ग़ाफिर · 62/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ ۝٦٢
Zaalikumul laahu Rabbukum khaaliqu kulli shai`; laaa ilaaha illaa Huwa fa annaa tu`fakoon
📖 हिंदी अर्थ
यही ख़ुदा तुम्हारा परवरदिगार है जो हर चीज़ का ख़ालिक़ है, और उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम कहाँ बहके जा रहे हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُؤْفَكُونَ – तुम पलटाए जाते हो, तुम्हें बहकाया जा रहा है (सत्य से असत्य की ओर मोड़ा जा रहा है)।

व्याख्या:

यह वही अल्लाह है जो तुम्हारा रब है, जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हारा पालन-पोषण किया और तुम्हें अनगिनत नेमतें (आशीर्वाद) प्रदान कीं। वही हर चीज़ का रचयिता है—आकाश, पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, पानी, हवा, जीवन और मृत्यु—सब कुछ उसी की रचना है। उसके सिवा कोई और सृष्टिकर्ता नहीं, कोई और पालनहार नहीं। और जब वही सब कुछ बनाने वाला है, तो इबादत (पूजा) का हक़दार भी केवल वही है। उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं।

फिर तुम कैसे सत्य से भटकाए जाते हो? जब इतने स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं—यह विशाल ब्रह्मांड, यह सुव्यवस्थित प्रकृति, तुम्हारा अपना अस्तित्व—सब कुछ उसी की याद दिलाता है। फिर भी तुम उसे छोड़कर उन चीज़ों की पूजा करते हो जो न तो कुछ पैदा कर सकती हैं, न किसी को लाभ पहुँचा सकती हैं, न हानि। यह कैसी बेवकूफी है?

ऐ इंसान! ज़रा सोच—जिसने तुझे बनाया, तुझे खाना दिया, तुझे साँस दी, तेरी हर ज़रूरत पूरी की—क्या वह तेरी इबादत का हक़दार नहीं? क्या उसके सिवा कोई और है जो तुझे बना सके? यह तो तेरी अपनी फ़ितरत (स्वभाव) के खिलाफ़ है कि तू उस सच्चे ख़ालिक़ को छोड़कर झूठे माबूदों की तरफ़ मुड़ जाए।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पहचान उसकी रचना में है। जो कोई भी इस किताब-ए-कायनात (ब्रह्मांड की पुस्तक) को पढ़े, वह समझ जाएगा कि इसका लेखक एक ही है। और जब यह बात इतनी साफ़ है, तो अल्लाह की तरफ़ लौटना ही बुद्धिमानी है। उसकी इबादत करो, उसी से मदद माँगो, उसी से डरो और उसी से उम्मीद रखो। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 60-64 — सूरा ग़ाफिर

60وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ
और तुम्हारा परवरदिगार इरशाद फ़रमाता है कि तुम मुझसे दुआएं माँगों मैं तुम्हारी (दुआ) क़ुबूल करूँगा जो लोग हमारी इबादत से अकड़ते हैं वह अनक़रीब ही ज़लील व ख्वार हो कर यक़ीनन जहन्नुम वासिल होंगे
61اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम करो और दिन को रौशन (बनाया) तकि काम करो बेशक ख़ुदा लोगों परा बड़ा फज़ल व करम वाला है, मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं अदा करते
62ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
यही ख़ुदा तुम्हारा परवरदिगार है जो हर चीज़ का ख़ालिक़ है, और उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम कहाँ बहके जा रहे हो
63كَذَٰلِكَ يُؤْفَكُ الَّذِينَ كَانُوا بِآيَاتِ اللَّهِ يَجْحَدُونَ
जो लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार रखते थे वह इसी तरह भटक रहे थे
64اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ قَرَارًا وَالسَّمَاءَ بِنَاءً وَصَوَّرَكُمْ فَأَحْسَنَ صُوَرَكُمْ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ ۖ فَتَبَارَكَ اللَّهُ رَبُّ الْعَالَمِينَ
अल्लाह ही तो है जिसने तुम्हारे वास्ते ज़मीन को ठहरने की जगह और आसमान को छत बनाया और उसी ने तुम्हारी सूरतें बनायीं तो अच्छी सूरतें बनायीं और उसी ने तुम्हें साफ सुथरी चीज़ें खाने को दीं यही अल्लाह तो तुम्हारा परवरदिगार है तो ख़ुदा बहुत ही मुतबर्रिक है जो सारे जहाँन का पालने वाला है
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
62आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 62

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Thursday, October 1, 2026

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