ग़ाफिर · 59/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
إِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٥٩
Innas Saa`ata la aatiyatul laa raiba feehaa wa laakinna aksaran naasi laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें किसी तरह का शक नहीं मगर अक्सर लोग (इस पर भी) ईमान नहीं रखते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الساعة — क़ियामत, वह समय जब सभी मृतकों को जीवित करके हिसाब-किताब के लिए उठाया जाएगा।
  • لَآتِيَةٌ — अवश्य आने वाली है, निश्चित रूप से घटित होने वाली है।
  • لَا رَيْبَ فِيهَا — इसमें कोई संदेह नहीं, यह सत्य है।
  • لَا يُؤْمِنُونَ — ईमान नहीं लाते, विश्वास नहीं करते।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में क़ियामत के आने की ख़बर को पूरे यक़ीन और स्पष्टता के साथ बयान फ़रमा रहे हैं। फ़रमाते हैं कि क़ियामत अवश्य आने वाली है—इसमें ज़रा भी संदेह की गुंजाइश नहीं। यह कोई कल्पना या मनगढ़ंत बात नहीं, बल्कि एक अटल सत्य है जिसे सभी नबियों ने अपनी-अपनी उम्मतों को सुनाया। जिस दिन यह घड़ी आएगी, सभी लोग अपनी कब्रों से उठ खड़े होंगे और अपने कर्मों का हिसाब देंगे। नेक लोगों को उनके अच्छे कर्मों का बदला मिलेगा और बुरे लोगों को उनकी बुराइयों की सज़ा।

लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि अधिकतर लोग इस सच्चाई पर ईमान नहीं लाते। वे इस दिन को भुला दिए हैं और अपनी दुनियावी ज़िंदगी में ही मशगूल हैं। वे न तो इसकी तैयारी करते हैं और न ही इस पर विश्वास रखते हैं। उनका यह इनकार उनके अपने नुक़सान का कारण बनेगा, क्योंकि जिस दिन वह घड़ी आ जाएगी, तब पछताने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई की याद दिलाती है—हमारी यह ज़िंदगी हमेशा के लिए नहीं है। जिस तरह एक मुसाफ़िर को अपनी मंज़िल की तैयारी करनी पड़ती है, उसी तरह हमें भी उस महान दिन की तैयारी करनी चाहिए। यह ईमान ही है जो इंसान को अच्छे कर्मों की तरफ़ ले जाता है और बुराइयों से बचाता है। जो लोग क़ियामत पर ईमान रखते हैं, वे ज़िंदगी की हर परेशानी में धैर्य रखते हैं और हर अच्छे काम में लगे रहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उनका रब उन्हें देख रहा है और उनके हर अच्छे काम का बदला उन्हें ज़रूर मिलेगा।

आओ हम अपने ईमान को मज़बूत करें और उस दिन की तैयारी करें जब कोई माल, दौलत या रिश्ते काम नहीं आएंगे, बल्कि सिर्फ़ हमारे अच्छे कर्म और अल्लाह की रहमत ही हमारा सहारा होंगे। यही सच्ची कामयाबी है—और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ़ ले जाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 57-61 — ग़ाफिर

57لَخَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा करने की ये निस्बत यक़ीनी बड़ा (काम) है मगर अक्सर लोग (इतना भी) नहीं जानते
58وَمَا يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَلَا الْمُسِيءُ ۚ قَلِيلًا مَّا تَتَذَكَّرُونَ
और अंधा और ऑंख वाला (दोनों) बराबर नहीं हो सकते और न मोमिनीन जिन्होने अच्छे काम किए और न बदकार (ही) बराबर हो सकते हैं बात ये है कि तुम लोग बहुत कम ग़ौर करते हो, कयामत तो ज़रूर आने वाली है
59إِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें किसी तरह का शक नहीं मगर अक्सर लोग (इस पर भी) ईमान नहीं रखते
60وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ
और तुम्हारा परवरदिगार इरशाद फ़रमाता है कि तुम मुझसे दुआएं माँगों मैं तुम्हारी (दुआ) क़ुबूल करूँगा जो लोग हमारी इबादत से अकड़ते हैं वह अनक़रीब ही ज़लील व ख्वार हो कर यक़ीनन जहन्नुम वासिल होंगे
61اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम करो और दिन को रौशन (बनाया) तकि काम करो बेशक ख़ुदा लोगों परा बड़ा फज़ल व करम वाला है, मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं अदा करते
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अनुवाद — ग़ाफिर 59

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Tuesday, August 18, 2026

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