फुस्सिलत · 11/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ فَقَالَ لَهَا وَلِلْأَرْضِ ائْتِيَا طَوْعًا أَوْ كَرْهًا قَالَتَا أَتَيْنَا طَائِعِينَ ۝١١
Summas tawaaa ilas-samaaa`i wa hiya dukhaanun faqaala lahaa wa lil ardi`tiyaaa taw`an aw karhan qaalataaa atainaa taaa`i`een
📖 हिंदी अर्थ
फिर आसमान की तरफ मुतावज्जे हुआ और (उस वक्त) धुएँ (का सा) था उसने उससे और ज़मीन से फरमाया कि तुम दोनों आओ ख़़ुशी से ख्वाह कराहत से, दोनों ने अर्ज़ की हम ख़़ुशी ख़़ुशी हाज़िर हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ اسْتَوَىٰ: फिर उसने (अल्लाह ने) इरादा किया, या उसकी ओर रुख किया।
  • دُخَانٌ: धुआँ (यानी धुएँ के रूप में गैस या भाप)।
  • ائْتِيَا: दोनों आ जाओ (यानी अपने-अपने काम में लग जाओ)।
  • طَوْعًا: स्वेच्छा से, खुशी से।
  • كَرْهًا: अनिच्छा से, विवश होकर।
  • طَائِعِينَ: आज्ञाकारी, पूरी तरह समर्पित।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और कुदरत का वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने आसमान और ज़मीन की पैदाइश का ज़िक्र करते हुए बताया कि पहले ज़मीन की तैयारी हुई, फिर अल्लाह ने आसमान की ओर रुख किया, जो उस समय धुआँ (एक गैसीय पदार्थ) था। यह उस वक़्त की स्थिति थी जब आसमान अभी ठोस रूप में नहीं आया था, बल्कि धुएँ जैसा फैला हुआ था।

अल्लाह ने आसमान और ज़मीन दोनों को आदेश दिया: "तुम दोनों मेरे हुक्म के सामने आ जाओ, चाहे खुशी से आओ या मजबूरन।" यह आदेश अल्लाह की इच्छा का प्रतीक है, जिसके आगे सारी मख़लूक़ात (सृष्टि) को झुकना ही है। दोनों ने जवाब दिया: "हम आज्ञाकारी बनकर आए।" यानी उन्होंने पूरी तरह से अल्लाह की इच्छा के सामने समर्पण कर दिया, बिना किसी विरोध के।

यहाँ से हमें यह सबक मिलता है कि पूरी कायनात (ब्रह्मांड) अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाती है, और हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपने रब के आदेशों को खुशी-खुशी कबूल करें। अल्लाह ने जिस तरह आसमान और ज़मीन को अपनी कुदरत से बनाया और उन्हें अपने काम में लगाया, उसी तरह हमें भी अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (इच्छा) के मुताबिक ढालना चाहिए।

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत (महानता) और उसकी ताक़त पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब आसमान और ज़मीन जैसी विशाल चीज़ें अल्लाह के हुक्म के आगे झुक जाती हैं, तो हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपने अहंकार को छोड़कर उसकी इबादत करें। यह ईमान की मज़बूती का ज़रिया है कि हम अल्लाह की पैदाइश पर ग़ौर करें और समझें कि वही सब कुछ करने पर क़ादिर (सक्षम) है।

इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रचना में कोई बिखराव नहीं, बल्कि हर चीज़ एक निज़ाम (व्यवस्था) के तहत चल रही है। यह हमारे लिए रहमत और हिदायत है कि हम इस निज़ाम को समझें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के बताए रास्ते पर चलाएँ। जो लोग अल्लाह के हुक्म को मानते हैं, वे असल में सुकून और कामयाबी पाते हैं, क्योंकि अल्लाह की तरफ से आने वाला हर फ़ैसला भलाई ही होता है।



📜 आयत 9-13 — फुस्सिलत

9۞ قُلْ أَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِالَّذِي خَلَقَ الْأَرْضَ فِي يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُ أَندَادًا ۚ ذَٰلِكَ رَبُّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम उस (ख़ुदा) से इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिन में पैदा किया और तुम (औरों को) उसका हमसर बनाते हो, यही तो सारे जहाँ का सरपरस्त है
10وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ مِن فَوْقِهَا وَبَارَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَا أَقْوَاتَهَا فِي أَرْبَعَةِ أَيَّامٍ سَوَاءً لِّلسَّائِلِينَ
और उसी ने ज़मीन में उसके ऊपर से पहाड़ पैदा किए और उसी ने इसमें बरकत अता की और उसी ने एक मुनासिब अन्दाज़ पर इसमें सामाने माईशत का बन्दोबस्त किया (ये सब कुछ) चार दिन में और तमाम तलबगारों के लिए बराबर है
11ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ فَقَالَ لَهَا وَلِلْأَرْضِ ائْتِيَا طَوْعًا أَوْ كَرْهًا قَالَتَا أَتَيْنَا طَائِعِينَ
फिर आसमान की तरफ मुतावज्जे हुआ और (उस वक्त) धुएँ (का सा) था उसने उससे और ज़मीन से फरमाया कि तुम दोनों आओ ख़़ुशी से ख्वाह कराहत से, दोनों ने अर्ज़ की हम ख़़ुशी ख़़ुशी हाज़िर हैं
12فَقَضَاهُنَّ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ فِي يَوْمَيْنِ وَأَوْحَىٰ فِي كُلِّ سَمَاءٍ أَمْرَهَا ۚ وَزَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِمَصَابِيحَ وَحِفْظًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
(और हुक्म के पाबन्द हैं) फिर उसने दोनों में उस (धुएँ) के सात आसमान बनाए और हर आसमान में उसके (इन्तेज़ाम) का हुक्म (कार कुनान कज़ा व क़दर के पास) भेज दिया और हमने नीचे वाले आसमान को (सितारों के) चिराग़ों से मज़य्यन किया और (शैतानों से महफूज़) रखा ये वाक़िफ़कार ग़ालिब ख़ुदा के (मुक़र्रर किए हुए) अन्दाज़ हैं
13فَإِنْ أَعْرَضُوا فَقُلْ أَنذَرْتُكُمْ صَاعِقَةً مِّثْلَ صَاعِقَةِ عَادٍ وَثَمُودَ
फिर अगर हम पर भी ये कुफ्फार मुँह फेरें तो कह दो कि मैं तुम को ऐसी बिजली गिरने (के अज़ाब से) डराता हूँ जैसी क़ौम आद व समूद की बिजली की कड़क
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अनुवाद — फुस्सिलत 11

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Tuesday, August 18, 2026

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