रात और दिन का यह निज़ाम बनाया। अगर रात हमेशा रहे तो ज़िंदगी ठहर जाए, और अगर दिन हमेशा रहे तो इंसान थक जाए। अल्लाह ने इन दोनों को बदल-बदल कर लाने का सिलसिला जारी रखा ताकि इंसान की ज़िंदगी आसान हो जाए।

बेशक अल्लाह तआला लोगों पर बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है। उसने ज़ाहिरी और बातिनी (दिखने वाली और न दिखने वाली) हर नेमत से लोगों को नवाज़ा है। लेकिन अफ़सोस! अधिकतर लोग इन नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते। वे अल्लाह की इबादत नहीं करते, उसके हुक्मों की पैरवी नहीं करते और अपनी ज़िंदगी ग़फ़लत में गुज़ार देते हैं। वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं और अपने रब की तरफ़ रुजू नहीं करते।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की हर नेमत पर शुक्र अदा करना चाहिए। रात और दिन का बदलना, सुकून और काम का मिलना, यह सब अल्लाह की रहमत है। जो शख्स अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। शुक्र का सबसे बड़ा तरीक़ा यह है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों को मानें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें।

अल्लाह तआला हम सबको शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और उसकी नेमतों की क़द्र करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 59-63 — सूरा ग़ाफिर

59إِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें किसी तरह का शक नहीं मगर अक्सर लोग (इस पर भी) ईमान नहीं रखते
60وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ
और तुम्हारा परवरदिगार इरशाद फ़रमाता है कि तुम मुझसे दुआएं माँगों मैं तुम्हारी (दुआ) क़ुबूल करूँगा जो लोग हमारी इबादत से अकड़ते हैं वह अनक़रीब ही ज़लील व ख्वार हो कर यक़ीनन जहन्नुम वासिल होंगे
61اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम करो और दिन को रौशन (बनाया) तकि काम करो बेशक ख़ुदा लोगों परा बड़ा फज़ल व करम वाला है, मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं अदा करते
62ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
यही ख़ुदा तुम्हारा परवरदिगार है जो हर चीज़ का ख़ालिक़ है, और उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम कहाँ बहके जा रहे हो
63كَذَٰلِكَ يُؤْفَكُ الَّذِينَ كَانُوا بِآيَاتِ اللَّهِ يَجْحَدُونَ
जो लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार रखते थे वह इसी तरह भटक रहे थे
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 61

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Thursday, October 1, 2026

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